{"_id":"5ce0627dbdec2207626c4776","slug":"fast-food-may-cause-ibd","type":"story","status":"publish","title_hn":"दस्त में खून, पेट दर्द, बुखार और वजन घटे तो हो जाएं सावधान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दस्त में खून, पेट दर्द, बुखार और वजन घटे तो हो जाएं सावधान
Sun, 19 May 2019 01:22 AM IST
manoj tiwari
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: manoj tiwari
Updated Sun, 19 May 2019 01:22 AM IST
विज्ञापन
डेमो
- फोटो : डेमो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखनऊ। दस्त के साथ खून आए और पेट में दर्द बना रहे। बुखार आने के साथ ही वजन में गिरावट हो तो इसे गंभीरता से लें। यह इंफ्लामैट्री बाउल डिजीज (आईबीडी) के लक्षण हो सकते हैं। आईबीडी आंतों की गंभीर बीमारी है। इसका समय पर इलाज नहीं कराने से जान को खतरा रहता है। यह कहना है केजीएमयू के गैस्ट्रोएंटोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. सुमित रूंगटा का। वह शनिवार को केजीएमयू के शताब्दी अस्पताल फेज टू में आयोजित आईबीडी जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
डॉ. रुंगटा ने बताया कि लक्षण दिखते ही तत्काल इलाज शुरू कर दिया जाए तो बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है और मरीज की जान बचाई जा सकती है, लेकिन ज्यादातर मरीज देर से आते हैं। यह दो प्रकार का होता है। इनमें अल्सरेटिव कोलाइटिस और क्रोंस रोग है। इसके होने के कारणों का अभी स्पष्ट रूप से पता नहीं चला है। लेकिन इस बीमारी में आंतों में सूजन हो जाती है।
शहरों में ज्यादा हैं इसके रोगी
गांव के मुकाबले शहरी लोगों की जीवनशैली और खानपान गड़बड़ रहता है। यही वजह है कि इस बीमारी की चपेट में शहरी ज्यादा आ रहे हैं। देशभर में करीब 1.45 लाख लोग इस बीमारी की चपेट में हैं। इससे बचने का साधारण तरीका है कि खानपान को दुरुस्त रखें। अपने हिसाब से दर्द निवारक दवाओं का सेवन नहीं करें। क्योंकि इन दवाओं के ज्यादा सेवन से आंतों में घाव हो जाता है और आंतों के बैक्टीरिया घाव के जरिए खून में मिल जाते हैं। शराब, धूम्रपान का अधिक सेवन करने वाले मरीजों में यह बीमारी ज्यादा पाई जाती है। इस बीमारी केलक्षण दिखते ही मिर्च-मसाला व तली-भुनी चीजों का सेवन पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए।
विज्ञापन
- डॉ. सुमित रुंगटा, केजीएमयू
मैदा छोड़ें, रेशेदार चीजों से नाता जोड़ें
हमारे खानपान में मैदायुक्त चीजों का प्रयोग अधिक होता है। यह सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक है, जो व्यक्ति जितना अधिक मैदा का सेवन करता है, उसे पेट संबंधी बीमारियां उतनी ही अधिक होती हैं। इसकेअलावा फास्ट फूड और कोल्ड ड्रिंक भी खतरनाक है। आईबीडी से बचने के लिए मौसमी फलों का ज्यादा सेवन करें। मौसम में जो फल व सब्जी आसानी से उपलब्ध हों, उन्हें ही खाना चाहिए। रेशेदार खाद्य सामग्री लेना फायदेमंद रहता है। मोटे अनाज का सेवन करते रहना चाहिए। आईबीडी में बायोलॉजिकल दवाएं दी जाती हैं। ये दवाएं काफी महंगी होती हैं। माहभर के इलाज में करीब 25 हजार का खर्च आता है। जब दवाओं से भी बीमारी नियंत्रित नहीं होती है तो ऑपरेशन करके प्रभावित हिस्से को अलग कर दिया जाता है। लेकिन ऑपरेशन के बाद इसकेदोबारा होने की आशंका बनी रहती है।
- डॉ. अभय वर्मा, एसजीपीजीआई
विज्ञापन
डॉ. रुंगटा ने बताया कि लक्षण दिखते ही तत्काल इलाज शुरू कर दिया जाए तो बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है और मरीज की जान बचाई जा सकती है, लेकिन ज्यादातर मरीज देर से आते हैं। यह दो प्रकार का होता है। इनमें अल्सरेटिव कोलाइटिस और क्रोंस रोग है। इसके होने के कारणों का अभी स्पष्ट रूप से पता नहीं चला है। लेकिन इस बीमारी में आंतों में सूजन हो जाती है।
विज्ञापन
शहरों में ज्यादा हैं इसके रोगी
गांव के मुकाबले शहरी लोगों की जीवनशैली और खानपान गड़बड़ रहता है। यही वजह है कि इस बीमारी की चपेट में शहरी ज्यादा आ रहे हैं। देशभर में करीब 1.45 लाख लोग इस बीमारी की चपेट में हैं। इससे बचने का साधारण तरीका है कि खानपान को दुरुस्त रखें। अपने हिसाब से दर्द निवारक दवाओं का सेवन नहीं करें। क्योंकि इन दवाओं के ज्यादा सेवन से आंतों में घाव हो जाता है और आंतों के बैक्टीरिया घाव के जरिए खून में मिल जाते हैं। शराब, धूम्रपान का अधिक सेवन करने वाले मरीजों में यह बीमारी ज्यादा पाई जाती है। इस बीमारी केलक्षण दिखते ही मिर्च-मसाला व तली-भुनी चीजों का सेवन पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए।
विज्ञापन
- डॉ. सुमित रुंगटा, केजीएमयू
मैदा छोड़ें, रेशेदार चीजों से नाता जोड़ें
हमारे खानपान में मैदायुक्त चीजों का प्रयोग अधिक होता है। यह सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक है, जो व्यक्ति जितना अधिक मैदा का सेवन करता है, उसे पेट संबंधी बीमारियां उतनी ही अधिक होती हैं। इसकेअलावा फास्ट फूड और कोल्ड ड्रिंक भी खतरनाक है। आईबीडी से बचने के लिए मौसमी फलों का ज्यादा सेवन करें। मौसम में जो फल व सब्जी आसानी से उपलब्ध हों, उन्हें ही खाना चाहिए। रेशेदार खाद्य सामग्री लेना फायदेमंद रहता है। मोटे अनाज का सेवन करते रहना चाहिए। आईबीडी में बायोलॉजिकल दवाएं दी जाती हैं। ये दवाएं काफी महंगी होती हैं। माहभर के इलाज में करीब 25 हजार का खर्च आता है। जब दवाओं से भी बीमारी नियंत्रित नहीं होती है तो ऑपरेशन करके प्रभावित हिस्से को अलग कर दिया जाता है। लेकिन ऑपरेशन के बाद इसकेदोबारा होने की आशंका बनी रहती है।
- डॉ. अभय वर्मा, एसजीपीजीआई