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लखनऊ में डग्गामार सिंडिकेट का दबदबा: दलाल बोला- रोज 300 लाओ, बेफिक्र होकर गाड़ी चलाओ; पुलिस को हम देख लेंगे
Fri, 30 Oct 2026 10:45 AM IST
Bhupendra Singh
नीरज 'अम्बुज', अमर उजाला, लखनऊ
नीरज 'अम्बुज', अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Bhupendra Singh
Updated Fri, 30 Oct 2026 10:45 AM IST
सार
लखनऊ के पॉलीटेक्निक से कमता चौराहे तक रोजाना करीब 900 डग्गामार वाहनों से प्रतिमाह 1.25 करोड़ रुपये की अवैध वसूली करने वाले एक संगठित सिंडिकेट का अमर उजाला के स्टिंग ऑपरेशन में पर्दाफाश हुआ है। स्टिंग में दलाल ने स्वीकार किया कि फिक्स मासिक व दैनिक शुल्क के बदले ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ अधिकारियों को मैनेज कर अवैध वाहनों का संचालन कराया जाता है।
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लखनऊ में डग्गामार सिंडिकेट का दबदबा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजधानी लखनऊ के पॉलीटेक्निक चौराहे से लेकर कमता चौराहे तक डग्गामारी का खेल खुलेआम जारी है। यहां से गोरखपुर, बस्ती, अयोध्या आदि रूटों पर रोजाना करीब 900 चार पहिया वाहन चल रहे हैं। इनसे हर महीने करीब 1.25 करोड़ रुपये की वसूली होती है। चौराहे पर सक्रिय सिंडिकेट रकम लेकर वाहनों को डग्गेमारी में लगा रहा है।
डग्गामार वाहनों से रोजाना के अलावा हर महीने तय रकम वसूली जाती है। इसके एवज में इन्हें ट्रैफिक व परिवहन विभाग की कार्रवाई से बचाया जाता है। खेल में ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं। अमर उजाला टीम के स्टिंग ऑपरेशन में इसका पर्दाफाश हुआ।
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टीम बूथ के पीछे पहुंची तो कल्लू दादा नहीं मिला पर उसके साथी सूरज से मुलाकात हुई। उसने वाहन डग्गामारी में शामिल करवाने की पूरी प्रक्रिया के बारे में बताया। इसकी रिकॉर्डिंग अमर उजाला के पास मौजूद है।
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डग्गामार वाहनों से रोजाना के अलावा हर महीने तय रकम वसूली जाती है। इसके एवज में इन्हें ट्रैफिक व परिवहन विभाग की कार्रवाई से बचाया जाता है। खेल में ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं। अमर उजाला टीम के स्टिंग ऑपरेशन में इसका पर्दाफाश हुआ।
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कार डग्गामारी में लगवाने की बात की
पॉलीटेक्निक चौराहे पर पहुंची टीम ने एक चालक सलमान से अपनी कार डग्गामारी में लगवाने की बात की। उसने पिंक बूथ के पीछे खड़े सिंडिकेट के गुर्गों की ओर इशारा करते हुए बताया कि मुकेश शुक्ला सरगना है। कल्लू दादा उनके साथ काम करते हैं। सिंडिकेट में शामिल सूरज, रिंकू वाहन चालकों की डग्गामारी में सेटिंग करवाते हैं।
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टीम बूथ के पीछे पहुंची तो कल्लू दादा नहीं मिला पर उसके साथी सूरज से मुलाकात हुई। उसने वाहन डग्गामारी में शामिल करवाने की पूरी प्रक्रिया के बारे में बताया। इसकी रिकॉर्डिंग अमर उजाला के पास मौजूद है।
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पेश है बातचीत के अंश:-
रिपोर्टर: हेलो, भइया। कल्लू दादा आप ही हैं?दलाल : कल्लू दादा एक मैयत में गए हैं। कल मिलेंगे। अपना काम बताओ? (ऐंठते हुए...)
रिपोर्टर : एक आर्टिगा खरीदी है। उसे पॉलीटेक्निक चौराहे पर लगवाना है। कितना खर्च आएगा? कुछ आइडिया दे दो।
दलाल: पॉलीटेक्निक चौराहे से आर्टिगा चलवाने पर प्रतिमाह 2100 रुपये फिक्स देने पड़ते हैं। इसके अलावा रोजाना 300 रुपये चार्ज लगता है। अवध बस अड्डे से यात्रियों को लाने के लिए दो दलाल रखे हैं। उन्हें 50 रुपये प्रति राउंड देने पड़ते हैं।
रिपोर्टर: कुल 350 रुपये प्रतिदिन और दो हजार रुपये महीना। यानी आठ-दस हजार रुपये में काम हो जाएगा। ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग का झंझट तो नहीं रहेगा?
दलाल : (दाढ़ी पर हाथ फेरते हुए...) हम यहां काहे के लिए हैं। ये जो रोजाना 300 रुपये लिए जा रहे हैं उससे ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारियों को मैनेज किया जाता है।
रिपोर्टर : ड्राइवर बता रहे थे कि मुकेश शुक्ला व कल्लू दादा यहां के मुखिया हैं। उनका नंबर दे दो तो गाड़ी लगवाने की पूरी बात पक्की कर लें।
दलाल : देखो, कल्लू दादा कल सुबह आएंगे। आज के प्रभु हम ही हैं। कल सुबह गाड़ी ले आना। इन मामलों में फोन पर बात नहीं होती। अच्छा, रहते कहां हो। गाड़ी नंबर बताओ। किस रूट पर गाड़ी लगवानी है। सीएनजी है या नहीं?
