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यूपी: पहली बार चुनाव के केंद्र में रहे कर्मचारी, पुरानी पेंशन बहाली के लिए सपा के पक्ष में किया मतदान

Tue, 08 Mar 2022 11:51 AM IST
ishwar ashish महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 08 Mar 2022 11:51 AM IST
सार

यूपी चुनाव में कर्मचारियों के एक वर्ग ने खुलकर पुरानी पेंशन बहाली के लिए सपा के पक्ष में मतदान किया। नतीजे से पहले कई आशंकाओं में कर्मचारी, अब चाहते हैं जो भी सरकार आए मुद्दा सुलझाए।

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Employees voted in favour of samajwadi party in UP Election 2022.
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : i stock

विस्तार

यूपी विधानसभा चुनाव संपन्न हो गए। 10 मार्च को नतीजे आ जाएंगे। पर, कर्मचारी बेचैन हैं। उन्हें आशंका है कि जिस तरह उनके बड़े समूह ने सत्ताधारी दल के  खिलाफ मोर्चा खोला है, अगर सपा न जीती और भाजपा फिर सत्ता में आई तो क्या होगा? क्या वह मुखर विरोध करने वालों के खिलाफ विरोधी वाला रवैया अपनाएगी? या कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों के समाधान का कोई रास्ता निकालेगी। कर्मचारियों का कहना है कि जो भी सरकार सत्ता में आए, उसे कर्मचारियों के मुद्दों का प्रमुखता से समाधान करना चाहिए।

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प्रदेश में करीब 21 लाख कर्मचारी हैं। इनमें करीब 16 लाख नियमित हैं और करीब 5 लाख आउटसोर्सिंग पर नियुक्त हैं। पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा लंबे समय से कर्मचारियों के एजेंडे में रहा है। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भी कर्मचारियों ने इसे बड़े स्तर पर उठाया था। पर, तत्कालीन मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय ने केंद्र की तरह नई पेंशन में सरकार का अंशदान बढ़ाकर 10 से 14 प्रतिशत करवा दिया था।
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नई पेंशन में सरकार के हिस्से का करीब 10 हजार करोड़ रुपये जो पिछली सरकारों ने जमा नहीं कराया था, उसे सरकारी खजाने से जमा करवा दिया। साथ ही कर्मचारियों की नई पेंशन से जुड़ी आशंकाओं व अन्य मुद्दों पर विचार कर तार्किक समाधान का सुझाव देने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन कर किया था। इसके बाद कर्मचारी शांत हो गए थे। पर, चुनाव बीता, समिति का काम ठंडे बस्ते में चला गया।
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शासन स्तर पर आउटसोर्सिंग भर्तियों के समर्थक व नियमित कर्मचारी विरोधी छवि वाले कई ताकतवर अफसरों ने ताबड़तोड़ कर्मचारी विरोधी कार्यवाही शुरू कर दी। सरकार ने कई कर्मचारी संवर्गों की समस्याओं के समाधान की जगह कर्मचारी नेताओं के खिलाफ बर्खास्तगी जैसी कड़ी कार्रवाई की। सपा ने मौके की नजाकत को समझा और पुरानी पेंशन बहाली का वादा अपने घोषणापत्र में शामिल कर कर्मचारियों को लामबंद करने की कोशिश की।

नतीजा ये हुआ कि, विधानसभा चुनाव आते-आते कर्मचारी पुरानी पेंशन बहाली को लेकर भाजपा सरकार के खिलाफ लामबंद हो गए। मतदान के दौरान मिले फीडबैक के मुताबिक बड़ी संख्या में नई पेंशन वाले व भाजपा विरोधी मानसिकता वाले कर्मचारियों ने सपा के पक्ष में मतदान किया। भाजपा समर्थक काफी कर्मचारी भी भविष्य का हवाला देकर सरकार के विरोध में चले गए। अब चुनाव संपन्न होने के बाद तमाम कर्मचारियों में यह भय सता रहा है कि यदि भाजपा फिर सत्ता में आई तो सरकार का रुख क्या होगा?

इन वजहों से सरकार से नाराज हुए कर्मचारी

- वर्ष 2019 में कार्मिक विभाग ने सरकारी नौकरी को लेकर एक नया प्रस्ताव बनाया। इसमें समूह ‘ख’ व ‘ग’ की सरकारी नौकरी की शुरुआत पांच वर्ष की संविदा सेवा से करने की बात कही गई। कई ऐसी शर्तें जोड़ी गईं जिसने युवाओं में आक्रोश भर दिया। ‘अमर उजाला’ ने इस प्रस्ताव का खुलासा किया तो सरकार ने इस प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया। आक्रोश इतना था कि पीएम मोदी के जन्मदिन पर युवाओं ने थाली मार्च निकाल दिया। बैकफुट पर आई सरकार को लंबे समय से ठप पड़ी शिक्षक भर्ती व अन्य चयन व भर्ती आयोगों की भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाकर आक्रोश ठंडे करने के रास्ते पर आना पड़ा।

