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Lucknow News: मस्तिष्क की महीन नसों की हो सकेगी सटीक जांच
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लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेडियोडायग्नोसिस विभाग में आने वाले दिनों में बेहद महीन नसों की बेहतर जांच हो सकेगी। विभाग में 1.15 करोड़ रुपये से बाइप्लेन डीएसए मशीन खरीदी जा रही है। इसकी सहायता से नसों की त्रिविमीय तस्वीर यानी थ्रीडी इमेज देखी जा सकेगी।
केजीएमयू मीडिया सेल फैकल्टी इंचार्ज प्रो. केके सिंह ने बताया कि बाइप्लेन डिजिटल सबट्रैक्शन एंजियोग्राफी (डीएसए) एक फ्लोरोस्कोपिक तकनीक है। इसका उपयोग रक्त वाहिकाओं की जांच के लिए बड़े पैमाने पर होता है। बजट में प्रस्ताव भेजा गया था। सरकार ने मंजूरी दे दी थी। इसका उपयोग नसों की जांच के लिए किया जाता है, लेकिन मस्तिष्क की जांच में इसका उपयोग बहुत ज्यादा होता है। इसमें नसों की जांच के दौरान हड्डियों जैसी संरचनाओं को छवि से हटा दिया जाता है। इससे नस के दोनों तरफ देखना संभव होता है। इससे मस्तिष्क या फिर शरीर के किसी भी हिस्से में मौजूद नसें बेहद स्पष्ट नजर आती हैं।
स्पाइन सेंटर के लिए आएगी एमआरआई मशीन
केजीएमयू के आर्थोपेडिक सर्जरी विभाग में स्थापित स्पाइन सेंटर के मरीजों को जांच के लिए मुख्य परिसर या फिर शताब्दी भवन के चक्कर नहीं काटने होंगे। मरीजों को लिंब सेंटर के ही नवनिर्मित भवन में जांच की सुविधा मिलेगी। इसके लिए रेडियोडायग्नोसिस विभाग नए भवन में थ्री टेस्ला एमआरआई मशीन लगाएगा। बजट में इसे भी मंजूरी मिली है। अब इसकी खरीद प्रक्रिया चल रही है। इसकी लागत 24 करोड़ रुपये होगी।
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केजीएमयू मीडिया सेल फैकल्टी इंचार्ज प्रो. केके सिंह ने बताया कि बाइप्लेन डिजिटल सबट्रैक्शन एंजियोग्राफी (डीएसए) एक फ्लोरोस्कोपिक तकनीक है। इसका उपयोग रक्त वाहिकाओं की जांच के लिए बड़े पैमाने पर होता है। बजट में प्रस्ताव भेजा गया था। सरकार ने मंजूरी दे दी थी। इसका उपयोग नसों की जांच के लिए किया जाता है, लेकिन मस्तिष्क की जांच में इसका उपयोग बहुत ज्यादा होता है। इसमें नसों की जांच के दौरान हड्डियों जैसी संरचनाओं को छवि से हटा दिया जाता है। इससे नस के दोनों तरफ देखना संभव होता है। इससे मस्तिष्क या फिर शरीर के किसी भी हिस्से में मौजूद नसें बेहद स्पष्ट नजर आती हैं।
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स्पाइन सेंटर के लिए आएगी एमआरआई मशीन
केजीएमयू के आर्थोपेडिक सर्जरी विभाग में स्थापित स्पाइन सेंटर के मरीजों को जांच के लिए मुख्य परिसर या फिर शताब्दी भवन के चक्कर नहीं काटने होंगे। मरीजों को लिंब सेंटर के ही नवनिर्मित भवन में जांच की सुविधा मिलेगी। इसके लिए रेडियोडायग्नोसिस विभाग नए भवन में थ्री टेस्ला एमआरआई मशीन लगाएगा। बजट में इसे भी मंजूरी मिली है। अब इसकी खरीद प्रक्रिया चल रही है। इसकी लागत 24 करोड़ रुपये होगी।
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