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आपके बच्चे की आंखें भी बिल्ली जैसी चमके तो न करें नजरअंदाज, हो सकता है गंभीर बीमारी का खतरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 29 Jun 2018 03:31 PM IST
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- फोटो : डेमो
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बच्चों की आंखें अगर बिल्ली जैसी चमकें तो तुरंत उनकी जांच कराएं, यह आंखों के कैंसर का लक्षण हो सकता है। यह कहना है केजीएमयू के नेत्र रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफे सर डॉ. सिद्धार्थ अग्रवाल का। कैंसर के मरीजों को बचाने में कामयाबी हासिल करने के लिए उन्हें इंडो अमेरिकन कैंसर एसोसिएशन ने सम्मानित किया है।
यह सम्मान पाने वाल वह नॉर्थ इंडिया के पहले डॉक्टर हैं। डॉ. अग्रवाल का कहना है कि बच्चों में आंखों के कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। केजीएमयू में हर साल इसके करीब 50 नए मरीज आ रहे हैं। इसमें सिर्फ 20 प्रतिशत की ही रोशनी बच पाती है।
बच्चों की आंखों के कैंसर पर विशेष रिसर्च करने वाले डॉ. अग्रवाल न्यूयॉर्क के कोलंबिया यूनिवर्सिटी में आयोजित सम्मेलन में हिस्सा लेने गए थे। अमेरिकन कैं सर एसोसिएशन की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में पूरे विश्व के कैंसर विशेषज्ञों को बुलाया गया था।
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यह सम्मान पाने वाल वह नॉर्थ इंडिया के पहले डॉक्टर हैं। डॉ. अग्रवाल का कहना है कि बच्चों में आंखों के कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। केजीएमयू में हर साल इसके करीब 50 नए मरीज आ रहे हैं। इसमें सिर्फ 20 प्रतिशत की ही रोशनी बच पाती है।
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बच्चों की आंखों के कैंसर पर विशेष रिसर्च करने वाले डॉ. अग्रवाल न्यूयॉर्क के कोलंबिया यूनिवर्सिटी में आयोजित सम्मेलन में हिस्सा लेने गए थे। अमेरिकन कैं सर एसोसिएशन की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में पूरे विश्व के कैंसर विशेषज्ञों को बुलाया गया था।
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बढ़ रही है मरीजों की संख्या
एसोसिएट प्रोफेसर सिद्धार्थ अग्रवाल सम्मानित
- फोटो : amar ujala
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि केजीएमयू में आंख के कैंसर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। किसी बच्चे की आंख में कैंसर होने पर रेटिना प्रभावित होने से उसे कम दिखाई देता है। लक्षण के आधार पर बच्चे की आंख की जांच की जाती है।
यह बीमारी छह माह से तीन साल तक के बच्चों में ज्यादा होती है। डॉ. अग्रवाल के मुताबिक 2011 से 2016 तक केजीएमयू के नेत्र रोग विभाग में करीब 250 आंख के कैंसर के मरीजों का इलाज किया गया। इसमें करीब 20 प्रतिशत मरीजों की आंखों की रोशनी पूरी बचाने में कामयाबी मिली। जबकि 50 प्रतिशत की आंखें तो बच गईं, लेकिन उनकी रोशनी प्रभावित हुई।
यह बीमारी छह माह से तीन साल तक के बच्चों में ज्यादा होती है। डॉ. अग्रवाल के मुताबिक 2011 से 2016 तक केजीएमयू के नेत्र रोग विभाग में करीब 250 आंख के कैंसर के मरीजों का इलाज किया गया। इसमें करीब 20 प्रतिशत मरीजों की आंखों की रोशनी पूरी बचाने में कामयाबी मिली। जबकि 50 प्रतिशत की आंखें तो बच गईं, लेकिन उनकी रोशनी प्रभावित हुई।