लखनऊ। जानकीपुरम थाने में चकबंदीकर्ता नरेंद्र कुमार ने चार लोगों के खिलाफ सरकारी जमीन पर कब्जा कर उसे बेचने की एफआईआर दर्ज कराई है। आरोप है कि ग्राम रसूलपुर कायस्थ में वीएन पांडेय के कूटरचित पत्रावलियों से वर्ष 1988 व 1989 में फर्जीवाड़ा कर 120 बीघा से अधिक जमीन पर कब्जा कर लिया गया। कार्यालय चकबंदी अधिकारी के आदेश पर मामले की जांच के बाद केस दर्ज कराया गया है।
प्रारंभिक छानबीन में चकबंदी विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। पुलिस घोटाले के समय तैनात रहे कर्मचारियों की सूची तैयार कर रही है। जमीन की कीमत दो हजार करोड़ से अधिक बताई जा रही है। अब तक की छानबीन में करीब 10 अफसरों व कर्मियों के नाम सामने आए हैं। तहरीर के आधार पर पुलिस ने एक भूमाफिया के करीबी रामेंद्र कुमार, लईक खां, अमित और सुनील कुमार के खिलाफ केस दर्ज किया है। चकबंदी विभाग का कहना है कि आरोपियों ने बीकेटी, देवा रोड, इंदिरानगर और जानकीपुरम इलाके में चारागाह में दर्ज 120 बीघा जमीन पर कब्जा कर उसका बड़ा हिस्सा बेच दिया। सालों से फर्जीवाड़ा चल रहा था और अफसर आंखे मूंदे रहे। हाईकोर्ट में मामले की शिकायत हुई तो वर्ष 2021 में प्रशासन ने जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम गठित की। कुछ दिन पहले जांच रिपोर्ट चकबंदी आयुक्त को सौंपी गई, जिसके बाद फर्जीवाड़ा उजागर हुआ।