लॉयन सफारी में ‘काले साये’ का इलाज शुरू
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इटावा लायन सफारी में संक्रमण से जूझ रहे कानपुर के बब्बर शेरों में पुराना मर्ज हो सकता है। ये वही संक्रमण हो सकता है, जो पिछले साल अप्रैल में हैदराबाद से कानपुर लाए जाने के बाद उनमें पाए गए थे।
इंडियन वेटेरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईवीआरआई), बरेली को भेजे गए सैंपल की जांच के प्राथमिक नतीजों के बाद सफारी प्रशासन व चिकित्सकों ने शेरों के इलाज के पैटर्न में मामूली बदलाव किया है।
देहरादून व आगरा के विशेषज्ञों की सलाह पर चिकित्सकों ने सोमवार को शेरों के नर्वस सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए विष्णु व लक्ष्मी की फिजियोथेरेपी शुरू की।
इतना ही नहीं शेरों के इलाज के लिए बाहर से भी मदद मांगी गई है। साथ ही आगरा के बीयर रेस्क्यू सेंटर से फिजियोथेरेपी व इंफ्रा रेड मशीनें मंगवाकर ट्रीटमेंट दी जा रही है। शेरों के डाइट पर भी काम चल रहा है।
जुड़ेंगे आगरा बीयर रेस्क्यू सेंटर के विशेषज्ञ
मंगलवार तक लायन सफारी से आगरा बीयर रेस्क्यू सेंटर के विशेषज्ञ भी इस ऑपरेशन से जुड़ेंगे। उधर लखनऊ से इटावा पहुंचे आला अधिकारियों ने सफारी के प्रभारी चिकित्सक डॉ. कुलदीप की लचर कार्यशैली पर फटकार लगाई।
सूत्रों की मानें तो इस मामले में एक रिपोर्ट शासन को भेजने की तैयारी है, जिसमें शेरों की एक्टिविटी व सफारी के स्टाफ की कार्यशैली का जिक्र किया गया है।
कानपुर के शेरों में लकवे के लक्षण मिले हैं, जिससे वे खड़े नहीं हो पा रहे हैं और उन्हें बुखार भी है। इसके बाद सफारी प्रशासन सतर्क हो गया है।
ऐसे संक्रमण से अन्य शेरों को बचाने के लिए उनके ब्लॉक और मेडिकल स्टाफ अलग कर दिए गए हैं। सोमवार को लखनऊ व कानपुर के कुछ चिकित्सक भी लौट गए।
लायन सफारी इटावा बब्बर शेर प्रजनन केंद्र निदेशक केके सिंह ने बताया कि आईवीआरआई की अपनी प्राथमिक रिपोर्ट में उसी वायरस का जिक्र किया है, जो उनमें लगभग साल भर पहले कानपुर जू में एक्टिव पाया गया था। अभी सैंपल की जांच जारी है। शेरों की हालत में सुधार हो रहा है।
संक्रमण ने किया नर्वस सिस्टम डैमेज
आबाद होने से पहले ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट इटावा लॉयन सफारी पर काला साया तब मंडराने लगा, जब खबर आई कि लॉयन सफारी में अजीब किस्म का संक्रमण फैल गया है।
एक अनजान किस्म के संक्रमण ने कानपुर जू से ले जाए गए बब्बर शेरों के जोड़े के नर्वस सिस्टम को डैमेज कर दिया है।
बब्बर शेर ‘विष्णु’ में लकवे के लक्षण पाए गए हैं। उसका चलना-फिरना भी दुश्वार हो गया है। वहीं, शेरनी ‘लक्ष्मी’ की तबीयत भी खराब चल रही है। इन दोनों को तीन हफ्ते पहले ही चार अन्य बब्बर शेरों के साथ सफारी में लाया गया था।
संक्रमण का पता चलते ही विभाग के आला अधिकारियों और विशेषज्ञों ने रविवार को सफारी कैंपस में डेरा डाल दिया है। लखनऊ जू के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. उत्कर्ष शुक्ला और कानपुर जू के डॉक्टर समेत पांच वन्यजीव चिकित्सकों की टीम भी वहां पहुंच गई है।
दोनों शेरों के कई तरह के सैंपल इंडियन वेटरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईवीआरआई) बरेली भेजे गए और सीएम खुद अधिकारियों से अपडेट ले रहे हैं।
कई शेर हुए हैं बीमार
सूत्रों की मानें तो 10 सितंबर को कानपुर जू से इटावा ले जाए जाने के दौरान विष्णु व लक्ष्मी को चोटें आईं, जिसके बाद वे बीमार पड़ गए। इसी दौरान वातावरण में बदलाव के कारण हुए संक्रमण ने दोनों के नर्वस सिस्टम पर अटैक कर दिया।
पिछले साल अप्रैल में हैदराबाद से कानपुर जू लाए जाने के दौरान भी चोटिल होने के कारण इन दोनों शेरों की तबीयत बिगड़ गई थी। लक्ष्मी में तब भी संक्रमण के लक्षण पाए गए थे।
अब अन्य शेरों को संक्रमण से बचाने की कवायद सफारी के ब्रीडिंग सेंटर के चौथे ब्लॉक में रह रहे इन दोनों शेरों की हालत बिगड़ने के बाद से तीन और ब्लॉकों में रह रहे छह बब्बर शेरों को संक्रमण से बचाने की कवायद शुरू हो गई है।
रविवार को ऐहतियातन पूरे ब्लॉक को सेनिटाइज कर दिया गया। यहां तक कि पूरे ब्लॉक में आने-जाने वाले डॉक्टरों और सपोर्टिंग स्टाफ को बाकी स्टाफ से अलग किया गया है।