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वाराणसी फ्लाईओवर हादसा: रोज कुछ इंच खिसक रही थी मौत, सोते रहे इंजीनियर

Tue, 29 May 2018 12:30 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 29 May 2018 12:30 PM IST
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enquiry report of varanasi flyover accident
varanasi flyover collapse

वाराणसी के फ्लाईओवर हादसे की बुनियाद न तो सिर्फ एक दिन में रखी गई थी और न ही कोई एकाएक बाहरी दबाव (एक्सटर्नल फोर्स) इसकी वजह था। यह बीम तीन महीने आहिस्ता-आहिस्ता बेयरिंग से खिसकती रही।

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नतीजतन, 15 मई की शाम पियर कैप (पिलर) से ऐसे नीचे गिरी कि देखते ही देखते 18 लोगों की मौत हो गईं। अगर साइट पर इंजीनियर नियमित मॉनीटरिंग करते तो कई घरों के चिराग बुझने से बच जाते।
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उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा गठित तकनीकी कमेटी में शामिल पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता वाईके गुप्ता और सुनील कुमार गुप्ता ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है। यह रिपोर्ट अभी शासन को सौंपी नहीं गई है, पर इसके निष्कर्षों से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
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इस रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी में लोहे के बेयरिंग पर गर्डर रखे गए थे। इस स्ट्रक्चर को बांधने या सामान्य भाषा में कहें तो मजबूती देने के लिए क्रॉस बीम हादसे के दिन तक नहीं डाले गए थे।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बेयरिंग पर सीधे गर्डर कास्ट नहीं किए जाने चाहिए, बल्कि उसी साइज के लकड़ी के स्लीपर (अस्थायी बेयरिंग) पर गर्डर का निर्माण किया जाना चाहिए था। क्रॉस बीम भी साथ ही साथ डाले जाने चाहिए थे, ताकि स्ट्रक्चर बंधा रहता।

अगर लकड़ी के गर्डर पर स्लीपर कास्ट किए गए होते तो बाहरी दबाव उन्हें खिसका नहीं सकता था। सार रूप में कहें तो मानकों के अनुसार ग्रिड ऑफ बीम्स तैयार नहीं किया गया, जिससे धीरे-धीरे बीम बाहर की ओर खिसकते गए।

गुप्ता कमेटी का अनुमान है कि हर दिन यह गर्डर औसतन 1-2 मिलीमीटर खिसका। इस तरह से तीन महीने में करीब 18 सेंटीमीटर अपने मूल स्थान शिफ्ट हुआ और फिर एकाएक नीचे आ गया। हालांकि, कमेटी ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता यानी मजबूती को लेकर किसी तरह का कोई संदेह व्यक्त नहीं किया है।


कमेटी का मानना है कि गर्डर आंधी-तूफान और ट्रैफिक संचालन समेत विभिन्न कारणों से पैदा हुए कंपन के कारण खिसके। कुल मिलाकर पूरी रिपोर्ट निर्माण कार्य करा रहे इंजीनियरों और मॉनीटरिंग करने वालों की घोर लापरवाही की ओर इशारा कर रही है।

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