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मुजफ्फरनगर से जुड़े हैं जाली नोट तस्करी के तार
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लखनऊ। जाली नोटों की तस्करी के तार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से जुड़े हैं। इस तस्कर गिरोह के मुख्य आरोपी जमील व सलमान ने काफी दिनों तक मुजफ्फरनगर में रहकर नोट छापने की तकनीक सीखी थी। पुलिस जमील, सलमान और उनके मुजफ्फरनगर के कनेक्शन की कुंडली खंगालने में जुट गई है। वहीं तालकटोरा पुलिस, सलमान समेत दो तस्करों को रिमांड के लिए भी बुधवार को रिमांड के लिए अर्जी डालेगी।
राजधानी के गुडंबा व तालकटोरा की पुलिस ने जाली नोटों के तस्करी के गिरोह का पर्दाफाश किया था। इस मामले में तालकटोरा पुलिस ने सलमान समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया। इस गिरोह में सबसे सक्रिय जीआरपी का सिपाही राहुल था। उसके नेटवर्क का प्रयोग कर गिरोह पूरे प्रदेश में जाली नोटों की आपूर्ति करता था। इस गिरोह के पकड़े जाने के बाद खुलासा हुआ था कि इनका यूपी में पूरा नेटवर्क तैयार करने वाला मुख्य आरोपी जमील है। वह नेपाल सीमा तक जाली नोटों की तस्करी करवा रहा है। इसी वजह से पुलिस सलमान को रिमांड पर लेने के लिए अर्जी देगी। पुलिस का दावा है कि सलमान से कई ऐसी जानकारियां मिल सकती हैं जिससे गिरोह के कई मददगारों तक पहुंचा जा सकता है। पुलिस यह भी पता करना चाह रही है कि गिरोह कहीं विधानसभा चुनाव के लिए तो जाली नोटों की खेप नहीं मंगवा रहा था। पुलिस को आरोपियों के पास से 80 हजार रुपये के जाली नोट मिले थे। उधर जाली नोटों के तस्करों का नेटवर्क खंगालने में लगी एसटीएफ ने बाराबंकी व हरदोई में कुछ लोगों से पूछताछ की है।
जलाए गए नोटों की कीमत 50 लाख से ज्यादा
पश्चिम जोन में तैनात अधिकारी के मुताबिक, जमील और सलमान ने मुजफ्फरनगर में रहकर जाली नोटों के छापने की तकनीक सीखी थी। पुलिस अधिकारियों ने तस्करों से बरामद नोटों को आरबीआई में जांच के लिए भेजा था। वहां के अधिकारी भी नोटों को देखकर सकते में आ गए। उनका भी मानना है कि 50, 100 और 200 के नोट असली से काफी करीब है। इस पर बैंक भी आसानी से धोखा खा सकता है। हालांकि इसे नासिक भेजा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के मुताबिक, इन तस्करों को पुलिस की दबिश की सूचना मिल गई थी। एक बाल्टी में भरकर नोटों को जला दिया था। पुलिस को आशंका है कि जो नोट जलाए गये थे उनकी कीमत करीब 50 से 60 लाख रुपये हो सकती है। हालांकि अब यह बात तस्करों के रिमांड पर आने के बाद ही साफ हो सकेगी।
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राजधानी के गुडंबा व तालकटोरा की पुलिस ने जाली नोटों के तस्करी के गिरोह का पर्दाफाश किया था। इस मामले में तालकटोरा पुलिस ने सलमान समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया। इस गिरोह में सबसे सक्रिय जीआरपी का सिपाही राहुल था। उसके नेटवर्क का प्रयोग कर गिरोह पूरे प्रदेश में जाली नोटों की आपूर्ति करता था। इस गिरोह के पकड़े जाने के बाद खुलासा हुआ था कि इनका यूपी में पूरा नेटवर्क तैयार करने वाला मुख्य आरोपी जमील है। वह नेपाल सीमा तक जाली नोटों की तस्करी करवा रहा है। इसी वजह से पुलिस सलमान को रिमांड पर लेने के लिए अर्जी देगी। पुलिस का दावा है कि सलमान से कई ऐसी जानकारियां मिल सकती हैं जिससे गिरोह के कई मददगारों तक पहुंचा जा सकता है। पुलिस यह भी पता करना चाह रही है कि गिरोह कहीं विधानसभा चुनाव के लिए तो जाली नोटों की खेप नहीं मंगवा रहा था। पुलिस को आरोपियों के पास से 80 हजार रुपये के जाली नोट मिले थे। उधर जाली नोटों के तस्करों का नेटवर्क खंगालने में लगी एसटीएफ ने बाराबंकी व हरदोई में कुछ लोगों से पूछताछ की है।
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जलाए गए नोटों की कीमत 50 लाख से ज्यादा
पश्चिम जोन में तैनात अधिकारी के मुताबिक, जमील और सलमान ने मुजफ्फरनगर में रहकर जाली नोटों के छापने की तकनीक सीखी थी। पुलिस अधिकारियों ने तस्करों से बरामद नोटों को आरबीआई में जांच के लिए भेजा था। वहां के अधिकारी भी नोटों को देखकर सकते में आ गए। उनका भी मानना है कि 50, 100 और 200 के नोट असली से काफी करीब है। इस पर बैंक भी आसानी से धोखा खा सकता है। हालांकि इसे नासिक भेजा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के मुताबिक, इन तस्करों को पुलिस की दबिश की सूचना मिल गई थी। एक बाल्टी में भरकर नोटों को जला दिया था। पुलिस को आशंका है कि जो नोट जलाए गये थे उनकी कीमत करीब 50 से 60 लाख रुपये हो सकती है। हालांकि अब यह बात तस्करों के रिमांड पर आने के बाद ही साफ हो सकेगी।
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