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75 लाख की मशीनें बेकार, नहीं होती स्वाइन फ्लू की जांच!

Fri, 20 Feb 2015 09:29 AM IST
अमित यादव/अमर उजाला, लखनऊ
अमित यादव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 20 Feb 2015 09:29 AM IST
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Diagnosis kit of swine flu is being dumped in Uttar Pradesh.

प्रदेश में स्वाइन फ्लू (इन्फ्लुएंजा एच1एन1) के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है लेकिन जांच की सुविधा सिर्फ लखनऊ स्थित संजय गांधी पीजीआई और केजीएमयू में ही है।

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प्रदेश के तीन मेडिकल कॉलेजों के लिए 75 लाख रुपये में मशीनें खरीदी गई थीं, लेकिन न तो उन्हें चलाने के लिए रिएजेंट हैं, न अन्य जरूरी संसाधन। ऐसे में मरीजों को जांच के लिए लखनऊ या दिल्ली में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजीज कंट्रोल (एनआईडीसी) भेजा जा रहा है।
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स्वाइन फ्लू के मरीजों में संक्रमण की पुष्टि के लिए गले के स्राव की जांच रियल टाइम पीसीआर मशीन से की जाती है। यह मशीन करीब 25 लाख रुपये की आती है। वर्ष 2009 में सूबे में स्वाइन फ्लू का प्रकोप बढ़ने के बाद एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा, गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज कानपुर और इलाहाबाद मेडिकल कॉलेज के लिए ये मशीनें खरीदी गई थीं।
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सूत्रों के अनुसार, एनआईडीसी स्वाइन फ्लू जांच की किट मुहैया कराता है। अन्य संसाधन मेडिकल कॉलेजों को खुद जुटाने होते हैं, लेकिन लापरवाही के कारण संसाधन नहीं जुटाए गए। इस कारण ये मशीनें बेकार पड़ी हैं।

इन कमियों का रोना रोते हैं डॉक्टर

Diagnosis kit of swine flu is being dumped in Uttar Pradesh.

आगरा मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. अजय अग्रवाल ने मशीन होने के बावजूद जांच न होने की पुष्टि की है। उनका कहना है कि टेक्नीशियन व अन्य संसाधनों का अभाव है। वहीं इलाहाबाद मेडिकल कॉलेज की पैथोलॉजी विभाग की हेड डॉ. वत्सला मिश्रा ने मशीन खराब होने की बात कही। उन्होंने बताया कि मशीन को ठीक कराने के लिए पत्र लिखा गया है।

20 लाख रुपये की आती है किट
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार एनआईडीसी से जो किट मिलती है, उसकी लागत लगभग 20 लाख रुपये है। इस किट से एक हजार जांच होती हैं। इस तरह एक जांच के 2000 रुपये पड़ते हैं। अन्य संसाधन अतिरिक्त होते हैं। संजय गांधी पीजीआई और केजीएमयू एनआईडीसी से मिली किट से जांच करता है। अन्य संसाधन उसके अपने होते हैं।

निजी पैथोलॉजी की रिपोर्ट पर भरोसा नहीं

निजी पैथोलॉजी इस जांच की फीस 10 हजार रुपये तक लेते हैं लेकिन विश्वसनीयता संदिग्ध होने के कारण स्वास्थ्य विभाग इसे मान्यता नहीं देता।

लखनऊ में बुधवार को एक ऐसा ही केस सामने आया, जिसमें कारपोरेट अस्पताल ने मरीज को स्वाइन फ्लू पॉजिटिव बताया लेकिन एसजीपीजीआई से जांच में रिपोर्ट निगेटिव आ गई।

जांच के लिए गले से लेते हैं सैंपल

Diagnosis kit of swine flu is being dumped in Uttar Pradesh.

माइक्रोबायोलिस्ट बताते हैं कि स्वाइन फ्लू की जांच के लिए गले से स्राव का नमूना लिया जाता है। गले में स्थित टांसिलर फोसा और पोस्ट फेरेंजियल वॉल्व से ये नमूना लिया जाता है। इसे एक ट्यूब में रखकर संबंधित लैब पहुंचाया जाता है।

इस पर डीजीएमई के डॉ. वीएम त्रिपाठी का कहना है कि जिन मेडिकल कॉलेजों में रियल टाइम पीसीआर मशीनें हैं, वहां से जानकारी मांगी जाएगी। जो भी जरूरी संसाधन होंगे, वे उपलब्ध कराए जाएंगे।

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