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भुगतान से पहले पेयजल योजनाओं की होगी जांच, जल निगम ने मांगे 63 करोड़ रुपये
Sat, 08 Aug 2020 12:15 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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Published by: ishwar ashish
Updated Sat, 08 Aug 2020 12:15 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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शासन ने केंद्रीय पेयजल योजनाओं में सेंटेज का भुगतान करने से पहले इसकी गहन जांच कराने का निर्णय लिया है। कार्यदायी संस्था जल निगम ने पिछले वित्त वर्ष के लिए 63 करोड़ रुपये सेंटेज के तौर पर मांगे हैं। इसमें गड़बड़ी की आशंका के चलते योजनाओं के लिए भुगतान करने से पहले 16 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जांच के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की जांच या परीक्षण आम तौर पर नहीं होता था। शासन के विशेष सचिव पंकज सक्सेना की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि नमामि गंगे तथा ग्रामीण जलापूर्ति अनुभाग के तहत केंद्र पोषित पेयजल योजनाओं यानी राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम और नीर निर्मल परियोजना के लिए सेंटेज का भुगतान किया जाना है। इन कार्यों को कराने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश जल निगम को दी गई है। इनमें बने सेंटेज के परीक्षण और निर्धारण के लिए जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। परीक्षण की जिम्मेदारी वन एवं वन्य जीव विभाग के वित्त नियंत्रक आलोक अग्रवाल को दी गई है।
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अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की जांच या परीक्षण आम तौर पर नहीं होता था। शासन के विशेष सचिव पंकज सक्सेना की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि नमामि गंगे तथा ग्रामीण जलापूर्ति अनुभाग के तहत केंद्र पोषित पेयजल योजनाओं यानी राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम और नीर निर्मल परियोजना के लिए सेंटेज का भुगतान किया जाना है। इन कार्यों को कराने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश जल निगम को दी गई है। इनमें बने सेंटेज के परीक्षण और निर्धारण के लिए जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। परीक्षण की जिम्मेदारी वन एवं वन्य जीव विभाग के वित्त नियंत्रक आलोक अग्रवाल को दी गई है।
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यह है सेंटेज
सूत्रों के मुताबिक, इस बारे में जल निगम से विस्तृत ब्योरा मांगा गया है। इसमें पूछा गया कि जिस धन राशि पर सेंटेज की मांग की गई है, 31 मार्च 2020 तक उन परियोजनाओं में उपयोगिता प्रमाण पत्र की स्थिति क्या थी। साथ ही जल निगम को यह प्रमाण पत्र भी देने के लिए कहा गया कि परियोजनावार व्यय धनराशि में प्रशासनिक व्यय शामिल नहीं है। किसी भी परियोजना का फंड डायवर्जन नहीं किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जल निगम से जवाब मिलने के बाद ही स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट होगी।
सेंटेंज किसी भी निगम को उसके काम कराने के एवज में दिया जाता है, जिससे उसके रूटीन खर्चे पूरे होते हैं। जल निगम में किसी भी परियोजना की कुल लागत का 12.5 प्रतिशत सेंटेज लिया जाता है।
सेंटेंज किसी भी निगम को उसके काम कराने के एवज में दिया जाता है, जिससे उसके रूटीन खर्चे पूरे होते हैं। जल निगम में किसी भी परियोजना की कुल लागत का 12.5 प्रतिशत सेंटेज लिया जाता है।