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गृहमंत्री अमित शाह से खास बातचीत: वोटों की ठेकेदारी खत्म...मतदाता अब अपने मत का असली मालिक

Tue, 22 Feb 2022 09:05 AM IST
Vikas Kumar इंदुशेखर पंचोली, अमर उजाला, नई दिल्ली
इंदुशेखर पंचोली, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 22 Feb 2022 09:05 AM IST
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सार
यूपी में भाजपा के शीर्ष रणनीतिकार केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का कहना है कि योगी आदित्यनाथ सरकार ने गरीबों के कल्याण की योजनाओं को शत-प्रतिशत जमीन पर उतारा है। शाह आश्वस्त हैं कि मतदाता इस कामकाज के आधार पर भाजपा को ही दोबारा मौका देने जा रहा है। इंदुशेखर पंचोली से विशेष बातचीत में अमित शाह ने ऐसे तमाम बिंदुओं पर अपने विचार साझा किए। पेश हैं खास अंश....
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exclusive interview of amit shah contracting of votes is over in up voters now real owners of their votes
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष रणनीतिकार केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का कहना है कि योगी आदित्यनाथ सरकार ने गरीबों के कल्याण की योजनाओं को शत-प्रतिशत जमीन पर उतारा है। प्रदेश जातीय गोलबंदी से ऊपर उठने के साथ ही अपराधियों और माफियाओं से मुक्त हुआ है। शाह आश्वस्त हैं कि मतदाता इस कामकाज के आधार पर भाजपा को ही दोबारा मौका देने जा रहा है। इंदुशेखर पंचोली से विशेष बातचीत में अमित शाह ने ऐसे तमाम बिंदुओं पर अपने विचार साझा किए। पेश हैं  खास अंश....



केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह मानते हैं कि उत्तर प्रदेश में वोटों की ठेकेदारी खत्म हो गई है, मतदाता जातीय गोलबंदी से बाहर अपने मन से मतदान करते हैं। अब खुद मतदाता के अलावा उसके वोट का कोई मालिक नहीं है। लोकसभा के दो और बीते विधानसभा चुनाव ने यह साबित किया है। 2022 का चुनाव फिर इस पर मुहर लगाने जा रहा है। 


शाह का तर्क है, यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों से मुमकिन हुआ है। गरीब की सुनवाई हुई, गरीब सशक्त हुआ। सही मायनों में सरकार सांविधानिक भावना के अनुरूप गरीब-वंचित का सहारा बनी है।

अमित शाह ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि मोदी सरकार के कारण गरीबों को घर, गैस, बिजली, शौचालय, मुफ्त इलाज व राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। संविधान में ऐसी ही सरकार की अपेक्षा रही है। लेकिन, देश पर दशकों से राज करने वाली कुनबापरस्त सरकारों ने क्या किया? अपना, अपने परिवार और अपनी जाति से आगे बढ़े ही नहीं। परिवारवादियों ने विकास और सरकारी सुविधाओं को परिवार की सरहद तक ही सीमित कर दिया। 
 

केमिस्ट्री बिगड़ गई...यह धारणा बनाने की कोशिश हुई, हम 2017 दोहराएंगे

तीन चरणों के बाद नतीजों को लेकर आपका आकलन?
भाजपा की फिर सरकार बनने जा रही है। अकेले दम पर बहुमत मिलेगा। दोनों सहयोगी दलों के उम्मीदवार भी अच्छी जीत हासिल करेंगे। हमारा आधार निश्चित तौर बढ़ा है। चौथा चरण हो जाने पर संख्या भी बताएंगे, कितनी सीटें जीत रहे हैं। 

लेकिन, जमीन पर तो सोशल-इंजीनियरिंग और केमिस्ट्री गड़बड़ाई दिखती है?
बिल्कुल नहीं। ऐसी धारणा बनाने की कोशिश हो रही है। यह इसलिए की हमने मतदाता को उसके वोट का मालिक बना दिया है। केंद्र व राज्य की सरकारों के कारण गरीब का सशक्तिकरण हुआ है। वह अब अपनी जाति के नेता को देखकर या उसके कहने पर वोट नहीं देता। भाजपा ने वोटिंग के पैटर्न को बदल दिया है। पुरानी सोच रखने वालों की केमिस्ट्री बिगड़ी हुई दिखती है। 

