अवैध खनन मामला : ईडी ने केजीएमयू में छह घंटे की पूछताछ, गायत्री के छूटे पसीने
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की सात सदस्यीय टीम ने मंगलवार को पूर्व खनन मंत्री गायत्री प्रजापति से छह घंटे तक लगातार पूछताछ की। केजीएमयू में भर्ती गायत्री से पूछताछ का सिलसिला 11 बजे से लेकर शाम लगभग पांच बजे तक जारी रहा। इस दौरान ईडी ने गायत्री द्वारा आवंटित खनन के पट्टों से लेकर पट्टाधारकों तथा खनन पट्टों में अनियमितता से अर्जित कमाई के बारे में सवाल किए। इनके जवाब देने में उनके पसीने छूट गए।
सपा शासनकाल में खनन मंत्री रहे गायत्री से पूछा गया कि जिन पट्टों के आवंटन में अनियमितता साबित हो चुकी है, उनके आवंटन के पीछे क्या आधार था। किन वजहों से नियमों की अनदेखी की गई। इसके लिए किस-किसने सिफारिश की और पट्टों के आवंटन से किसे क्या लाभ मिला। गायत्री कई सवालों के जवाब देने से कतराते रहे। पूछताछ का सिलसिला अभी तीन दिन और चलेगा।
ईडी ने लखनऊ जेल के अधीक्षक से गायत्री से पूछताछ की अनुमति ले ली थी। उप निदेशक स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में सात सदस्यीय टीम सुबह करीब साढ़े दस बजे केजीएमयू पहुंची। यहां गायत्री को सीएमएस एसएन शंखवार के कक्ष में बुलाया गया, जहां बंद कमरे में पूछताछ की गई। टीम के पास सवालों की सूची के साथ ही अवैध खनन मामले की जांच में अब तक सामने आए साक्ष्यों की जानकारी भी थी।
गायत्री के करीबी भी जांच के दायरे में
गौरतलब है कि मामले की जांच के दरम्यान ईडी गायत्री की संपत्तियों का ब्योरा जुटा चुका है। ईडी को इस बात के साक्ष्य मिल चुके हैं कि उनकी संपत्ति पिछले कुछ वर्षों में कई गुना बढ़ गई। यह साक्ष्य हासिल होने का बाद ही ईडी ने अदालत से गायत्री से पूछताछ के लिए अर्जी लगाई थी।
ईडी के सूत्रों के अनुसार शुरुआती दौर में अधिक सवाल पट्टों के आवंटन और इस प्रक्रिया से जुड़े लोगों को लेकर किए गए। आवंटन में अनियमितता के मुद्दे पर गायत्री साफ बोलने से कतराते रहे। पट्टों के आवंटन के सिलसिले में गायत्री से उनके उन करीबियों के बारे में सवाल किए गए जिन्हें इससे लाभ हासिल हुआ। हालांकि गायत्री ने इन सवालों के अधिक साफ जवाब नहीं दिए हैं।
गायत्री से अभी उनकी संपत्तियों को लेकर सवाल किए जाने हैं। उनसे पूछा जाना है कि मंत्री बनने के बाद उन्होंने कितनी संपत्ति अर्जित की और यह धन कहां से आया। इस दौरान ईडी पूर्व मंत्री की संपत्ति का ब्योरा व उसके साक्ष्य अपने साथ रखेगा ताकि गायत्री अगर गोलमाल जवाब देने की कोशिश करें तो ये साक्ष्य उनके सामने रख दिए जाएं।
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सपा शासनकाल में खनन के पट्टों में हुई थी अनियमितता
सपा शासनकाल में खनन के पट्टों में बड़े पैमाने पर अनियमितता हुई थी। जांच में पता चला कि नियमों के विपरीत खनन के 22 पट्टे आवंटित करने की संस्तुति की गई थी। इनमें से 14 पट्टों के आवंटन की फाइल पर तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बतौर खनन मंत्री अनुमोदन किया था। बाकी मामलों का अनुमोदन तत्कालीन खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति ने किया था।
सीबीआई ने दर्ज किया था मामला
सीबीआई ने हमीरपुर में हुए खनन घोटाले की शुरुआती जांच के बाद केस दर्ज किया था। इसमें हमीरपुर की तत्कालीन डीएम बी. चंद्रकला समेत 11 लोगों को नामजद किया था। सीबीआई ने इसके बाद 12 स्थानों पर छापे मारकर कई अहम दस्तावेज बरामद किए गए थे। ईडी ने सीबीआई की एफआईआर को आधार बनाते हुए केस दर्ज किया था।