फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Doctors remove two KG splene from child's stomach.

तीन घंटे सर्जरी के बाद निकाली दो किलो की स्प्लीन

Thu, 22 Oct 2015 03:12 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 22 Oct 2015 03:12 PM IST
Doctors remove two KG splene from child's stomach.

12 साल के संदीप को किसी वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण के कारण तिल्ली (स्प्लीन) बढ़ गई थी। इसकी वजह से उसके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो गई थी। गरीबी के कारण बीते 10 साल से परिवारवाले उसका इलाज नहीं करा पाए। इसके चलते तिल्ली का आकार इतना बढ़ गया कि उसे पेट के अंदर के अन्य अंग दबने लगे।



केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर के पूर्व ईएमओ डॉ. शोभनाथ सोनकर बच्चे से छुटकारा दिलाने के लिए उसकी निजी संसाधनों से सर्जरी की और तकलीफों से निजात दिला दी। अब संदीप धीरे-धीरे स्वास्थ्य लाभ ले रहा है।


सर्जन डॉ. शोभनाथ सोनकर ने बताया कि हरिशंकर मौर्या आजमगढ़ में राजगीर का कार्य करते हैं। संदीप की दिक्कतों के बावजूद वो इतने सक्षम नहीं थे कि उसका सही इलाज करा पाते। उसकी दिक्कतों की जानकारी डॉ. शोभनाथ को मिली तो उन्होंने संदीप को बुलाकर उसकी जांच की और पाया कि बाएं हिस्से में पाया जाने वाला स्प्लीन का आकार बहुत बढ़ चुका है। ये शिकायत मरीज को मलेरिया, किसी भी वायरस या बैक्टीरिया के गंभीर संक्रमण के कारण होती है। इसमें स्प्लीन में खून भरता जाता है। जिससे उसका आकार बहुत बढ़ जाता है। संदीप को भी यही दिक्कत थी।
विज्ञापन


स्प्लीन बढ़कर उसकी नाभि के नीचे तक पहुंच गया था। इससे पेट के अंदर के अन्य अंग दबने लगे थे। स्प्लीन ने शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने का अपना कार्य भी बंद कर दिया था। सफेद रक्त कणिकाएं बनना बंद होने के कारण संदीप को कई और बीमारियां होने की आशंका हो गई थी। उसका हीमोग्लोबिन घटकर मात्र 5.6 रह गया था। उसे अधिक दिक्कत न हो इसलिए स्प्लीन को सर्जरी से बाहर निकालने का निर्णय लिया गया।

जानें क्या है ‌स्‍प्लीन

Doctors remove two KG splene from child's stomach.

एनेस्थेटिस्ट डॉ. वाईएन विश्वकर्मा की मदद से डॉ. शोभनाथ ने उसकी तीन घंटे तक सर्जरी कर स्प्लीन को बाहर निकाल दिया। उसकी खराब आर्थिक स्थिति को देखते हुए सर्जन और एनेस्थेटिस्ट ने फीस नहीं ली। डॉ. बीके सिंह ने मरीज के रहने और दवाओं की व्यवस्था की। यहां तक कि संदीप के छह यूनिट खून का इंतजाम भी चिकित्सकों ने अपने संसाधनों से किया।

क्या है स्‍प्लीन का कार्य

तिल्ली का कार्य शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखना है। उसमें सफेद रक्त कणिकाएं बनती हैं। जिसे लिम्फोसाइट्स कहा जाता है। यह ही शरीर में फर्स्ट लाइन रोग प्रतिरोधक का कार्य करती हैं और बाहर आने वाले किसी भी संक्रमण को शरीर के अंदर फैलने से रोकती हैं।

इसके अलावा रक्त की खराब कणिकाओं को अलग कर खत्म कर देती हैं। इसी में लाल रक्त कणिकाएं और प्लेटलेट्स रहती हैं जो थक्का बनने में मदद करती हैं। संक्रमण होने पर स्प्लीन खराब रक्त कणिकाओं के साथ ही लाल रक्त कणिकाओं को भी खत्म करने लगती है जिससे मरीज को नुकसान होने लगता है।

स्प्लीन निकालने का असर
डॉ. शोभनाथ सोनकर ने बताया कि स्प्लीन निकालने से संदीप के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए बीमारियों की वैक्सीन देनी होगी। सर्जरी के बाद उसे निमोनिया से बचाने की वैक्सीन दी गई है। इसके बाद जरूरत पड़ने पर कई अन्य वैक्सीन दी जाएंगी।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed