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इंडो-नेपाल सीमा: नोमेंस लैंड पर बने मकान और लहलहाती फसल सुरक्षा में सेंध न लगा दें!

Fri, 29 Dec 2017 03:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ/बहराइच
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ/बहराइच Updated Fri, 29 Dec 2017 03:49 PM IST
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farming on no mens land
नो मेंस लैंड पर बसी आबादी। - फोटो : amar ujala
बहराइच जिले से सटी नेपाल की खुली सीमा अराजक तत्वों को अरसे से रास आ रही है। कभी आतंकी मशरूर तो कभी जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के आतंकी सीमा की सुरक्षा में सेंध लगाते रहे हैं। तीन वर्ष पूर्व इंडियन मुजाहिदीन के फरार आतंकी अफजल ने भी छिपने के लिए नेपाल की खुली सीमा का सहारा लिया था।
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उसे मुंबई एटीएस के अधिकारियों की टीम ने रुपईडीहा थाना क्षेत्र के नेपालगंज रोड रेलवे स्टेशन के निकट नोमेंसलैंड के पास से ही दबोचा था। इसके पूर्व भी देश विरोधी तत्व घुसपैठ करते रहे हैं। हालांकि भारत-नेपाल के मुख्य रास्तों पर कड़ी चौकसी के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन मोतीपुर, मुर्तिहा, रुपईडीहा और नवाबगंज थाना क्षेत्रों में ग्रामीण अंचलों में नोमेंस लैंड से बने रास्तों पर अक्सर सन्नाटा पसरा रहता है।
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खास बात यह है कि मोतीपुर से रुपईडीहा थाना क्षेत्र के मध्य 19 स्थानों पर नोमेंस लैंड पर नेपाल क्षेत्र के लोगों ने अतिक्रमण कर मकान और अहाते बना रखे हैं। तिलहन, गेहूं, आलू और गन्ने की फसल लहलहा रही है। लेकिन नोमेंस लैंड का परिक्षेत्र प्रतिबंधित होता है।
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इसके चलते यहां पर न तो भारतीय पुलिस और न ही नेपाली पुलिस कार्रवाई करती है। जिस कारण नोमेंस लैंड पर कब्जा कर बनाए गए मकानों और अहातों में दहशतगर्द आसानी से शरण लेकर सुरक्षा तंत्र के लिए चुनौती बनते हैं।

ये है नोमेंस लैंड

farming on no mens land
नो मेंस लैंड पर लगी फसल। - फोटो : amar ujala
दो देशों की सीमा की पहचान के लिए दोनों देशों की ओर से 10-10 मीटर जमीन छोड़ी जाती है। इस जमीन में दोनों देशों के पिलर (सीमा पहचान स्तंभ) लगाए जाते हैं। दोनों देशों की जिम्मेदारी होती है कि नोमेंस लैंड पर न अतिक्रमण हो और न ही किसी भी प्रकार की गतिविधियां हों। गौरतलब हो कि भारत-नेपाल की सीमा 1751 किलोमीटर लंबी है। बहराइच जिले में यह सीमा 100 किलोमीटर के दायरे में है।

यहां हैं अधिक कब्जे
रुपईडीहा थाना अंतर्गत पिलर संख्या 30-33 के मध्य घूर, खलिहान और खेत लहलहा रहे हैं। जबकि पिलर संख्या 38-45 के मध्य कई स्थानों पर नेपाल के कुछ नागरिकों ने नोमेंस लैंड पर कब्जा कर खेती शुरू कर दी है। मुर्तिहा कोतवाली में ग्राम पटाव के निकट नेपालियों के अहाते और मकान निर्मित हैं। घुमनाभारू, लौकाही और बलई गांव के निकट आठ स्थानों पर मकान निर्मित हैं। खेत लहलहा रहे हैं।
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