{"_id":"5e3cf62f8ebc3ee5d105aac1","slug":"fill-online-challan-penalty-from-virtual-court","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"अब घर बैठे ‘वर्चुअल कोर्ट’ से भरें ऑनलाइन चालान का जुर्माना, नहीं काटने पड़ेंगे चक्कर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब घर बैठे ‘वर्चुअल कोर्ट’ से भरें ऑनलाइन चालान का जुर्माना, नहीं काटने पड़ेंगे चक्कर
Fri, 07 Feb 2020 11:01 AM IST
शाहरुख खान
नरेश शर्मा, अमर उजाला, लखनऊ
नरेश शर्मा, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 07 Feb 2020 11:01 AM IST
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर यातायात पुलिस, परिवहन प्रवर्तन दस्ते की ओर से किए जाने वाले ऑनलाइन चालान का जुर्माना भरना अब बेहद आसान होने जा रहा है। वाहन मालिकों को इसके लिए यातायात, परिवहन विभाग व कोर्ट के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अब ‘वर्चुअल कोर्ट’ जुर्माना तय करके घर बैठे बता देगा कि कितनी राशि जमा करनी है।
वाहन मालिक को उसके मोबाइल पर जुर्माने की रकम और इसे जमा करने को ट्रेजरी के एप का लिंक भी भेज दिया जाएगा। इससे जुर्माना भरने के बाद वाहन मालिक खुद रसीद प्रिंट कर सकेगा। इसे दिखाकर यातायात पुलिस या संभागीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) से जब्त दस्तावेज रिलीज करा सकेगा। इस सुविधा का शुभारंभ जल्द लखनऊ एवं प्रयागराज में होने जा रहा है।
वर्चुअल कोर्ट को समझें
‘वर्चुअल कोर्ट’ एक एप है, जिसके सॉफ्टवेयर को एनआईसी द्वारा तैयार किया जाएगा। एप से ई-चालान पोर्टल जुड़ा होगा। साथ ही ट्रेजरी का एप (राजकोष) भी कनेक्ट किया जाएगा। दोनों एप का जुड़ाव होने के बाद जब यातायात पुलिस और परिवहन प्रवर्तन दस्ते ऑनलाइन चालान करेंगे तो उसका ब्योरा ‘वर्चुअल कोर्ट’ एप पर भी पहुंच जाएगा। वर्चुअल कोर्ट एप तय अवधि (यातायात पुलिस व परिवहन प्रवर्तन दस्ते जब तय अवधि में प्रकरण का निपटारा नहीं कर पाएंगे) के बाद कार्रवाई शुरू कर देगा।
विज्ञापन
मनमानी पर लगेगा अंकुश
‘वर्चुअल कोर्ट ’ एप का शुभारंभ होते ही यातायात पुलिस व परिवहन प्रवर्तन दस्ते की मनमानी पर अंकुश लगेगा। ऑनलाइन चालान करने में चूक हुई तो कार्रवाई करने वाले भी लपेटे में आएंगे। ‘वर्चुअल कोर्ट’ की खासियत यह भी होगी कि पूरी कार्रवाई पेपरलेस होगी।
विज्ञापन
वाहन मालिक को उसके मोबाइल पर जुर्माने की रकम और इसे जमा करने को ट्रेजरी के एप का लिंक भी भेज दिया जाएगा। इससे जुर्माना भरने के बाद वाहन मालिक खुद रसीद प्रिंट कर सकेगा। इसे दिखाकर यातायात पुलिस या संभागीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) से जब्त दस्तावेज रिलीज करा सकेगा। इस सुविधा का शुभारंभ जल्द लखनऊ एवं प्रयागराज में होने जा रहा है।
