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पदोन्नति में आरक्षण बना वोट बैंक का मुद्दा

Sat, 15 Mar 2014 08:48 AM IST
अखिलेश बाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश बाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 15 Mar 2014 08:48 AM IST
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disclose policy of reservation in promotion in manifesto

चुनावी मौसम में पदोन्नति में आरक्षण का मुद्दा फिर गरमाने लगा है।

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आरक्षण विरोधी सामान्य-पिछड़े अधिकारियों व कर्मचारियों के संगठन सर्वजन हिताय संरक्षण समिति ने राजनीतिक दलों से इस मुद्दे को घोषणा पत्र में लिखकर अपनी राय सार्वजनिक करने की मांग की है।

तर्क दिया है कि राजनीतिक दलों को स्पष्ट करना चाहिए कि केंद्र सरकार में आने पर वे पदोन्नति में आरक्षण पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का सम्मान करेंगी या संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराएंगी।
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समिति के इस कदम से भाजपा और कांग्रेस जैसे दलों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

कारण, समाजवादी पार्टी के अलावा अन्य किसी भी दल के लिए इस मुद्दे पर स्पष्ट बोल पाना बहुत मुश्किल है।

समिति के अध्यक्ष शैलेन्द्र दुबे, संयोजक ए.ए. फारूकी, एच.एन. पाण्डेय, कायम रजा रिजवी, आर.के. सिंह, एस.आर. सोनी, पी.के. दीक्षित, डी.सी. दीक्षित, डॉ. हरदेव सिंह यादव, आर.एस. सिन्हा, नूर आलम की तरफ से सभी राजनीतिक दलों को मांग पत्र भेजे गए हैं।
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इसमें कहा गया है कि प्रदेश के सामान्य व पिछड़े वर्ग के 18 लाख कर्मचारी व अधिकारी वोट देने के पहले सभी दलों से इस मुद्दे पर उनकी राय जानना चाहते हैं। जिससे वह अपने वोट का फैसला कर सके।


समिति के अध्यक्ष ने बताया कि जो दल अपना मत उजागर नहीं करेंगे या पदोन्नति में आरक्षण का समर्थन करेंगे।

उन्हें पदोन्नति में आरक्षण का समर्थक समझा जाएगा। ऐसे दलों के खिलाफ सामान्य व पिछड़ी जातियों के अधिकारी व कर्मचारी मतदान नहीं करेंगे।

साथ ही अपने मिलने वालों व रिश्तेदारों से भी ऐसा ही करने का आग्रह करेंगे।

दुबे ने कहा कि कॉंग्रेस व भाजपा सरकारों ने सर्वोच्च न्यालाय के निर्देश को कई बार पलटकर पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था बहाल की।

सामान्य व पिछड़े वर्ग के युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों का रास्ता बंद कर दिया। यह दल एक बार फिर सर्वोच्च न्यायालय से मिले अधिकार को छीनने पर आमादा है।

सर्वजन हिताय संरक्षण समिति चाहती है कि जनता इन दलों की सच्चाई समझे और पता चले कि वोट का खेल खेलने वाली पार्टियों को सामान्य व पिछड़ी जातियों की भी चिंता है या नहीं।

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