- कर्मचारी आउटसोर्सिंग व्यवस्था में शोषण का मुद्दा उठाते रहे। अफसर शासनादेश पर शासनादेश जारी करते रहे। लेकिन भर्ती से लेकर मानदेय भुगतान व रिन्युवल तक में पारदर्शिता का अभाव रहा। इससे बड़ी बात ये कि सरकारी सेवा में आउटसोर्सिंग भर्ती कर्मचारियों की संख्या पांच लाख पहुंचा दी गई। तमाम समस्याओं से जूझ रहे संविदा कर्मचारी और तमाम बेरोजगार युवा भी इससे सरकार के खिलाफ हुए।

- मार्च, 2020 में कोविड महामारी ने दस्तक दे दी। शासन स्तर पर आउटसोर्सिंग भर्तियों के समर्थक कई ताकतवर अफसरों ने इस मौके का फायदा उठाया। उन्होंने कर्मचारी विरोधी कई निर्णय किए। मसलन, सचिवालय भत्ता सहित करीब सात भत्ते समाप्त कर दिए। सचिवालय भत्ता को खत्म कराने के लिए कैबिनेट के समक्ष गलत तथ्य पेश किए गए। इन भत्तों पर बहुत बड़ा खर्च भी नहीं आ रहा था। पर, इनमें कुछ भत्तों का लाभ लाखों कर्मचारी पा रहे थे, जो नाराज हो गए।

- लेखपाल संघ ने वेतन विसंगति, प्रमाणपत्र जारी करने के लिए 5 रुपये भुगतान के लिए जारी आदेश के अनुपालन व पदोन्नति जैसे मुद्दों को लेकर आंदोलन चलाया। फील्ड में काम करने वाले सबसे महत्वपूर्ण संवर्ग के खिलाफ सरकार ने डंडा चलाया और प्रदेश अध्यक्ष, महामंत्री व कोषाध्यक्ष को बर्खास्त तक कर दिया। नेताओं की बहाली के लिए कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। मगर, इन संवर्गों के रुटीन काम की स्थिति ये रही कि पूरे पांच वर्ष में लेखपालों का एक वर्ष भी प्रमोशन नहीं हुआ।

- प्राथमिक विद्यालयों को मॉडल के तौर पर विकसित करने की पहल हुई। काफी भर्ती भी हुई। पर, पांच वर्ष में एक बार भी प्राथमिक से उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पदोन्नति नहीं हो सकी। इससे लाखों शिक्षकों में नाराजगी बढ़ी।

- वर्ष 2018 में राज्य वेतन समिति की संस्तुतियां दी गई थीं। इसमें कर्मचारियों की वेतन व एसीपी विसंगति दूर करने, पदोन्नति जैसी नियमित लाभों से जुड़ी संस्तुतियां थीं। इन संस्तुतियों पर मुख्य सचिव के स्तर पर विचार कर निर्णय लिया जाना था। तीन-तीन मुख्य सचिव लंबा समय बिताकर चले गए, लेकिन मुख्य सचिव समिति में इन संस्तुतियों पर विचार नहीं हुआ।

- अफसरों ने अपनी ओर से बीच चुनाव भी कसर नहीं छोड़ा। पीसीएस संवर्ग में लेटरल एंट्री जैसे संवेदनशील विषय का शिगूफा छोड़ दिया। ‘अमर उजाला’ ने खुलासा किया तो इसे आगे की कार्यवाही से हटाना पड़ा।

कर्मचारी संगठनों की राय

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री अतुल मिश्रा का कहना है कि विधानसभा चुनाव में कर्मचारियों ने अपने मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। जो भी पार्टी सत्ता में आए तो उसे इन मुद्दों को प्राथमिकता से समाधान करना चाहिए।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद (सेवारत) के महामंत्री रामेंद्र कुमार ने कहा कि कर्मचारियों ने सरकार से संवर्गों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। समाधान न हो पाने से चुनाव में यह मुद्दा बना। अब जो भी सत्ता में आए, उसे पुरानी पेंशन बहाली सहित सभी मुद्दों का उचित समाधान करना चाहिए। कर्मचारी विरोधी रवैया किसी के लिए ठीक नहीं है।

ऑल टीचर्स इंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय कुमार बंधु बोले, कर्मचारियों ने चुनाव में पुरानी पेंशन बहाली जैसे अहम मुददे को उठाया। इसका असर ये रहा कि प्रदेश के एक राजनीतिक दल ने इसे अपने घोषणापत्र में स्थान दिया। जबकि, राजस्थान सरकार ने इसे बहाल करने की घोषणा की। झारखंड व छत्तीसगढ़ सरकार ने भी इसे बहाल करने की बात कही है। ऐसे में जो भी सरकार आए, उसे इसका समाधान करना चाहिए।

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