विज्ञापन
वर्चुअल कोर्ट को समझें
‘वर्चुअल कोर्ट’ एक एप है, जिसके सॉफ्टवेयर को एनआईसी द्वारा तैयार किया जाएगा। एप से ई-चालान पोर्टल जुड़ा होगा। साथ ही ट्रेजरी का एप (राजकोष) भी कनेक्ट किया जाएगा। दोनों एप का जुड़ाव होने के बाद जब यातायात पुलिस और परिवहन प्रवर्तन दस्ते ऑनलाइन चालान करेंगे तो उसका ब्योरा ‘वर्चुअल कोर्ट’ एप पर भी पहुंच जाएगा। वर्चुअल कोर्ट एप तय अवधि (यातायात पुलिस व परिवहन प्रवर्तन दस्ते जब तय अवधि में प्रकरण का निपटारा नहीं कर पाएंगे) के बाद कार्रवाई शुरू कर देगा।
विज्ञापन
मनमानी पर लगेगा अंकुश
‘वर्चुअल कोर्ट ’ एप का शुभारंभ होते ही यातायात पुलिस व परिवहन प्रवर्तन दस्ते की मनमानी पर अंकुश लगेगा। ऑनलाइन चालान करने में चूक हुई तो कार्रवाई करने वाले भी लपेटे में आएंगे। ‘वर्चुअल कोर्ट’ की खासियत यह भी होगी कि पूरी कार्रवाई पेपरलेस होगी।
60 फीसदी चालान पहुंचते हैं कोर्ट
परिवहन विभाग के उच्च अफसर ने बताया कि यातायात पुलिस एवं परिवहन प्रवर्तन दस्ते जितने ऑनलाइन चालान करते हैं, उनमें से 60 फीसदी कोर्ट तक पहुंचते हैं। 40 फीसदी ही प्रकरण यातायात पुलिस व आरटीओ में निपटते हैं। वर्तमान में जिनके जुर्माने पर विवाद होता है वे कोर्ट भेज दिए जाते हैं।
लखनऊ में प्रति माह चालान
परिवहन प्रवर्तन 4000-4500
यातायात पुलिस 15,000-18,000
न्यू हाईकोर्ट परिसर में बनेगी वर्चुअल कोर्ट
लखनऊ वाहन मालिकों की सुविधा के लिए गोमतीनगर स्थित न्यू हाईकोर्ट परिसर में वर्चुअल कोर्ट बनेगी। इसके लिए न्यायाधीश की नियुक्ति भी होगी, जिनके निर्देशन में कार्रवाई होगी। इस सिलसिले में बीते दिनों प्रयागराज में बैठक हो चुकी है, जिसमें यातायात पुलिस के उच्च अफसरों ने भी शिरकत की थी।
- प्रभात पांडेय, वरिष्ठ सहायक संभागीय अधिकारी व आईटी सेल प्रभारी, परिवहन विभाग
परिवहन विभाग के उच्च अफसर ने बताया कि यातायात पुलिस एवं परिवहन प्रवर्तन दस्ते जितने ऑनलाइन चालान करते हैं, उनमें से 60 फीसदी कोर्ट तक पहुंचते हैं। 40 फीसदी ही प्रकरण यातायात पुलिस व आरटीओ में निपटते हैं। वर्तमान में जिनके जुर्माने पर विवाद होता है वे कोर्ट भेज दिए जाते हैं।
लखनऊ में प्रति माह चालान
परिवहन प्रवर्तन 4000-4500
यातायात पुलिस 15,000-18,000
न्यू हाईकोर्ट परिसर में बनेगी वर्चुअल कोर्ट
लखनऊ वाहन मालिकों की सुविधा के लिए गोमतीनगर स्थित न्यू हाईकोर्ट परिसर में वर्चुअल कोर्ट बनेगी। इसके लिए न्यायाधीश की नियुक्ति भी होगी, जिनके निर्देशन में कार्रवाई होगी। इस सिलसिले में बीते दिनों प्रयागराज में बैठक हो चुकी है, जिसमें यातायात पुलिस के उच्च अफसरों ने भी शिरकत की थी।
- प्रभात पांडेय, वरिष्ठ सहायक संभागीय अधिकारी व आईटी सेल प्रभारी, परिवहन विभाग