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UP News: सरकारी अस्पतालों में प्रसव को लेकर बढ़ी रुचि, संस्थागत प्रसव का ग्राफ 83.4 फीसदी पहुंचा
Thu, 06 Oct 2022 10:50 AM IST
ishwar ashish
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 06 Oct 2022 10:50 AM IST
सार
यूपी के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि व्यवस्थाओं को लगातार बेहतर किया जा रहा है। सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। गुणवत्तापूर्ण दवाएं और जांच की सुविधाएं बढ़ाई गई हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : istock
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विस्तार
गर्भवती महिलाएं सेहत को लेकर निरंतर सजग हो रही हैं। 62.5 फीसदी महिलाएं प्रसव से पहले जांच कराने लगी हैं। इसी का नतीजा है कि प्रदेश में संस्थागत प्रसव का ग्राफ 83.4 फीसदी पहुंच गया है। प्रदेश में हर साल करीब 55 लाख प्रसव होते हैं। गर्भावस्था में पैथोलॉजी व रेडियोलॉजी से संबंधित निशुल्क होने वाली जांचों के लिए भी महिलाएं अस्पताल नहीं जाती थीं।
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राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण रिपोर्ट 2015-16 में गर्भावस्था की पहली तिमाही में प्रसव पूर्व 45.9 फीसदी महिलाओं ने जांच कराई, तो 2019-21 में यह आंकड़ा 62.5 प्रतिशत हो गया। इस दौरान लगने वाले टीकों के प्रति भी जागरूकता बढ़ी है।
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मातृ एवं शिशु मृत्युदर में कमी लाने के लिए भी अस्पतालों में प्रसव कराने पर जोर दिया जा रहा है। वर्ष 2015-16 में 67.8 फीसदी का आंकड़ा 2019-21 में 83.4 प्रतिशत तक पहुंच गया। अस्पतालों में भर्ती व भोजन निशुल्क है तो 102 एंबुलेंस से जच्चा-बच्चा को घर तक पहुंचाया जा रहा है।
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लगातार बढ़ा रहे व्यवस्था
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में संसाधन व सुविधाओं में इजाफा किया जा रहा है। मातृ वंदना योजना के तहत पहली बार मां बनने वाली माताओं को तीन किस्तों में 5000 रुपये दिए जा रहे हैं। जननी सुरक्षा योजना का लाभ शहरी व ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को मिल रहा है। गुणवत्तापूर्ण दवाएं व जांच की सुविधाएं भी बढ़ाई गई हैं। इसलिए अस्पतालों में डिलीवरी कराएं।