यूपीः बिजली होगी सस्ती, उठा बड़ा कदम
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प्रदेश में बिजली की दरों में कमी के लिए जद्दोजहद तेज हो गई है। दरों में कमी लाने के लिए पड़ रहे चौतरफा दबाव के बाद पावर कॉर्पोरेशन ने पहली बार चीनी मिलों से खरीदी जाने वाली बिजली की दरों को लेकर आपत्ति उठाई है।
इस मुद्दे पर पावर कॉर्पोरेशन और राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ‘शुगर लॉबी’ के खिलाफ लामबंद हो गए हैं। कैप्टिव एवं रिन्यूएबल ऊर्जा विनियमावली 2014 तथा बगास आधारित बिजलीघरों की हाल में तय की गई दरों के संबंध में विद्युत नियामक आयोग में सार्वजनिक सुनवाई के दौरान दोनों ने बैक डेट यानी 1 अप्रैल 2014 से नई दरें लागू करने का कड़ा विरोध किया।
आयोग ने सभी पक्षों को 15 दिन के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। अगली सुनवाई 27 मार्च होगी। पावर कॉर्पोरेशन ने बगास आधारित बिजलीघरों से मिलने वाली बिजली की तय की गई दरों तथा इसे 1 अप्रैल 2014 से लागू करने के नियामक आयोग के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की है।
शुगर लॉबी के लिए बढ़ा दबाव
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने भी इस मामले में जनहित प्रत्यावेदन दाखिल किया है। आयोग चीनी मिलों से उत्पादित बिजली की दर 5.65 रुपये प्रति यूनिट तय की है जबकि यह पहले 4.96 रुपये प्रति यूनिट थी। ‘शुगर लॉबी’ छह रुपये प्रति यूनिट से ज्यादा दरों के लिए दबाव बनाए हुए है।
नियामक आयोग अध्यक्ष देश दीपक वर्मा, सदस्य आईबी पांडेय तथा मीनाक्षी सिंह की मौजूदगी में हुई जन सुनवाई में पावर कॉर्पोरेशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एसके कालिया ने नई दरें बैक डेट से लागू किए जाने का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि विद्युत अधिनियम के प्रावधानों के तहत जिस दिन टैरिफ आदेश जारी हुआ है उसी दिन से उसे लागू किया जाना चाहिए।
इसके विरोध में यूपीकोजेन एसोसिएशन के वरिष्ठ अधिवक्ता डीडी चोपड़ा ने पावर कॉर्पोरेशन की याचिका स्वीकार किए जाने पर ही सवाल उठाते हुए इसे खारिज करने की मांग की।