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ध्यान देंः बच्चों को हमेशा के लिए अपंग बना सकता है फास्टफूड
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 11 Oct 2017 01:45 PM IST
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फास्टफूड का अधिक सेवन बच्चों को हमेशा के लिए अपंग बना सकता है। फास्टफूड, शरीर में होने वाली विटामिन व प्रोटीन की कमी से बच्चों में सेप्टिक अर्थराइटिस होने की संभावना को बढ़ा रहा है। यह समस्या 15 साल से कम उम्र के बच्चों में सबसे अधिक हो रही है।
यह जानकारी केजीएमयू के हड्डी रोग विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. विनीत शर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि बच्चों में फास्ट फूड का चलन तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में पौष्टिक तत्वों की कमी से उनके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता तेजी से घट जाती है।
जिससे शरीर का रेजिस्टेंस कम होने से उनके शरीर में इंफेक्शन होने लगता है। यह इंफेक्शन जब जोड़ों में पहुंचता है तो इनमें पस पड़ जाता है। पस पड़ने के बाद पहले तो जोड़ाें का मूवमेंट कम होने लगता है। उसके बाद ज्वाइंट्स फ्यूज हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि शुरूआती दौर में यह आसानी से पता नहीं चल पाता।
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यह जानकारी केजीएमयू के हड्डी रोग विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. विनीत शर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि बच्चों में फास्ट फूड का चलन तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में पौष्टिक तत्वों की कमी से उनके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता तेजी से घट जाती है।
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जिससे शरीर का रेजिस्टेंस कम होने से उनके शरीर में इंफेक्शन होने लगता है। यह इंफेक्शन जब जोड़ों में पहुंचता है तो इनमें पस पड़ जाता है। पस पड़ने के बाद पहले तो जोड़ाें का मूवमेंट कम होने लगता है। उसके बाद ज्वाइंट्स फ्यूज हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि शुरूआती दौर में यह आसानी से पता नहीं चल पाता।
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केजीएमयू में रोज आ रहे छह से अधिक मामले
डेमो
कुछ समय बाद बच्चे को जोड़ों में दर्द, उठने-बैठने में दिक्कत होने लगती है। मां-बाप इसे कमजोरी समझ कर नजरअंदाज कर देते हैं या प्रोटीन युक्त चीजें देने लगते हैं। लेकिन उस समय तक बच्चे में सेप्टिक अर्थराइटिस की समस्या हो चुकी होती है। अगर इसे काफी समय तक नजरअंदाज किया गया तो आगे बच्चा उम्र भर के लिए अपंग भी हो सकता है।
डॉ. विनीत शर्मा ने बताया कि जहां पहले अस्पताल की ओपीडी में 60 साल की उम्र के बाद के मरीज ऑस्टियो अर्थराइटिस की समस्या से आते थे। वहीं बीते कुछ सालों में 40 से 45 की उम्र में मरीजों में रुमेटोअर्थराइटिस की समस्या सामने आ रही थी।
वहीं अब ओपीडी में सेप्टिक अर्थराइटिस की समस्या से बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी है। उन्होंने बताया कि अब एक दिन में सेप्टिक अर्थराइटिस से पीड़ित छह से सात बच्चे हर रोज ओपीडी में आ रहे हैं।
डॉ. विनीत ने बताया कि वायरल व बैक्टीरियल इंफेक्शन से बच्चों में सेप्टिक अर्थराइटिस फैलने का प्रमुख कारण हैं।
डॉ. विनीत शर्मा ने बताया कि जहां पहले अस्पताल की ओपीडी में 60 साल की उम्र के बाद के मरीज ऑस्टियो अर्थराइटिस की समस्या से आते थे। वहीं बीते कुछ सालों में 40 से 45 की उम्र में मरीजों में रुमेटोअर्थराइटिस की समस्या सामने आ रही थी।
वहीं अब ओपीडी में सेप्टिक अर्थराइटिस की समस्या से बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी है। उन्होंने बताया कि अब एक दिन में सेप्टिक अर्थराइटिस से पीड़ित छह से सात बच्चे हर रोज ओपीडी में आ रहे हैं।
डॉ. विनीत ने बताया कि वायरल व बैक्टीरियल इंफेक्शन से बच्चों में सेप्टिक अर्थराइटिस फैलने का प्रमुख कारण हैं।
बच्चों को दें पौष्टिक आहार
डेमो
जिन बच्चों को निमोनिया, डायबिटीज, टीबी जैसी बीमारियां होती हैं, उनके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। ऐसे में उन्हें कई तरह के वायरल व बैक्टीरियल इंफेक्शन हो जाते हैं। जो अधिकतर आगे जाकर सेप्टिक अर्थराइटिस का रूप ले लेते हैं। वहीं जो बच्चे कैंसर पीड़ित हैं उन्हें दवाओं के कारण भी यह समस्या हो जाती है।
बच्चों को ऐसे रखें अर्थराइटिस से दूर
- बच्चों को फास्टफूड के सेवन से दूर रखें
- पौष्टिक आहार दें ताकि बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे और इंफेक्शन से दूर रहें
- बच्चें में जोड़ों के दर्द को नजरअंदाज न करें, तुरंत डॉक्टरी सलाह लें
- अगर बच्चे को निमोनिया या कोई वायरल रोग हो तो बाद में हड्डियों की जांच जरूर कराएं
- बच्चे को कुपोषण से बचाएं
- बच्चों की स्वस्थ जीवनशैली की आदत डालें
बच्चों को ऐसे रखें अर्थराइटिस से दूर
- बच्चों को फास्टफूड के सेवन से दूर रखें
- पौष्टिक आहार दें ताकि बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे और इंफेक्शन से दूर रहें
- बच्चें में जोड़ों के दर्द को नजरअंदाज न करें, तुरंत डॉक्टरी सलाह लें
- अगर बच्चे को निमोनिया या कोई वायरल रोग हो तो बाद में हड्डियों की जांच जरूर कराएं
- बच्चे को कुपोषण से बचाएं
- बच्चों की स्वस्थ जीवनशैली की आदत डालें