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जब सबसे ज्यादा जरूरत, तभी 'इमरजेंसी' सिस्टम फेल

Mon, 04 Nov 2013 04:41 PM IST
मनीष कुमार सिंह/लखनऊ
मनीष कुमार सिंह/लखनऊ Updated Mon, 04 Nov 2013 04:41 PM IST
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emergency system fail in govt hospitals

दीपावली के मौके पर जब सरकारी अस्पतालों में इमरजेंसी सिस्टम एकदम मुस्तैद होना चाहिए, तभी मरीजों की सुविधा के लिए ये इंतजाम पटरी से उतर गए हैं।

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स्वास्थ्स विभाग ने मरीजों की सुविधा के लिए सरकारी अस्पतालों में बेसिक फोन लगाया था, लेकिन विभाग की सुस्ती ने इस व्यवस्था को ठप कर दिया है।

गोमतीनगर स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में करीब डेढ़ साल पहले मरीजों और अस्पताल के कर्मचारियों की सुविधा के लिए बीएसएनएल के दो सौ फोन सेट और दो सौ सिम उपलब्ध कराए थे।
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यहां सैकड़ों
फोन हो गए ठप
इन सभी फोन सेट को अस्पताल के सभी विभागों में लगाया गया था, लेकिन एक साल गुजरने के बाद ही इनके बैटरी और चार्जर जवाब देने लगे। अब हालात ऐसे हैं कि अस्पतालों में लगे सैकड़ों की संख्या में फोन पूरी तरह से जवाब दे चुके हैं।
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अस्पताल के अधिकारियों की मानें तो इस व्यवस्था को दुरुस्त कराने के लिए भारत संचार निगम लिमिटेड को कई बार लिखा गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

अस्पताल में फोन की व्यवस्था ठप होने से मरीजों और कर्मचारियों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक, अस्पताल की इमरजेंसी, वार्ड, बाल रोग वार्ड, आईसीयू, मेडिकल स्टोर और अन्य जरूरी स्थानों पर फोन को लगाया गया था, लेकिन बैटरी और चार्जर ने पूरी व्यवस्था को ही ठप कर दिया है।

यही हाल सिविल और बलरामपुर अस्पताल का भी है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सिविल अस्पताल के आईसीयू, पैथोलॉजी, एक्स-रे और सिटी स्कैन में लाइन डिस्टर्ब रहने के चलते इंटरकॉम टेलीफोन व्यवस्था ध्वस्त है।

बलरामपुर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. यूएन राय ने बताया कि इस सुविधा की जगह सभी मेडिकल स्टाफ को सीयूजी नंबर जारी कर दिया गया है। अस्पताल में इंटरकॉम सेवा पूरी तरह से कई महीने से बंद पड़ी है।


किसी डॉक्टर के कमरे में फोन नहीं
स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टर के कमरे में फोन लगाने की व्यवस्था की थी। आज स्थिति ऐसी है कि किसी भी डॉक्टर के कमरे में फोन की व्यवस्था नहीं है। जबकि नियमानुसार डॉक्टर के कमरे में लगा फोन आम लोगों की सुविधा के लिए लगाया गया था।

जहां तक बात सीयूजी नंबर की है तो उसे अस्पताल का कोई अधिकारी या डॉक्टर सार्वजनिक नहीं करता है।

दिवाली धमाकों में करीब 500 पहुंचे अस्पताल
दिवाली के मौके पर पटाखों के प्रेम में राजधानी के करीब 500 लोग जख्मी हो गए। सिर्फ 150 घायल सिविल अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं। ऐसे ही आंकड़े लखनऊ के अन्य सरकारी अस्पतालों से भी मिल रहे हैं। सिप्स में भी कई मरीज बुरी हालत में पहुंचे।

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