जाति तो यूपी की हकीकत है। भाजपा भी टिकट जाति के आधार पर ही बांटती है?
जाति के आधार पर टिकट किसी वर्ग को प्रतिनिधित्व देने और मजबूत करने के लिए दिया जाता है। बताइए, कौन सा वर्ग हमने छोड़ा है? सभी को भागीदारी देना बड़ा काम है। 

फिर, पिछले चुनाव में भाजपा से जुड़े पिछड़े वर्ग के नेता क्यों छोड़ गए?
कह रहा हूं, बड़े मुगालते में जी रहे हैं ऐसे नेता। अब उनके पीछे वोट नहीं है। गरीबों के लिए हमारी सरकार की उपलब्धियों के सामने कांग्रेस या किसी और सरकार की तुलना नहीं हो सकती।

किसान आंदोलन का कोई असर नहीं

मतदान में किसान आंदोलन का कितना असर मानते हैं? चौथे चरण में लखीमपुर खीरी भी है।
कृषि कानून वापसी के बाद तो मुद्दा ही खत्म हो गया। लखीमपुर में मैंने दो सभाएं की हैं। जितनी भीड़ आई थी, उससे कोई भी अंदाजा लगा सकता है कि वहां कोई मुद्दा नहीं बचा। यह सरकार की कानून के अनुसार कार्रवाई का नतीजा है।

फसलें रौंदने वाले आवारा पशुओं तक से किसानों को मुक्ति नहीं दिला पाए?
ऐसा नहीं है। सरकार ने पूरी संवेदनशीलता से कोशिश की, योजना बनाई। उसे लागू करने में देरी हुई, लेकिन दोबारा सरकार बनते ही सबसे पहले इस मुद्दे को हाथ में लेंगे। किसानों को राहत देने के लिए समस्या का पूरी तरह उन्मूलन करेंगे। 

पहले नेता तो तय कर लें

भाजपा-विरोधी गठबंधन कवायद फिर शुरू हुई है। शिवसेना भी उसमें शामिल है?
कोशिश करने दीजिए, लोकतंत्र में सबको हक है। लेकिन, पहले यह तय करा दीजिए कि नेतृत्व कौन करेगा? ममता दीदी करेंगी या शरद पवार करेंगे? के चंद्रशेखर राव खुद ही करना चाहते हैं या स्टालिन आगे आएंगे? नेतृत्व तय होने पर आगे चर्चा करेंगे। 

युवाओं में रोजगार को लेकर नाराजगी है। गोंडा में तो रक्षामंत्री की सभा में नारे भी लगे।
सरकार रोजगार को लेकर पूरी तरह गंभीर रही है। मुश्किल यह है कि सरकारी नौकरी को ही रोजगार मान लिया जाता है। हमने यूपी को 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट' योजना से जोड़ा। आज सभी 80 जनपदों को बाजार मिला है। इससे डेढ़ करोड़ लोगों को रोजगार मिल रहा है। बेरोजगारी की दर पांच साल में 17.1 से 4.1 फीसदी पर लाए हैं। 

प्रियंका गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस यूपी चुनाव में दम दिखा रही है। कैसी चुनौती मानते हैं?
अच्छी बात है, सभी को आना चाहिए। पर, चुनौती के तौर पर उन्हें मीडिया ही देखता है। अभी पीछे एक राज्य में चुनाव में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाई थी, इसे ध्यान में रखना चाहिए। 

