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Lucknow News: केजीएमयू में पकड़ा गया फर्जी डॉक्टर, धर्मांतरण रैकेट से जुड़े होने की आशंका

Wed, 22 Apr 2026 02:31 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 22 Apr 2026 02:31 AM IST
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Fake doctor arrested at KGMU, suspected to be involved in conversion racket
आरोपी हस्साम अहमद। 
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) प्रशासन ने मंगलवार को एक फर्जी डॉक्टर को दबोचा। आरोपी हस्साम अहमद 12वीं पास है जिसके धर्मांतरण रैकेट से जुड़े होने की आशंका जताई गई है। हस्साम के संपर्क में एमबीबीएस की कई छात्राएं थीं। वह छात्राओं को एम्स में कथित तौर पर होने वाली एक कॉन्फ्रेंस के नाम पर दिल्ली ले जाने वाला था। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आरोपी से पूछताछ कर रही है।
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केजीएमयू प्रवक्ता प्रो. केके सिंह ने बताया कि पकड़ा गया आरोपी हस्साम अजीज नगर सेमरा गोडी का निवासी है। आरोपी ने कॉर्डियो सेवा संस्थान नामक एक ट्रस्ट बना रखा है। वह केजीएमयू में घूमकर यहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं से खुद को सीनियर बताते हुए रौब झाड़ता रहता था। इसके साथ ही केजीएमयू में इलाज के लिए आने वाले मरीजों से भी वसूली का भी आरोप है। 13 अप्रैल को उसने केजीएमयू की छात्राओं को कथित रूप से एम्स में होने वाली एक कॉन्फ्रेंस के लिए चयनित होने का फर्जी आमंत्रण पत्र जारी किया। यह पत्र केजीएमयू के प्रवक्ता और पैरामेडिकल संकाय के डीन प्रो. केके सिंह के हस्ताक्षर से जारी किया गया था। छात्राओं को दिए गए पत्र में कॉन्फ्रेंस में अमेरिका के प्रसिद्ध डॉक्टर से मुलाकात करवाने की बात भी लिखी थी। इन्हीं छात्राओं को वह 19 अप्रैल को हुसैनाबाद में लगे एक चिकित्सा शिविर में लेकर गया था। छात्राएं उसके प्रभाव में थीं और उसके साथ दिल्ली जाने को तैयार थीं। प्रशासन को जब इसकी जानकारी हुई तो पहले छात्राओं के चयन संबंधी फर्जी आमंत्रण पत्र को कब्जे में लिया गया। इसके बाद 19 अप्रैल को आयोजित चिकित्सा शिविर के बारे में पड़ताल की गई। प्रारंभिक पड़ताल में स्पष्ट हो गया कि वह फर्जी है। मंगलवार को जब वह जनरल सर्जरी विभाग के पास पहुंचा तो छात्र-छात्राओं की मदद से उसे दबोचकर पुलिस के हवाले कर दिया गया। उसने स्वीकार किया कि वह मात्र 12वीं पास है।
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व्हाट्सएप की डीपी में लगाए था प्रो. केके सिंह की तस्वीर

आरोपी हस्साम ने अपने व्हाट्सएप अकाउंट में केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह की फोटो लगा रखी थी। एम्स दिल्ली की कथित कॉन्फ्रेंस में चयनित होने का पत्र भी उसने प्रो. केके सिंह के फर्जी हस्ताक्षर से जारी किया था।
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पुरस्कार और कॅरिअर में मदद के सपने दिखाता था

पूछताछ में आरोपी ने कुबूल किया है कि वह केजीएमयू का डीन बनकर व्हाट्सएप पर छात्रों से संपर्क करता था। प्रोफाइल फोटो में डीन की तस्वीर लगी होने के कारण छात्र-छात्राएं आसानी से झांसे में आ जाते थे। वह छात्रों को कॉर्डियो सेवा फाउंडेशन से जुड़ने का लालच देता था। फाउंडेशन के नाम पर पुरस्कार, सम्मान और कॅरिअर में मदद के झूठे सपने दिखाता था। एक छात्रा आरोपी से पूरी तरह प्रभावित हो चुकी थी। इस छात्रा ने बताया है कि आरोपी ने उसे कई पुरस्कार दिलाने का झांसा दिया था। वह उसे मानसिक रूप से प्रभावित कर रहा था जिससे वह उसके निर्देशों का पालन करने लगी।


चार डॉक्टरों के नाम भी सामने आए

पुलिस से पूछताछ में आरोपी ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसने केजीएमयू के एक ही समुदाय से जुड़े चार डॉक्टरों के नाम भी बताए हैं जिनमें दो डॉक्टर एक ही संकाय के हैं। इन डॉक्टरों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। हालांकि, इन नामों की संलिप्तता को लेकर जांच चल रही है।
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