रिपोर्टर: मुंशीपुलिया पर ही रहते हैं। सीएनजी वाली आर्टिगा है। रूट से क्या मतलब है। रूट के हिसाब से चार्ज अलग-अलग हैं क्या?
दलाल: नंबर के हिसाब से गाड़ियां चलती हैं। सुबह गोरखपुर की चार-पांच गाड़ियां निकलने के बाद लखनऊ की गाड़ियों का नंबर आता है। फिर दोपहर से एक लखनऊ, एक गोरखपुर ऐसे गाड़ियां चलती है। अब जाओ, कल सुबह गाड़ी लेकर आओ...।
(रिपोर्टर व टीम लौटने लगती है। तभी पीछे से दलाल आवाज देता है...)
दलाल: ओए। इधर आओ। एक और रास्ता है। न ड्राइवर का झंझट। न पुलिस और परिवहन विभाग का तामझाम। कमाई भी ज्यादा होगी। कहो तो बताएं?
रिपोर्टर: अरे, बिलकुल भइया। बताइए क्या करना होगा?
दलाल: कल सुबह गाड़ी लाकर दे जाओ। हम खुद उसे चलवा लेंगे। रोजाना शाम को 1500 रुपये नकद ले लो। ड्राइवर वगैरह भी हम लोग ही रख लेंगे। बस, मेंटीनेंस का खर्च देखना होगा।
रिपोर्टर: अरे वाह! ये तो और भी अच्छा है। ड्राइवर से रोजाना की किचकिच भी नहीं करनी पड़ेगी और पुलिस-परिवहन के झंझट से भी मुक्ति मिलेगी। कल सुबह आते हैं भइया।
दलाल : देखो, कल्लू दादा कल सुबह आएंगे। आज के प्रभु हम ही हैं। कल सुबह गाड़ी ले आना। इन मामलों में फोन पर बात नहीं होती। अच्छा, रहते कहां हो। गाड़ी नंबर बताओ। किस रूट पर गाड़ी लगवानी है। सीएनजी है या नहीं?
रिपोर्टर: मुंशीपुलिया पर ही रहते हैं। सीएनजी वाली आर्टिगा है। रूट से क्या मतलब है। रूट के हिसाब से चार्ज अलग-अलग हैं क्या?
दलाल: नंबर के हिसाब से गाड़ियां चलती हैं। सुबह गोरखपुर की चार-पांच गाड़ियां निकलने के बाद लखनऊ की गाड़ियों का नंबर आता है। फिर दोपहर से एक लखनऊ, एक गोरखपुर ऐसे गाड़ियां चलती है। अब जाओ, कल सुबह गाड़ी लेकर आओ...।
(रिपोर्टर व टीम लौटने लगती है। तभी पीछे से दलाल आवाज देता है...)
दलाल: ओए। इधर आओ। एक और रास्ता है। न ड्राइवर का झंझट। न पुलिस और परिवहन विभाग का तामझाम। कमाई भी ज्यादा होगी। कहो तो बताएं?
रिपोर्टर: अरे, बिलकुल भइया। बताइए क्या करना होगा?
दलाल: कल सुबह गाड़ी लाकर दे जाओ। हम खुद उसे चलवा लेंगे। रोजाना शाम को 1500 रुपये नकद ले लो। ड्राइवर वगैरह भी हम लोग ही रख लेंगे। बस, मेंटीनेंस का खर्च देखना होगा।
रिपोर्टर: अरे वाह! ये तो और भी अच्छा है। ड्राइवर से रोजाना की किचकिच भी नहीं करनी पड़ेगी और पुलिस-परिवहन के झंझट से भी मुक्ति मिलेगी। कल सुबह आते हैं भइया।
रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक विमल राजन ने बताया कि पॉलीटेक्निक चौराहे से लेकर अवध बस अड्डे तक डग्गामार वाहन चलते हैं। हाल ही में इसके विरोध में रोडवेज कर्मचारियों ने प्रदर्शन भी किया था। इन वाहनों के कारण राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है।
आरटीओ प्रवर्तन प्रभात पांडेय ने बताया कि अवध बस अड्डे के बाहर से चलने वाले डग्गामार वाहनों के खिलाफ चेकिंग अभियान लगातार चलाए जाते हैं। एआरटीओ प्रवर्तन आलोक यादव के नेतृत्व में इंटरसेप्टर के साथ कार्रवाई होती है।
एडीसीपी ट्रैफिक राघवेंद्र सिंह ने कहा कि सुबह 9.00 बजे से डग्गामार वाहनों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाती है। पूर्वी जोन की टीम भी इसमें शामिल रहती है। डग्गामारों के सिंडिकेट में शामिल लोगों को अभियान चलाकर पकड़ा जाएगा।
आरटीओ प्रवर्तन प्रभात पांडेय ने बताया कि अवध बस अड्डे के बाहर से चलने वाले डग्गामार वाहनों के खिलाफ चेकिंग अभियान लगातार चलाए जाते हैं। एआरटीओ प्रवर्तन आलोक यादव के नेतृत्व में इंटरसेप्टर के साथ कार्रवाई होती है।
एडीसीपी ट्रैफिक राघवेंद्र सिंह ने कहा कि सुबह 9.00 बजे से डग्गामार वाहनों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाती है। पूर्वी जोन की टीम भी इसमें शामिल रहती है। डग्गामारों के सिंडिकेट में शामिल लोगों को अभियान चलाकर पकड़ा जाएगा।