10 शहरों में मेट्रो आ रही, सबसे अधिक स्मार्ट सिटी यूपी में बन रही

फिर सत्ता विरोधी रुझान क्यों नजर आता है?
कहीं की भी एक ऐसी सरकार बताइए, चुनाव में जिसके विरोध में रुझान नहीं होता। यह स्वाभाविक प्रक्रिया है। लेकिन, ऐसी सरकारें भी होती हैं, जो सत्ता-सापेक्ष रुझान पैदा करती हैं। योगी सरकार ऐसी ही है, जिसके पक्ष में रुझान अधिक प्रबल है। यह ऐसे ही नहीं है। सरकार का काम बोल रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर में देखें, तो प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत पांच साल में सात हजार किमी सड़कें बनी हैं। छह हजार किमी. सड़क बन रही हैं। पांच नए इंटरनेशनल एयरपोर्ट और चार एक्सप्रेस-वे बन रहे हैं। 10 शहरों में मेट्रो आ रही है। सबसे अधिक स्मार्ट सिटीज यूपी में बन रही हैं। 

अर्थव्यवस्था: सपा सरकार में प्रदेश की अर्थव्यवस्था सातवें स्थान पर थी। अब देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। 11 लाख करोड़ रुपये से महज पांच साल में 22 लाख करोड़ रुपये पर लाए हैं। अगले पांच साल में देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य है। प्रति व्यक्ति आय में लगभग दोगुनी वृद्धि हुई है। सोशल इंडेक्स में भी 80 फीसदी तक सुधार हुआ है। 

शिक्षा व सेहत: पांच साल में 30 मेडिकल कॉलेज बने हैं। इसी साल 40 हो जाएंगे। हर जिले में मेडिकल कॉलेज का लक्ष्य है। दो एम्स व एक नई मेडिकल यूनिवर्सिटी बनी है। 10 नए विश्वविद्यालयों के साथ 77 नए कॉलेज खुले हैं। 28 इंजीनियरिंग कॉलेज, 26 नए पॉलिटेक्निक, 79 आईटीआई भी खोले गए। बिना भेदभाव छात्रों को 13,618 करोड़ की छात्रवृत्ति दी है इनमें 1.80 करोड़ बेटियां हैं। 

इतना काम है, तो हिंदुत्व की सवारी क्यों करना चाहते हैं? लाभ होता है?
हिंदुत्व से हमेशा लाभ होता है। हमारा आधार है। विपक्ष तुष्टीकरण के लिए दुष्प्रचार करता है। जातिवाद, परिवारवाद व तुष्टीकरण, तीनों ही विकास में बाधक नासूर हैं। 

हिजाब आपके लिए चुनावी मुद्दा नहीं है। फिर मतदान के दौरान बुर्के-हिजाब को लेकर शिकायतें क्यों?
शिकायतें फर्जी मतदान के शक में होती हैं। चुनाव आयोग की तय प्रक्रिया के तहत आपत्ति दर्ज कराई जाती है। इसी दृष्टि से देखना चाहिए।  

वोट के लालच में जो नेता देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करते हैं, क्या उन्हें वोट देना चाहिए?

सपा-कांग्रेस ने आतंकवाद से लड़ाई को कमजोर किया
हम आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस रखते हैं, चाहे वह किसी भी मजहब-जाति का हो। पर कांग्रेस-सपा ने देश में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को कमजोर किया है। अखिलेश यादव ने तो गिरफ्तार आतंकियों को छोड़ने की बात घोषणापत्र में की। वोट के लालच में जो नेता देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करते हैं, क्या उन्हें वोट देना चाहिए? पुलवामा-उरी हमलों के जवाब में हमने सर्जिकल स्ट्राइक की, पाकिस्तान के घर में घुसकर आतंकियों का सफाया किया। विपक्षी दलों से पूछना चाहिए कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है या नहीं? जब मोदी जी ने अनुच्छेद 370 हटवाया, तो सपा, बसपा, कांग्रेस, तीनों ने विरोध किया। खून की नदियां बहने की बात की गई। वे किसे डरा रहे हैं? हम नहीं डरते। खून की नदियां तो छोड़िए, किसी की कंकड़ चलाने की हिम्मत नहीं हुई। 

70 साल में किसी ने गरीबों की चिंताएं दूर क्यों नहीं कीं?
80 करोड़ गरीबों को राशन... 130 करोड़ लोगों को मुफ्त टीके हमारी सरकार ने लगवाए।

