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सदर में गोमती नगर की रणनीति पड़ी भारी

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Sat, 25 Apr 2020 01:55 AM IST
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delayed strategy played role in spreading corona
चंद्रभान यादव
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लखनऊ। सदर में प्रशासनिक मशीनरी की शुरुआती ढिलाई कोरोना के मामले बढ़ने में मददगार रही। कोरोना पॉजिटिव मामले सामने आने पर जमातियों के क्लोज कॉन्टेक्ट वालों की खोज तो शुरू हुई लेकिन गोमतीनगर जैसी रणनीति सदर में भी अपनाना भारी पड़ा। शुरुआत में सैंपल लेने की गति धीमी रही तो जागरूकता बढ़ाने के लिए भी देरी से कदम उठाए गए। वहीं घनी आबादी और 300-400 वर्गफीट के घर में 20-22 लोगों का रहना भी संक्रमण के बढ़ने के पीछे बड़ा कारण बना। उल्लेखनीय है कि सदर इलाके में अब तक सबसे ज्यादा 97 कोेरोना पॉजिटिव मिल चुके हैं। राजधानी में 31 मार्च को 23 जमाती मिले। ये कैसरबाग, मडियांव और काकोरी स्थित मस्जिदों में रुके थे। एक अप्रैल को सदर, अमीनाबाद, निगोहां, दो अप्रैल को कैसरबाग, तालकटोरा, बीकेटी से 118 लोग मिले। इन सबकी जांच में की ज्यादातर स्थानों से मिले जमातियों और छात्रों के सैंपल निगेटिव आए, लेकिन सदर में मिले जमातियों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद दो अप्रैल को आठ अति संवेदनशील सहित 12 हॉटस्पॉट बनाए गए।
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ढिलाई जिनकी वजह से बढ़ा संक्रमण सदर में हालात अलग थे, पर नहीं बनाई अलग से रणनीति कोरोना संक्रमित जमातियों के मिलने के बाद तीन अप्रैल से बड़ी संख्या में सैंपल कलेक्शन शुरू हुआ। रणनीति बनी कि पहले जमातियों के क्लोज कॉन्टेक्ट वाले ढूंढे जाएं। इसके लिए सभी जगह बराबर टीमें लगाई गईं, जबकि सदर में गोमतीनगर, तालकटोरा आदि से अलग हालात थे। यहां के लिए अलग प्रशासनिक रणनीति होनी चाहिए थी। हालांकि, रणनीति बदली गई, लेकिन तीन दिन बाद, तब तक संक्रमण फैल चुका था। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी दबी जुबान से स्वीकारते हैं कि यहां जब तक टीमों की सक्रियता शुरू हुई, संक्रमण हर परिवार को चपेट में ले चुका था।
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शुरुआती दौर में सैंपल लेने की गति धीमी रही सदर में शुरुआती दौर में सैंपल लेने की गति धीमी रही। जमातियों के मिलने के बाद दो अप्रैल को 21 सैंपल लिए गए। इनमें 12 जमाती पॉजिटिव मिले। तीन को 67 नमूने लिए गए, जिसमें 30 सदर के थे। चार से 10 अप्रैल तक शहर में सैंपल की संख्या 250 थी, जिसमें सदर के 25 फीसदी थे। 11 से सदर से रोजाना 50 से अधिक नमूने लिए गए तो मरीज भी बढ़ने लगे। 14 अप्रैल को लिए 160 सैंपल में 100 सदर के थे। इसकी रिपोर्ट 15 को आई तो पॉजिटिव मरीजों की संख्या 28 मिली। 15 अप्रैल के 150 सैंपलों की रिपोर्ट में भी 23 पॉजिटिव सदर के निकले। इसी तरह 16 अप्रैल को करीब 100 सैंपल में 6 पॉजिटिव, 17 अप्रैल को 60 सैंपल में 5 पॉजिटिव, 18 अप्रैल को 65 सैंपल में 2 पॉजिटिव, 19 अप्रैल को 30 सैंपल में 2 पॉजिटिव, 20 अप्रैल को 10 सैंपल मैं कोई नहीं, 21,22 व23 अप्रैल को लिए गए करीब 70 सैंपल में एक भी व्यक्ति पॉजिटिव नहीं मिला।
