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गोंडा में दलित हत्या का मामला: फर्जी अंगूठा लगा छह साल में 14 बार बदली जांच, शासन ने बैठाई उच्चस्तरीय जांच
Mon, 23 Oct 2023 07:55 AM IST
रोहित मिश्र
अशोक मिश्र, उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अशोक मिश्र, उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Mon, 23 Oct 2023 07:55 AM IST
सार
आयोग के आदेश के बाद डीजी सीबीसीआईडी ने डिप्टी एसपी प्रमोद कुमार को जांच सौंपी। पर यहां भी 8 जांच अधिकारी बदले गए। आईजी, सीबीसीआईडी ने 31 मई, 2022 को चार्जशीट मंजूर करते हुए शासन को भेज दिया।
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CRIME, क्राइम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गोंडा के तरबगंज इलाके में 2017 में दलित युवक की हत्या की जांच छह साल में फर्जी तरीके से 14 बार बदली गई। मृतक की पत्नी की ओर से फर्जी अंगूठा लगा आवेदन देकर जांच ट्रांसफर कराने का खेल चलता रहा और किसी को भनक तक नहीं लगी। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय में होने पर प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद ने डीजी सीबीसीआईडी को पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए। डीजी सीबीसीआईडी ने इस जांच का आदेश जारी कर दिया है।
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थाना तरबगंज में वादिनी सुंदरपति ने पति रमई की हत्या की एफआईआर 5 जून, 2017 को दर्ज कराई थी। इसमें राधेश्याम दुबे, विष्णुशंकर दुबे, कलूट व मोहर अली को नामजद किया था। मामले की जांच सबसे पहले सीओ तरबगंज को सौंपी गई। विवेचना के दौरान ही एसपी गोंडा के आदेश से जांच सीओ मनकापुर विजय आनंद को, इसके बाद सीओ तरबगंज ब्रह्म सिंह को मिल गई।
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बार-बार जांच बदलने की शिकायत राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग में हुई तो आईजी जोन गोरखपुर ने विवेचना बस्ती जिले के सीओ हरैया सतीश चंद्र शुक्ला को दी गई। इसके बाद क्रमश: बस्ती के सीओ कलवारी, बहराइच के सीओ नानपारा व सीओ बहराइच को जांच सौंपी गई। यह देख 27 अगस्त, 2018 को एससी-एसटी आयोग ने जांच सीबीसीआईडी से कराने का आदेश दिया।
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सीबीसीआईडी में भी होता रहा खेल
आयोग के आदेश के बाद डीजी सीबीसीआईडी ने डिप्टी एसपी प्रमोद कुमार को जांच सौंपी। पर यहां भी 8 जांच अधिकारी बदले गए। आईजी, सीबीसीआईडी ने 31 मई, 2022 को चार्जशीट मंजूर करते हुए शासन को भेज दिया। इस पर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई बार दबिश दी गई। लेकिन, कोई सफलता नहीं मिली तो आरोपियों की गिरफ्तारी का जिम्मा एएसपी रचना मिश्रा को दिया गया।
कुर्की-गिरफ्तारी का आदेश, फिर भी जारी रहा खेल
हैरानी की बात यह है आरोपियों के खिलाफ अदालत से गैर जमानती वारंट और कुर्की का आदेश होने के बावजूद शासन में सुंदरपति के फर्जी अंगूठे पर जांच अधिकारी बदलने का आवेदन किया गया। इसके बाद रचना मिश्रा से गिरफ्तारी का जिम्मा लेकर 30 मार्च, 2023 तक एक के बाद एक दो अन्य अधिकारियों को कमान सौंपी गई, पर किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई। सुंदरपति का आरोप है कि राजनीतिक दबाव की वजह से जिला पुलिस व सीबीसीआईडी के अफसर आरोपियों को बचा रहे हैं और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पूरी साजिश रच रहे हैं।