काम तो सभी सरकारों में होते हैं?
हमारी सरकार ने मूलभूत सुविधाओं के प्रति गरीबों की चिंताओं को अपने ऊपर लिया है। यह पहले किसी और सरकार ने क्यों नहीं किया? प्रधानमंत्री बनते समय मोदीजी ने गरीबों, पिछड़ों और दलितों की सरकार बनाने की घोषणा की थी। यूपी में योगी सरकार ने भी यही किया। 70 साल में सपा, बसपा, कांग्रेस ने राज किया, कभी गैस सिलेंडर किसी गरीब के घर में नहीं पहुंचा था। साढ़े सात साल के हमारे काम से इन दलों की तुलना नहीं हो सकती। सपा शासन में तो 24 घंटे बिजली भी नहीं आती थी। भाजपा सरकार ने ही 1.67 करोड़ माताओं के घर में गैस सिलेंडर पहुंचाया। 2.61 करोड़ घरों में शौचालय बनवाए। 1.41 करोड़ घरों में मुफ्त में बिजली पहुंचाई। 42 लाख गरीबों के आवास बने। 2.54 करोड़ किसानों के खातों में 6 हजार रुपये सीधे पहुंचाए। 37,600 करोड़ रुपये सीधे यूपी के किसानों के खाते में पहुंचे हैं। 15 करोड़ गरीबों का पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य खर्च सरकार उठाती है।

गरीबों का जीवन स्तर उठाने की कोई कोशिश भाजपा सरकार ने नहीं छोड़ी। यूपी में पिछली सरकार ने क्या किया था? गरीब कल्याण की एक भी योजना जमीन पर नहीं उतरने दी। मोदी सरकार की हर योजना में बाधा पहुंचाई। जो लागू की, उनमें जाति-वर्ग देखकर मनमानी की। योगी सरकार बनने के बाद कल्याणकारी योजनाएं आकार लेने लगीं। पांच साल में यूपी बदल गया।

सवाल तो पहली और दूसरी लहर में कोरोना प्रबंधन पर भी उठे थे।
जो विपक्ष आज सवाल उठा रहा है, वह उस दौर में कहां था? लॉकडाउन हुआ। दुकानें, कारखाने, ऑटो रिक्शा, रेहड़ी-पटरी तक बंद करने पड़े। मोदी जी ने यूपी के 15 करोड़ सहित 80 करोड़ गरीबों को 2 साल तक पांच-पांच किलो अनाज दिया। हमारी सरकार ने 130 करोड़ नागरिकों को मुफ्त टीके लगवाए। इस वजह से तीसरी लहर में लोगों का जीवन बचाया जा सका। 

अखिलेश यादव तो इसे मोदी का टीका बताकर लोगों को इसे लगवाने से रोकते थे। हालांकि, बाद में उन्होंने भी टीका लगवाया। अच्छा हुआ कि यूपी वालों ने उनकी बात नहीं मानी। हम अपराध में कमी लाए.. अखिलेश आए, तो क्या जेल में रहेंगे अतीक, आजम, मुख्तार?

कानून व्यवस्था को आप और विपक्ष दोनों मुद्दा बना रहे हैं। सवाल भाजपा सरकार पर भी कम नहीं उठे?
कानून-व्यवस्था में क्या फर्क आया है, यह आंकड़ों से बताता हूं। योगी सरकार में डकैती और लूट में 70 प्रतिशत कमी आई है, हत्या में 29 प्रतिशत, अपहरण में 33 प्रतिशत और दुष्कर्म में 52 प्रतिशत कमी आई है। अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी आज कहां हैं? क्या ये कभी जेल भेजे जा सकते थे। अगर अखिलेश आए, तब भी क्या वे जेल में रहेंगे? योगी सरकार ने सभी माफियाओं को खत्म कर दिया है। दो हजार करोड़ रुपये की भूमि उनके कब्जे से छुड़वाई गई। इनके बदले में गरीबों के आवास बने।

माया सरकार पर आप कम हमलावर रहते हैं? खास वजह?
मेरे भाषणों को देखिए, दोनों सरकारों में बदहाली का जिक्र होता है। हालांकि, तुलना पिछली सरकार से ही ज्यादा होगी।

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