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Lucknow News: दिग्गजों की टोली भी नहीं खिला सकी कमल, साख पर लगा बट्टा

Sun, 14 May 2023 12:23 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Updated Sun, 14 May 2023 12:23 AM IST
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Even the group of veterans could not feed the lotus
रायबरेली। एक नगर पालिका और नौ नगर पंचायतों के आने वाले चुनाव परिणाम चौंकाने वाले हैं। खासकर नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद के रिजल्ट ने दिग्गजों के साख पर बट्टा लगा दिया है। स्थानीय दिग्गजों के साथ मंत्रियों की पूरी टोली ने चुनाव की कमान संभाली, लेकिन इसके बावजूद कमल नहीं खिल सका। भाजपा के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह और विधायक अदिति सिंह के साथ पूर्व मंत्री एवं ऊंचाहार विधायक डॉ. मनोज कुमार पांडेय भी कोई कमाल नहीं दिखा पाए। यह चुनाव कांग्रेस के लिए सोने पर सुहागा साबित हुआ, क्योंकि उसने शहर के साथ ही नगर पंचायत लालगंज की सीट अपनी झोली में डाली।
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नगर पालिका पद की अध्यक्ष पद की प्रत्याशी शालिनी कनौजिया को चुनाव जिताने के लिए दिग्गजों की पूरी टीम चुनाव मैदान में दिखी थी। जिले की प्रभारी मंत्री प्रतिभा शुक्ला के साथ ही राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह, सदर विधायक अदिति सिंह, जिले के लोकसभा प्रभारी एवं राज्यमंत्री वीरेंद्र तिवारी ने भाजपा प्रत्याशी को चुनाव जीतने के लिए जनसंपर्क किया, लेकिन जनता ने इन दिग्गजों के इस प्रयास को नकार दिया। ऐसे में शालिनी की हार ने इन दिग्गजों की सियासी भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में दोबारा पार्टी को मंथन करना होगा कि शालिनी की हार की मुख्य वजह क्या रही। नगर पालिका परिषद रायबरेली के अध्यक्ष पद के सपा प्रत्याशी पारसनाथ को चुनाव जिताने के लिए ऊंचाहार विधानसभा सीट से सपा विधायक एवं पूर्व मंत्री ने पूरा दमखम दिखाया था, लेकिन इस सीट पर साइकिल नहीं दौड़ सकी। यहां तक ऊंचाहार नगर पंचायत के अध्यक्ष पद की सीट भी चली गई।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम बृजेश कुमार पाठक, केशव प्रसाद मौर्य के अलावा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का निकाय चुनाव में जनसभाएं और सम्मेलन करना पार्टी के लिए मुफीद साबित हुआ। एक नगर पालिका और नौ नगर पंचायतों में से अध्यक्ष पदों पर भाजपा ने पांच नगर पंचायत सीटों पर जीत हासिल की।
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रायबरेली नगर पालिका जीतने के लिए भाजपा और सपा ने सबसे ज्यादा जोर आजमाइश की, लेकिन पार्टी की कलह ने बंटाधार कर दिया। बात भाजपा की जाए तो इस पार्टी में दावेदार के चयन को लेकर पार्टी के नेता दो खेमे में बंंटे नजर आए। ये दीगर बात रही कि विरोध की यह आवाज बाहर तक नहीं आ सकी और अंदर ही अंदर नेताओं में यह कसक रही। एक गुट बुद्वीलाल पासी, जबकि दूसरा गुट शालिनी कनौजिया को टिकट दिलाने को लेकर उतावला रहा। बाद में हाईकमान ने शालिनी कनौजिया का टिकट फाइनल कर दिया गया। राजनीतिज्ञों की मानें तो शहर की सीट पर कमल न खिलना इसकी मुख्य वजह रही। राजनीतिज्ञ बताते हैं कि गुटबाजी न होती तो निश्चित इस बार भाजपा जीत हासिल करती। सपा में टिकट को लेकर खींचतान रही। यही वजह रही कि पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मो. इलियास सपा छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया।

निवर्तमान कार्यकाल में शहर की जनता की कसौटी पर खरा न उतरना भी भाजपा प्रत्याशी के चुनाव जीतने में बाधा बन गया। वर्ष 2017 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी पूर्णिमा श्रीवास्तव को जनता ने सिर आंखों पर बैठाया था। पूर्णिमा ने कांग्रेस में रहकर चुनाव जीता, लेकिन पांच साल का कार्यकाल उन्होंने भाजपा पार्टी ज्वाइन करके काटा। जनता ने शहर में जो विकास के सपने पाल रखे थे, वह पूरे नहीं हो सके। ऐसे में जनता नाराज और हताश थी। इसका खामियाजा शालिनी को भुगतना पड़ा।
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