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एलडीए का कच्चा-चिट्ठा खुला, बाबुओं की छह अलमारियों से निकाली गईं 500 से अधिक फाइलें, हर पांचवीं फाइल में आवंटियों को परेशान करने के कारनामे

Thu, 11 Mar 2021 01:52 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 11 Mar 2021 01:52 AM IST
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Files taken from clerk almera
एलडीए में बुधवार को बाबुओं की अलमारी तोड़कर फाइलें निकलवाते अधिकारी।
लखनऊ । 24 हजार से अधिक गायब फाइलों को लेकर निजी कंपनी पर एफआईआर करा चुके एलडीए ने अब अपने बाबुओं की अलमारियों की भी जांच शुरू करा दी है। वीसी अभिषेक प्रकाश के आदेश पर बुधवार को संपत्ति विभाग की छह अलमारियां तोड़ी गईं। इनमें से 500 से अधिक फाइलें निकालकर उनकी जांच शुरू कराई गई है। वहीं, 50 से अधिक अलमारियों को सील करा दिया गया है। इन्हें दोबारा कार्रवाई कर खोला जाएगा। अधिकतर फाइलें गोमती नगर या कानपुर रोड योजना की हैं।
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अधिकारियों का मानना है कि हर पांचवीं फाइल ऐसी है जिनमें आवंटियों के नामांतरण, रजिस्ट्री जैसे महत्वपूर्ण काम कराए जाने हैं, जिन्हें बाबुओं ने दबाए रखा। इन फाइलों को रिकॉर्ड रूम में भी नहीं दिया। इससे आवंटियों के काम कराने आने के समय फाइलें ही नहीं मिलती हैं। जो फाइलें अलमारियों से निकल रही हैं, उनकी सूची बनाकर रिकॉर्ड रूप में जमा कराया जाएगा। वहीं, वीसी ने अधूरे काम पूरा कराने के लिए कहा है। अलमारियां तोड़कर फाइलों को निकलवाने के लिए वीसी ने पूरी टीम बनाई है। इसमें संयुक्त सचिव ऋतु सुहास के अलावा ओएसडी राजीव कुमार को रखा गया है। खुद वीसी के पीए केके वर्मा, अनुभाग अधिकारी विधि अतुल कपूर आदि को भी टीम में शामिल किया गया है। कई अलमारियां तो संपत्ति विभाग की पुरानी बिल्डिंग के प्रथम तल पर मिलीं। इन्हें उल्टा घुमाकर दरवाजे को अंदर की तरफ कर दिया गया था, जिससे इन्हें खोलना मुश्किल हो गया। अलमारियां तोड़ने और फाइलें निकालने की फोटोग्राफी भी कराई गई।
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विपुलखंड में नामांतरण ही फंसा
विपुलखंड में डी टाइप भूखंड की फाइल मिली। इसमें एक नामांतरण होने के लिए आवेदन हुआ। मूल फाइल गुम दिखाई गई। डुप्लीकेट फाइल खोलने के लिए पेपर भी आवेदक महिला ने दिए हुए हैं। इसके बाद भी उसका फाइल फंसी है। 2014 में अंतिम बार इस पर काम हुआ है।
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फाइल ही गुम, रजिस्ट्री रुकी
कानपुर रोड योजना की कुछ फाइलें एक डेस्क के नीचे की अलमारी से निकलीं। इस डेस्क पर कोई बाबू बैठा हुआ नहीं था। अधिकतर फाइलों में एक बाबू वीरेंद्र वर्मा के साइन हैं। इनमें से कई की रजिस्ट्री होनी थी। एक फाइल में तो रजिस्ट्री के लिए स्टांप तक लगे मिले। इसके बाद भी रजिस्ट्री क्यों नहीं हुई, इसकी जांच जरूरी है।
मूल फाइल कूड़े की तरह डंप
गोमती नगर की वास्तु खंड की मूल फाइल ही बाबुओं ने कूड़े की तरह डंप कर दी। यहां बने मकानों के आवंटन की यह फाइल थी। रजिस्ट्री होने का जिक्र इस फाइल में किया गया है। अगर किसी वजह से फाइल की जरूरत पड़े तो यह शायद नहीं मिलती।
इन बाबुओं की खोली गईं अलमारी
काशी नाथ राम : बर्खास्त, कै लाश बाबू : बर्खास्त, सरवर अली : सेवानिवृत्त
पूर्व सीएम की सिफारिश का भी कागज निकला
अलमारियां तोड़ते वक्त बड़ी संख्या में खुले कागज भी निकले। इसमें एक कागज 2005 का रहा, जिसमें सपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राम शरण दास के लैटर हेड पर एक भूखंड आवंटन केे लिए कहा गया है। यह आवंटन किसी गौरव अवस्थी के नाम किए जाने की बात कही गई। पत्र में कहा गया है कि पूर्व में मुख्यमंत्री निर्देश दे चुके हैं। इसके बाद भी आवंटन की कार्रवाई नहीं की गई।

10 साल पुरानी क्वार्टर की शीशी निकली
कार्रवाई के वक्त उस वक्त हास्यास्पद स्थिति पैदा हो गई जब बाथरूम की तरफ रखी अलमारी से दस साल पुरानी क्वार्टर की शीशी निकली। इससे यह भी सवाल उठा कि 10 साल से अलमारियों को खोला तक नहीं गया।
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