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छह महीने में एक भी मरीज भर्ती नहीं करने पर लखनऊ के आठ अस्पताल आयुष्मान योजना से बाहर

Tue, 01 Oct 2019 04:40 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Tue, 01 Oct 2019 04:40 PM IST
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eight lucknow hospital disimpanneled from ayushman yojana
ayushman yojna - फोटो : amar ujala
अधूरी तैयारी के बीच शुरू की गई आयुष्मान योजना सालभर बाद भी पटरी पर आती नजर नहीं आ रही है। एक ओर मरीज इलाज के लिए जूझ रहे हैं तो दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग और निजी अस्पतालों के बीच तलवारें खिंची हुई हैं। स्वास्थ्य विभाग ने छह माह तक एक भी मरीज भर्ती न करने वाले आठ अस्पतालों को पैनल से बाहर कर दिया है। इससे गुस्साए एक अस्पताल संचालक ने मामले की शिकायत मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री से की है।
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आयुष्मान योजना के तहत पंजीयन कराने वाले अस्पतालों को ओपीडी के साथ मरीज भर्ती भी करना है। उन्हें आयुष्मान मित्र और कंप्यूटर वगैरह भी खुद से लगाना है। इन व्यवस्थाओं को पूरा करने में छोटे अस्पतालों को वक्त लग रहा है। ऐसे में वे पंजीयन कराने के बाद भी मरीजों को भर्ती करने से कतराते हैं। इसके पीछे तर्क होता है कि उनके यहां सामान्य किस्म के मरीज आ रहे हैं।
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सर्दी-जुकाम, बुखार के मरीजों को भर्ती नहीं किया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने इस तर्क को खारिज कर दिया। छह माह तक मरीजों को भर्ती न करने वाले अस्पतालों की सूची तैयार की। इसके तहत आठ अस्पतालों को आयुष्मान पैनल से बाहर कर दिया है। फिलहाल अभी 129 निजी अस्पताल आयुष्मान के पैनल में हैं।
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मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री को भेजी शिकायत

पैनल से बाहर किए गए खदरा अस्पताल के संचालक ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को शिकायत भेजी है। इसमें स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कहा गया है कि पैनल से हटाने से पहले उन्हें नोटिस जारी किया जाना चाहिए था और उनका पक्ष भी जानना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग ने बिना नोटिस के पैनल से बाहर कर दिया है। 

यह भी बताया है कि आयुष्मान के पैनल में शामिल होते वक्त उन्होंने अपना पूरा स्टेटस दिया था। अस्पताल में कौन-कौन से डॉक्टर हैं, इसका भी विवरण दिया है। जब उनके अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीज आए ही नहीं तो क्या फर्जी तरीके से मरीज भर्ती करें?

गाइडलाइन का पालन जरूरी
आयुष्मान योजना की गाइडलाइन का पालन करना जरूरी है। पैनल में शामिल होने के लिए शर्त है कि मरीज को भर्ती भी करना होगा। क्योंकि इस योजना का लाभ भर्ती होने वाले मरीज को ही दिया जाता है। ऐसे में जिन अस्पतालों ने छह माह तक मरीज भर्ती नहीं किए, उन्हें पैनल से हटाया गया है।
- डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, सीएमओ 

शिकायत या सुझाव हो तो हमें बताएं

केंद्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत चयनित परिवार के सदस्यों को पांच लाख रुपये तक का इलाज दिया जाता है। पर, अब भी लाभार्थियों को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। 

इसलिए अमर उजाला ने एक अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य योजना में आ रही समस्याओं को सामने लाना और उसके निराकरण की दिशा में काम करना है, जिससे लाभार्थियों को ज्यादा फायदा मिल सके। यदि आपकी कोई शिकायत, सुझाव हों तो हमें बताएं।

व्हाट्सएप - 8859108092 (दोपहर 11 बजे से तीन बजे तक)
मेल -  chandrab@knp.amarujala.com
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