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कोरोना को हराने के बाद भी कमजोरी रहे तो घबराएं नहीं, इन बातों का रखें ध्यान

Tue, 08 Sep 2020 03:45 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Tue, 08 Sep 2020 03:45 PM IST
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do not panic if you still have weakness after defeating Corona
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
कोरोना को हराने के बाद भी सांस फूले या कमजोरी महसूस हो तो घबराए नहीं। इसे सही होने में तीन माह लग सकता है। परेशानी ज्यादा हो तो डॉक्टर को दिखा लें। एसजीपीजीआई के डॉ. जिया हाशिम ने बताया कि कमजोरी की मूल वजह कोशिकाओं का क्षतिग्रस्त हो जाना है।  यह समस्या वायरस से जुड़ी अन्य बीमारियों में भी होती है। 
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डॉ. हाशिम ने कहा जिन पर वायरस का असर कम हुआ, वे माहभर में ठीक हो जा रहे हैं। हालांकि, इनमें भी कमजोरी, सीढ़ियां चढ़ने में सांस फूलने की समस्या दिख रही है। वायरस फेफड़े, हार्ट सहित अन्य अंगों की नसों को क्षतिग्रस्त कर देता है। नसों में क्लॉटिंग की रिकवरी में लंबा वक्त लग जाता है।
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डॉ. हाशिम समझाते हैं कि एक बार शरीर में ऑक्सीजन का प्रसार कम होने, फेफड़े की नसों के क्षतिग्रस्त होने, शरीर के अन्य ऊतकों के मृतप्राय होने से शरीर की आंतरिक मशीनरी की पूरी प्रक्रिया सुस्त हो जाती है। हार्मोन्स, साइटोकाइनिन उन्हें फिर से जिंदा कर सक्रिय करते हैं।
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एंटीबॉडी बनने के बाद धीरे-धीरे होती है रिकवरी 

लोहिया संस्थान के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रो. डॉ. राजीव रतन सिंह बताते हैं कि कोरोना में ज्यादा समस्या इसलिए आ रही है, क्योंकि बुखार लंबे समय तक रहता है। एंटीबॉडी बनने के साथ धीरे-धीरे यह कमजोरी दूर होती है। कई बार प्लेटलेट्स भी गिरती हैं। 

ये हैं बचाव के उपाय
फिजीशियन डॉ. वीरेंद्र यादव बताते हैं कि नाश्ते में रेशेदार, रंगीन फल खाएं। तरल पदार्थ लें। खाना चार हिस्से में बांटकर खाएं। विटामिन सी, जिंक के टैबलेट ले सकते हैं। गहरी सांस लेने, योग, प्राणायाम करें।
 

शोध में देर तक समस्या बनी रहने की बात  
कुछ शोध पत्रों से पता चला कि सार्स वायरस का इंफेक्शन खत्म होने के तीन साल तक थकान, मांसपेशियों में कमजोरी और नींद न आने जैसी दिक्कतें रहीं। कोविड 19 भी सॉर्स का रूप है, ऐसे में पोस्ट-वायरल फटीग सिंड्रोम हो सकता है। अमेरिका के शोध में पाया गया कि ठीक हुए मरीजों में मांसपेशियों की हुई क्षति दुरुस्त होने में समय रहता है।

तीन माह में दोबारा जांच कराने की जरूरत नहीं

यदि कोरोना की चपेट में आ चुके हैं तो तीन माह तक दोबारा जांच कराने की जरूरत नहीं है। ऐसा कराने पर रिपोर्ट पॉजिटिव आ सकती है, लेकिन यह फॉल्स पॉजिटिव माना जाएगा। इसकी बड़ी वजह है कि शरीर में वायरस का मृत आरएनए है तो भी आरटीपीसीआर मशीन पॉजिटिव बताती है।

 

पीजीआई के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के डॉ. अनुपम वर्मा बताते हैं कि अभी तक दुनियाभर में सिर्फ एक मरीज में दोबारा संक्रमण की पुष्टि हुई है वह भी चार माह बाद। केजीएमयू की डॉ. तूलिका चंद्रा बताती हैं कि दोबारा जांच की जरूरत ही नहीं है। दक्षिण कोरिया में हुए अध्ययन में कहा गया कि शरीर में वायरस के मृत आरएनए की मौजूदगी से इन मरीजों के टेस्ट पॉजिटिव आते हैं, लेकिन वे किसी को भी संक्रमित नहीं कर सकते हैं। 

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