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अलर्ट: प्रसव में देरी से बच्चों में हो रही हैं ये मुश्किलें

Thu, 03 Dec 2015 04:21 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 03 Dec 2015 04:21 PM IST
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delay in child delivery may lead to trouble in new born

प्रसव में देरी से 8 फीसदी बच्चे नि:शक्तता के शिकार हो जाते हैं। लोहिया अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. देवाशीष शुक्ला बताते हैं कि गर्भवती को प्रसव पीड़ा के बाद जब डिस्चार्ज शुरू हो जाता है तो प्रसव में देरी करने पर गर्भस्थ गंदा पानी पी लेता है।

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संक्रमण फैलने के बाद प्रसव होता है तो नवजात के दिमाग का विकास रुक जाता है। कई गंभीर मामलों में वो सुन और बोल भी नहीं पाता है और नि:शक्तता का शिकार हो जाता है।
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गर्भस्थ के गंदा पानी पीने को मेडिकल की भाषा में म्यूकोनियम कहा जाता है। डॉ. शुक्ला प्रसव पीड़ा के बाद तुरंत प्रसव की सलाह देते हैं।

केजीएमयू की स्पीच पैथोलॉजिस्ट सुहानी शर्मा बताती हैं कि नि:शक्तता से पीड़ित बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार और मिलजुल कर रहने से उनमें सकारात्मक सोच पैदा होती है और वो भी अन्य लोगों की तरह कुछ करना चाहते हैं।
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समाज स्पेशल चाइल्ड का पूरा साथ दे तो वो भी समाज की मुख्य धारा में जुड़ सकते हैं। सुहानी बताती हैं कि दिमागी बुखार भी नि:शक्तता का बड़ा कारण है। ऐसे में बुखार के इलाज के साथ कान और आंख की नियमित जांच करानी चाहिए।

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