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आंतों के पास न जमा होने दें फैट, हो सकता है इस बीमारी का खतरा

Thu, 14 Nov 2019 01:24 PM IST
ishwar ashish चंद्रभान यादव/अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 14 Nov 2019 01:24 PM IST
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fat accumulation near the intestine increases the risk of sugar
प्रतीकात्मक तस्वीर
प्री डायबिटीज स्टेज वालों में आंतों के पास फैट जमा है तो शुगर और इससे जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इन मरीजों में इंसुलिन रेजिस्टेंस हो जाता है। यदि इस पर काबू पा लिया जाए तो तमाम लोगों को मधुमेह रोगी होने से बचाया जा सकता है। इसके लिए अभ्यास के साथ खानपान पर नियंत्रण जरूरी है।
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इस बात का खुलासा लोहिया संस्थान के मेडिसिन विभाग के डॉ. निखिल गुप्ता व उनकी टीम के शोध में हुआ है। पेट में त्वचा के नीचे जमा होने वाले वसा को सबक्यूटेनियस और आंतरिक हिस्से में जमा होने वाले वसा को विस्सेरल एब्डॉमिनल फैट कहा जाता है। डॉ. निखिल गुप्ता ने 18 से 60 की उम्र वाले 75 प्री डायबिटीक लोगों पर शोध किया।
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इनकी सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड से पेट के वसा की स्थिति जांची गई। इस दौरान जिन लोगों में आंतों के पास फैट अधिक था, उनमें इंसुलिन रेजिस्टेंस पाया गया। इन मरीजों में मधुमेह के साथ ही मेटोबोलिक सिंड्रोम का खतरा अधिक है। इनमें हार्ट डिजीज भी होने की आशंका रहती है।
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आईसीयू में भर्ती होने वाले मरीजों में शुगर का खतरा ज्यादा

fat accumulation near the intestine increases the risk of sugar
प्रतीकात्मक तस्वीर

इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में भर्ती होने वाले मरीजों में शुगर लेवल सामान्य होने के बाद भी शुगर जनित बीमारियों का खतरा अधिक रहता है। इन मरीजों में शरीर से निकले वाला तत्व का लेवल कम और अधिक (ग्लाइसिन गैप) हो जाता है। ऐसे में शुगर लेवल तेजी से बढ़ता है। ऐसे में विशेष सावधानी बरतनी होती है।

इतना ही नहीं आईसीयू से बाहर आने के बाद शुगर की नियमित निगरानी रखनी पड़ती है। यह खुलासा हुआ है केजीएमयू के शोध में। केजीएमयू के मेडिसिन विभाग के डॉ. डी हिमांशु, डॉ. अरविंद मिश्रा, डॉ. मोनिका कलनी ने आईसीयू के मरीजों में अचानक शुगर बढ़ने की वजह की पड़ताल की।

करीब 150 मरीजों में किए गए शोध के दौरान देखा गया कि जिन मरीजों को कभी भी शुगर नहीं रही है, उन्हें भी आईसीयू में आने के बाद शुुगर की समस्या होती है। इसकी मूल वजह है ग्लाइसिन गैप में उतार-चढ़ाव। इसका बढ़ना और घटना दोनों खतरनाक होता है।

इनमें कई बार हाइपोग्लाइसिमिया यानी लो ब्लड शुगर का भी खतरा रहता है। ग्लाइसिन के प्रभावित होने का असर सीधे तौर पर दिमाग के काम करने की क्षमता पर भी पड़ता है। इससे दौरे पड़ने, स्ट्रोक या कोमा जैसी स्थिति भी हो सकती है। यहां तक कि हाइपोग्लाइसीमिया की वजह से जान भी जा सकती है।

रोगियों को भी एंबुलेंस 108 मुफ्त

fat accumulation near the intestine increases the risk of sugar
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
डायबिटीज रोगियों किसी तरह की आपात स्थिति में अस्पताल जाने के लिए 108 एंबुलेंस सेवा ले सकते हैं। उन्हें कोई शुल्क नहीं देना पड़ेगा। पूरे प्रदेश में जीवीकेईएमआरआई की ओर से इमरजेंसी सेवा के तौर पर 108 एंबुलेंस का संचालन किया जा रहा है। किसी भी मधुमेह रोगी के अचानक गिरने, बेहोश होने की स्थिति में अस्पताल जाने के लिए 108 नंबर पर डायल करके एंबुलेंस को बुलाया जा सकता है।
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