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अब नहीं लगाने पड़ेंगे नकली दांत, हर उम्र में उगेंगे असली दांत!

Sun, 13 Dec 2015 04:17 PM IST
Updated Sun, 13 Dec 2015 04:17 PM IST
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dentist conference in kgmu lucknow

केजीएमयू के प्रॉस्थोडांटिक्स विभाग के 50 साल पूरे होने पर पोस्ट ग्रेजुएट गोल्डन जुबली एल्युमनाई मीट का आयोजन किया गया। देश के अलग-अलग शहरों में दांत की बीमारी से पीड़ित मरीजों के इलाज में जुटे विशेषज्ञ डॉक्टरों से बातचीत के आधार पर पेश है एक रिपोर्ट....।

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फास्ट फूड खाने वाले लोग जाने अनजाने में अपने दांतों को खराब कर रहे हैं। यह जानकारी शनिवार को आर्मी मेडिकल कोर के डेंटल विंग से सेवानिवृत्त हुए लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. विमल अरोड़ा ने दी।
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उन्होंने बताया कि खानपान, स्टिकी फूड और अधिक मीठे व्यंजन खाने से दांतों को अधिक नुकसान होता है। उनके अनुसार फास्ट फूड या अन्य खाद्य पदार्थों से निकलने वाला एसिड कोमल स्तर पर अटैक करता है। इससे वो हिस्सा डिमिनरलाइज होता है और उसकी वजह से दांत की सतह खराब होने लगती है।
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उन्होंने बताया कि दांत की स्मूथनेस खत्म होती है जिससे दांत में प्लाक एक लेयर जमा होती हे। इस वजह से बैक्टीरिया जमा होता है और दर्द होने लगता है। यही सतह दांत के बीच गड्ढा करने लगती है जिसे लोग कहते हैं कि दांत में कीड़ा लग गया है। वो बताते हैं कि दांत की समस्या से बचने के लिए खुद से मुंह की नियमित जांच बहुत जरूरी है।

ऐसे उग जाएंगे गिर चुके दांत

dentist conference in kgmu lucknow

सरदार पटेल डेंटल कॉलेज के प्रॉस्थोडांटिक्स विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एके सिंह ने बताया कि आने वाले 20 से 25 वर्षो में स्टेम सेल से दांत उगा दिए जाएंगे। मरीज के खून से सेल्स ली जाएंगी और इसी से दांत को डवलप किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अकल दांत यानि मसूडे़ के आखिरी दांत से स्टेम सेल डवलप की जाती हैं।

मौजूदा समय में स्टेम सेल टेक्निक से दिल्ली, बंगलुरू और चेन्नई में काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि मस्तिष्क और जबड़ा एक साथ जुड़ा होता है। ऐसे में जो भी विचार और भाव मन में आता है उसका सीधा असर दांतों पर पड़ता है। जीवन में तनाव होने पर व्यक्ति दांत किटकिटाने लगता है और कई बार उसे दांत में भारीपन लगता है। ऐसे में शांत मन और स्वस्थ शरीर से ही दांत को स्वस्थ रखा जा सकता है।

दांत गिर चुके हैं और खाने पीने में दिक्कत है। चेहरे की खूबसूरती खराब हो चुकी है। तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। एम्स दिल्ली के प्रॉस्थोडांटिक्स विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. वीना जैन ने बताया कि जिनके दांत गिर चुके हैं, खराब हो चुके हैं या दांत आए ही नहीं है उनको इंप्लांट टेक्निक की मदद से दांत लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इसके लिए बाजार में टाइटेनियम स्क्रू के साथ टूथकलर जमेनिया इंप्लांट और एबॉटमेंट आ रहा है। इन इंप्लांट में जरा भी पता नहीं चलता है कि ये दांत नकली हैं।

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