फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   farmers are talking with the central government about agricultural laws

सुधारों की दिशा सही, पर सूझ-बूझ भी दिखानी होगी, किसानों से हो खुले मन से बात: आलोक रंजन

Fri, 04 Dec 2020 02:56 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Fri, 04 Dec 2020 02:56 PM IST
विज्ञापन
farmers are talking with the central government about agricultural laws
पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन - फोटो : अमर उजाला
भारत सरकार ने कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए तीन नए कानून बनाए हैं। इस समय किसान इन कानूनों के खिलाफ आंदोलन करते हुए दिल्ली पहुंच गए हैं और केंद्र सरकार से उनकी वार्ता चल रही है। सरकार का मानना है कि इन कानूनों से कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व सुधार आएगा।
विज्ञापन


लेकिन आंदोलित किसान, जो मुख्य रूप से पंजाब व हरियाणा के हैं, ऐसा नहीं समझते। उन्हें ये कानून अपने खिलाफ लगते हैं। कृषि क्षेत्र में सरकार की सुधारों की दिशा सही है इन्हें बहुत सूझ-बूझ से लागू करना होगा। किसान और व्यापारी में विवाद सुलझाने के लिए भी निष्पक्ष विवाद निस्तारण की व्यवस्था आवश्यक होगी। सबसे पहले तो किसानों से खुले मन से वार्ता आवश्यक है।
विज्ञापन


सोच अधिक लाभ पहुंचाने की
यहां यह समझना जरूरी है कि ये कानून क्यों लाए गए और इनसे कृषि क्षेत्र में क्या बदलाव आएगा। पहले कानून में किसानों के लिए अपनी उपज को मंडी में बेचने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई और अब किसान अपना उत्पादन कहीं भी बेच सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


सरकार का मत है कि इससे व्यापारियों या बिचौलियों के शोषण से किसानों को मुक्ति मिलेगी। कहीं भी उत्पाद बेचकर वे अधिक लाभ कमा सकेंगे। दूसरे कानून में कान्ट्रैक्ट फार्मिंग को मान्यता दी गई है, ताकि किसान व कृषि आधारित उद्योेगों में तालमेल बन सके।

फल-सब्जियों की बर्बादी न हो, जो अभी 40 प्रतिशत पर है। तीसरा संशोधन आवश्यक वस्तु अधिनियम में है जिसमें अति विशिष्ट परिस्थितियों को छोड़कर कृषि उत्पादों के अधिकतम भंडारण सीमा के प्रावधान को हटा दिया गया है। इसके पीछे सोच ये है कि किसान भंडारण करने के साथ-साथ बाजार मूल्य को नियंत्रित कर सकेंगे।
 

मंडियों को बचाए रखना जरूरी 

दूसरी तरफ आंदोलित किसानों का मानना है कि इन कानूनों से उनको दिए जाने वाले न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। उनका कहना है कि मंडी व्यवस्था से किसानों को फायदा था। अब से समाप्त हो जाएंगी।

कुछ विश्लेषक तो यह भी कहते हैं कि इससे किसानों का व्यापारीकरण हो जाएगा और अन्तत: किसान अपने ही खेत में कृषि मजदूर बन कर रह जाएगा। उत्पादन गतिविधियां निजी कंपनियां तय करेंगी।

इस मामले में केंद्र द्वारा आश्वासन लिखित रूप से दिया जा सकता है कि एमएसपी की व्यवस्था खत्म नहीं होगी। यह सही है कि किसान व व्यापारी के बीच सौदा मंडी के बाहर हो जाने से मंडी शुल्क से होने वाली मंडी की आय में गिरावट आएगी।

उसके रख-रखाव पर असर पडे़गा। लिहाजा मंडियों को सुदृढ़ बनाए रखना आवश्यक है। इसके लिए मंडी की आय में गिरावट आने पर उतनी राशि बजट के जरिये उपलब्ध कराई जा सकती है  मंडियों का कम्प्यूटरीकरण और ई-नैम (ई-नेटवर्क) प्रणाली से जोड़ा जाना आवश्यक है। यदि मंडियों का विकल्प उपलब्ध रहेगा तो किसानों का शोषण नहीं होगा। 

एफपीओ की भूमिका महत्वपूर्ण

महत्वपूर्ण बात यह है कि अधिकतर किसान लघु एवं सीमांत श्रेणी में आते हैं। उनमें इतनी व्यापारिक या तकनीकी क्षमता नहीं है कि निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों से बराबर का अनुबंध कर सकें या अनुबंध की शर्तों का पालन करा सकें। अत: फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (एफपीओ) को व्यापक पैमाने पर बनाया जाना आवश्यक है।

इससे छोटे किसान संगठित हो जाएंगे और उनका शोषण नहीं होगा। किसानों को उपज का अधिक मूल्य तभी मिलेगा जब वे भंडारण कर सकें। ऐसे में सरकार को भंडारण क्षमता बढ़ानी होगी। यह व्यवस्था भी करनी होगी कि वेयर हाउस रसीद पर किसानों को बैंक से फसल मूल्य की 75 प्रतिशत राशि मिल सके। 

आर्थिक सुधार से अछूता रह गया था कृषि क्षेत्र 
1991 में जब औद्योगिक और अंतरराष्ट्रीय व्यापार क्षेत्र में आर्थिक सुधार किए गए थे, उससे भारत की अर्थव्यवस्था सुधरी थी और सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि हुई थी। परंतु इन सुधारों से कृषि क्षेत्र अछूता रह गया था। अब जो कृषि अधिनियम पारित हुए हैं उनका उद्देश्य भी वही है जो 1991 के आर्थिक सुधार का था।

इनमें न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था खत्म करने का उल्लेख नहीं है। लेकिन पंजाब व हरियाणा के किसानों की आशंका है कि जब किसान अपने उत्पाद कहीं भी बेचने के लिए स्वतंत्र होगा तो धीरे-धीरे मंडियां निरर्थक हो जाएंगी और एमएसपी की व्यवस्था भी समाप्त हो जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed