बच्चे की आंख में घुसी खपरैल निकाल डॉक्टरों ने दी नई जिंदगी, बच गई दाहिनी आंख
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केजीएमयू के डॉक्टरों ने आठ साल के बच्चे की बायीं आंख में घुसी खपरैल निकालकर दायीं आंख और ब्रेन बचाकर नई जिंदगी दी है। खपरैल दायीं आंख से एक मिलीमीटर दूर थी। जबकि बच्चे की बायीं आंख खराब हो गई।
जौनपुर निवासी आठ साल का बच्चा खेलते वक्त गिर गया था। इससे खपरैल का टुकड़ा उसकी बायीं आंख को भेजते हुए अंदर घुस गया। परिजन बच्चे को लेकर जिला मुख्यालय गए, जहां से केजीएमयू रेफर कर दिया गया।
ट्रॉमा सेंटर से उसे प्लास्टिक सर्जरी विभाग भेज दिया गया, जहां प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रोफेसर दिव्य नारायण मिश्रा के नेतृत्व में नेत्र रोग विभाग और न्यूरो सर्जरी विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से सर्जरी की। इसमें बच्चे की दायीं आंख और ब्रेन का फ्लोर बचाने में कामयाबी मिल गई है।
जानिए क्या था खतरा
प्रोफेसर दिव्य नारायण के अनुसार, सीटी स्कैन से पता चला कि खपरैल का टुकड़ा ऑप्टिकल नर्व के पास तक पहुंच गया था। बायीं आंख खराब हो गई थी, लेकिन दायीं आंख से एक मिलीमीटर दूर था। डर था कि निकालते वक्त जरा सी असावधानी दूसरी आंख को भी खराब कर सकती है।
दूसरा खतरा यह था कि ब्रेन फ्लोर से जुड़ी नसें भी डैमेज हो सकती थीं। लेकिन हर स्तर पर सावधानी बरतते हुए खपरैल को निकालने में कामयाबी मिली। बच्चा अब पूरी तरह से ठीक है।
ये रही डॉक्टरों की टीम
प्लास्टिक सर्जरी विभाग से डॉ. डीएन उपाध्याय, डॉ. अभिजात, डॉ. संदेश, डॉ. आकांश, न्यूरो सर्जरी से डॉ. क्षितिज श्रीवास्तव, डॉ. नवनीत, ऑप्थमॉलजी से डॉ. अपजित कौर, डॉ. शैलजा, एनेस्थीसिया से डॉ. सतीश वर्मा।