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सीलन भरे घर में रहते हैं तो खतरे में है सेहत, पढ़ें खबर

Fri, 04 Sep 2015 12:48 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 04 Sep 2015 12:48 PM IST
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dampness is harmful for health

घरों और इमारतों में सीलन होना सेहत के लिए खतरनाक है। इस माहौल में फंगस और बैक्टीरिया पनपते हैं जो इंडोर प्रदूषण को बढ़ा रहे हैं। लखनऊ के वातावरण में इस किस्म के इंडोर प्रदूषण की मौजूदगी पर विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों की टीम ने अपनी रिपोर्ट जारी की है।

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इसमें बताया गया है कि आम शहरी दिन का 90 प्रतिशत समय इंडोर रहते हुए बिताते हैं, जिस दौरान हवा से होने वाले इन संक्रमण की चपेट में उसके आने की संभावना बनी रहती है।
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अपनी तरह की इस खास रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडोर प्रदूषण हमारे स्वास्थ्य के लिए ढेरों खतरे पैदा कर सकता है। जैसे-जैसे हमारी जीवन शैली शारीरिक मेहनत के बजाय दिमागी मेहनत से होने वाले कामों पर आधारित होने लगी है।
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हमारा करीब 90 प्रतिशत तक समय ऑफिस, कैंटीन और घरों के भीतर बीत रहा है। इन हालात में इंडोर प्रदूषण की स्थितियों को समझने के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च, साईंनाथ यूनिवर्सिटी रांची और सेंट्रल सॉइल सेलेनिटी रिसर्च इंस्टीट्यूट लखनऊ के वैज्ञानिकों व शोधार्थियों की टीम एएच खान, आशीष तिवारी और दिव्या साहनी द्वारा अध्ययन को अंजाम दिया गया।

अध्ययन के लिए घरों, इमारत और कैंटीनों से नमूने लिए गए। यहीं के आउट डोर सैंपल भी लिए गए। अध्ययनकर्ताओं इन इमारतों की पहचान जाहिर नहीं की है।

यहां जानें, क्या हैं खतरे...

dampness is harmful for health

अध्ययन में सामने आया कि सुबह के समय सूक्ष्मजीवियों की मौजूदगी कम थी। वहीं दोपहर के समय यह अधिकतम स्तर पर थी। सीलन भरे स्थानों पर मात्रा सर्वाधिक पाई गई।

वातावरण में इन सूक्ष्मजीवियों की संख्या बढ़ने पर वे ऐसे तत्व पैदा करते हैं जो हमारी सेहत के लिए खतरा हैं। इस अध्ययन में पाए गए बैक्टीरिया और फंगल प्रजातियां साइटोटॉक्सिक और इम्यूनोटॉक्सिक हैं।

पेनिसिलियम, एसपगिलस, अल्टरनारिया और क्लोडोस्पोलियम जैसी फंगल प्रजातियां हमें राइनाइटिस, अस्थमा और डर्मिटाइटिस जैसी बीमारियां हो सकती हैं। सिक बिल्डिंग सिंड्रोम (एसबीएस) भी इन्हीं में से एक है जिसकी वजह से शरीर के कोमल अंगों में खुजली, सिरदर्द, चक्कर आना, एकाग्रता कम होना, याददाश्त व बौद्धिक क्षमता कम होना और थकान जैसी समस्याएं पेश आती हैं।

एसी में लगे फिल्टर या एअर फिल्टर भी सूक्ष्म जीवियों के बढ़ने से हुए इंडोर प्रदूषण को नहीं हटा सकते। अध्ययकर्ताओं के अनुसार हाई-एफिशियंसी पार्टिक्यूलेट एअर फिल्टर (एचईपीए) भी 3 माइक्रॉन या उससे बड़े पार्टिकल हटाता है, लेकिन सूक्ष्म जीवी इससे कहीं छोटे होते हैं। बल्कि ये फिल्टर ही कई बार इन सूक्ष्म जीवियों के लिए वृद्धि करने का माध्यम बन जाते हैं।

नियंत्रण कैसे करें

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•घरों और इमारतों में वेंटीलेशन अच्छा हो
•प्राकृतिक तौर पर धूप को आने दिया जाए, किरणों में मौजूद पराबैंगनी किरणें सूक्ष्मजीवियों पर नियंत्रण रखती हैं।
•कमरों की सफाई लगातार की जाए।
•दीवारों पर लगी लकड़ी और कपड़े या वॉलपेपर को साफ रखा जाए। तो इस पर नियंत्रण किया जा सकता है।

आमतौर पर सूक्ष्म जीवी हमारी पर्यावरण में नियंत्रित ढंग से हमेशा मौजूद रहते हैं, इंडोर भी। लेकिन समस्या तब पैदा होती है जब किन्हीं वजहों से ये तेजी से वृद्धि करने लगते हैं।

इंडोर वातावरण में इनकी संख्या अत्यधिक बढ़ने के पीछे साफ सफाई की कमी, थर्मल इंसुलेशन न होना जिसमें खासतौर से धूप का भीतर न पहुंचना, वेंटीलेशन और क्रॉस वेंटीलेशन सही न होना और सीलन का लगातार बने रहना प्रमुख वजहें हैं।

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