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यूपी में ही युवकों को दी जाएगी फिल्म प्रोडक्शन की ट्रेनिंग, 2000 युवकों को प्रशिक्षित करने की योजना
Fri, 18 Dec 2020 07:32 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 18 Dec 2020 07:32 PM IST
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गौतमबुद्ध नगर में फिल्म सिटी के लिए प्रस्तावित भूमि पर लगा बोर्ड
- फोटो : अमर उजाला
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नोएडा में फिल्म सिटी के निर्माण की कवायद में जुटी सरकार अब फिल्म निर्माण (फिल्म प्रोडक्शन) के क्षेत्र में काम करने वाले कुशल मैनपावर भी तैयार करेगी। इसके लिए जल्द ही प्रदेश के युवकों को फिल्म प्रोडक्शन की ट्रेनिंग दी जाएगी। उप्र कौशल विकास मिशन ने इस दिशा में पहल शुरू की है। फिल्म निर्माण के क्षेत्र में काम करने के इच्छुक युवकों को विभिन्न विधाओं की ट्रेनिंग प्रदेश में ही दिलाने की योजना है। यूपी में इस तरह की ट्रेनिंग पहली बार शुरू होने जा रही है। मिशन ने ट्रेनिंग देने के लिए फिलहाल ट्रेनिंग पार्टनर के तौर पर पूना व मुंबई की तीन संस्थाओं से अनुबंध करने की तैयारी है।
दरअसल, फिल्म सिटी बनने के बाद सबसे अधिक जरूरत स्थनीय स्तर पर कुशल मैनपावर की होगी। खास तौर पर फिल्म प्रोडक्शन के क्षेत्र में। इस फील्ड में सबसे ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसके मद्देनजर कौशल विकास मिशन ने प्रदेश के युवकों को फिल्म प्रोडक्शन से संबंधित विभिन्न ट्रेड में ट्रेनिंग दिलाने का फैसला किया है। पहले चरण में करीब 2000 युवकों को फिल्म निर्माण से जुड़ी विभिन्न विधाओं की ट्रेनिंग दी जाएगी।
चयनित युवकों को फिलहाल फिल्म प्रोडक्शन से संबंधित 6 कोर्स के बारे में ट्रेनिंग दी जाएगी। सभी कोर्स में 190 घंटे से लेकर 550 घंटे का प्रशिक्षण होगा। प्रशिक्षण की खासियत होगी कि ट्रेंड युवकों को केंद्रीय कौशल विकास मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाली संस्था ‘नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल ट्रेनिंग’ (एनसीवीटी) से सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा। अब तक ट्रेनिंग देने वाली कंपनी ही सर्टिफिकेट देती थीं। फिल्म प्रोडक्शन से जुड़ी विधाओं की ट्रेनिंग को लेकर कौशल विकास मिशन ने औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं।
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दरअसल, फिल्म सिटी बनने के बाद सबसे अधिक जरूरत स्थनीय स्तर पर कुशल मैनपावर की होगी। खास तौर पर फिल्म प्रोडक्शन के क्षेत्र में। इस फील्ड में सबसे ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसके मद्देनजर कौशल विकास मिशन ने प्रदेश के युवकों को फिल्म प्रोडक्शन से संबंधित विभिन्न ट्रेड में ट्रेनिंग दिलाने का फैसला किया है। पहले चरण में करीब 2000 युवकों को फिल्म निर्माण से जुड़ी विभिन्न विधाओं की ट्रेनिंग दी जाएगी।
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चयनित युवकों को फिलहाल फिल्म प्रोडक्शन से संबंधित 6 कोर्स के बारे में ट्रेनिंग दी जाएगी। सभी कोर्स में 190 घंटे से लेकर 550 घंटे का प्रशिक्षण होगा। प्रशिक्षण की खासियत होगी कि ट्रेंड युवकों को केंद्रीय कौशल विकास मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाली संस्था ‘नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल ट्रेनिंग’ (एनसीवीटी) से सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा। अब तक ट्रेनिंग देने वाली कंपनी ही सर्टिफिकेट देती थीं। फिल्म प्रोडक्शन से जुड़ी विधाओं की ट्रेनिंग को लेकर कौशल विकास मिशन ने औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं।
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इन कंपनियों के साथ होगा एमओयू
उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक ट्रेनिंग देने के लिए पूना की ट्राइडेंट इंटरटेनमेंट व साउंड मैजिक्स के अलावा मुंबई की असेंबलेज इंटरटेनमेंट कंपनियों से एमओयू कराने को लेकर सभी बिंदुओं पर चर्चा हो चुकी है। जल्द ही कंपनी के प्रतिनिधि लखनऊ आएंगे। विभागीय मंत्री की मौजूदगी में एमओयू पर हस्ताक्षर की औपचारिका पूरी की जाएगी। ये कंपनियां प्रदेश में लखनऊ समेत कुछ अन्य शहरों में ही अपने ट्रेनिंग सेंटर खोलेंगी। इन कंपनियों के सरकार की ओर से सिर्फ स्थान उपलब्ध कराया जाएगा। ट्रेनिंग से संबंधित उपकरण व अन्य संसाधन की व्यवस्था कंपनियों को करनी होगी। इनके अलावा नोएडा स्थित कुछ अन्य प्रोडक्शन हाउस से भी स्थान दिलाने को बातचीत चल रही है।
70 प्रतिशत प्लेसमेंट भी कराएगी कंपनी
कौशल विकास मिशन और ट्रेनिंग देने वाली कंपनियों के बीच होने वाले करार में ट्रेनिंग पूरा कराने के बाद 70 फीसदी युवकों का प्लेसमेंट ट्रेनिंग देने वाली कंपनी को ही कराना होगा। इसमें से 35 प्रतिशत युवकों को किसी न किसी संस्थान या प्रोडक्शन हाउस में अनिवार्य रूप से परमानेंट नौकरी दिलानी होगी। जबकि 35 प्रतिशत युवकों को सेल्फ इंप्लायमेंट के तौर पर रोजगार दिलाने का प्रावधान किया गया है।
इन कोर्स में दी जाएगी ट्रेनिंग
असिस्टेंट वीडियो एडीटर, डिजिटल कैमरा फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, डिजिटल ऑडियो रिकॉर्डिंग, लाइटिंग असिस्टेंट व मास कम्यूनिकेशन।
70 प्रतिशत प्लेसमेंट भी कराएगी कंपनी
कौशल विकास मिशन और ट्रेनिंग देने वाली कंपनियों के बीच होने वाले करार में ट्रेनिंग पूरा कराने के बाद 70 फीसदी युवकों का प्लेसमेंट ट्रेनिंग देने वाली कंपनी को ही कराना होगा। इसमें से 35 प्रतिशत युवकों को किसी न किसी संस्थान या प्रोडक्शन हाउस में अनिवार्य रूप से परमानेंट नौकरी दिलानी होगी। जबकि 35 प्रतिशत युवकों को सेल्फ इंप्लायमेंट के तौर पर रोजगार दिलाने का प्रावधान किया गया है।
इन कोर्स में दी जाएगी ट्रेनिंग
असिस्टेंट वीडियो एडीटर, डिजिटल कैमरा फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, डिजिटल ऑडियो रिकॉर्डिंग, लाइटिंग असिस्टेंट व मास कम्यूनिकेशन।