जमातियों के संक्रमित पाए जाते ही शुरू होना चाहिए था जागरूकता अभियान छह अप्रैल को 4,880 घरों का सर्वे किया गया, जिसमें करीब एक हजार सदर के थे। सात को 6,989 घरों में पांच सौ सदर के, 11 अप्रैल को 6867 घरों में एक हजार घोसियाना से सदर तक के थे। 12 को 6984 में उदयगंज एवं आसपास के एक हजार घरों का सैंपल लिया गया। यह भी माना जा रहा है यदि सदर में जमातियों के मिलते ही जागरूकता अभियान शुरू कर दिया होता तो संभव है कि संक्रमण बढ़ने से रुक जाता। घनी आबादी और छोटे घरों ने भी ऐसे निभाया बड़ा रोल क्या घनी आबादी भी संक्रमण फैलने में भूमिका निभाई, इस सवाल पर सेवानिवृत्त चिकित्सक डॉ. आरके सिंह कहते हैं कि निसंदेह सदर की बसावट घनी है। 300-400 वर्गफीट के मकान में 10 से 12 लोग रहते हैं। कई में तो 20 से 22 सदस्य हैं। ऐसे में एक के कोरोना की चपेट में आने से कई लोग संक्रमित हो गए। वहीं, अशिक्षा और जागरूकता न होने से हैंड हाइजीन और मास्क लगाने से परहेेज किया गया। अधिवक्ता महेंद्र सिंह यादव भी बताते हैं कि कसाईबाड़ा इलाका दो किमी के दायरे में है। लोगों के घर सटे हैं। छतें एक-दूसरे से लगी हैं। करीब 10 हजार आबादी वाले इलाके में ठेला लगाने, सब्जी बेचने वालों की संख्या भी ज्यादा है। ...और बन गई चेन कसाईबाड़ा में जमातियों के संपर्क में आए 65 वर्षीय बुजुर्ग का परिवार छोटे प्लॉट पर बने दो-दो कमरे वाले तीन मंजिला मकान में रहता है। इसमें रहने वाले नौ परिवारों में तीन को पहले लक्षण मिले, जबकि छह जांच में पॉजिटिव पाए गए। इस परिवार के मकान से सटे दाहिने तरफ के घर के भी सभी सदस्य पॉजिटिव मिले। इस तरह दो मकान से 16 लोग संक्रमित हो गए। वहीं, किराना कारोबारी के यहां सामान लेने आए व्यक्ति से संक्रमण मिला। इसके बाद परिवार की तीन महिलाओं सहित 10 लोग चपेट में आ गए। राहत : ज्यादातर में विकसित हो गई हर्ड इम्युनिटी एपिडमोलोजिस्ट डॉ. जीके सिंह कहते है कि सदर में ज्यादातर लोगों में हर्ड इम्युनिटी विकसित हो गई है। यहां बड़ी संख्या में लोग कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। उम्मीद है कि अब यहां मरीज नहीं बढ़ेंगे। संभव है कि इनसे आस-पास के इलाके में संक्रमण फैले। जैसा तोपखाना और घोसियाना में मरीजों के साथ हुआ। करेहटा में मिला मरीज भी सदर से ही संक्रमण लाया था। उम्मीद है कि जैसे-जैसे सभी इलाके में संक्रमण पहुंचेगा, यह खुद निष्क्रिय होने लगेगा।
संवेदनशील इलाके में निगरानी पहले एक-दो मरीज मिल रहे थे। सदर में मरीज बढ़ते ही वहां भी टीमें बढ़ाई गईं। संवेदनशील इलाके के हर परिवार तक टीम पहुंची है, जिनमें भी लक्षण मिले उनके सैंपल लिए गए। जो सीधे संपर्क में थे, उनके लक्षण न होने पर भी जांच कराई गई। विभाग लगातार सदर और उससे जुड़े घोसियाना, तोपखाना इलाके पर नजर रखे है। - डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, सीएमओ
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