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Lucknow News: दादा मियां के पांच दिवसीय उर्स का आगाज कुरानख्वानी से आज
Thu, 26 Sep 2024 07:00 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Thu, 26 Sep 2024 07:00 AM IST
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लखनऊ। हजरत ख्वाजा मोहम्मद नबी रजा शाह दादा मियां के 117वें सालाना उर्स का आगाज बृहस्पतिवार को कुरानख्वानी की नूरानी महफिल से किया जाएगा। मॉल एवेन्यू स्थित दरगाह पर पांच दिवसीय उर्स में सैकड़ों जायरीन दरगाह पर हाजिरी देकर नजराना-ए-अकीदत पेश करेंगे।
दरगाह के सज्जादानशीन ख्वाजा मोहम्मद सबाहत हसन शाह ने पत्रकारों से बताया कि उर्स के पहले दिन बृहस्पतिवार को सुबह कुरानख्वानी और रात में मीलाद की महफिल सजेगी। इसके बाद तरही मुशायरा होगा। उर्स के दूसरे दिन शुक्रवार को शाम पांच बजे जिलाधिकारी की ओर से परंपरागत सरकारी चादर पेश की जाएगी। रात में हल्क-ए-जिक्र और महफिले समा का आयोजन होगा।
तीसरे दिन शनिवार को दिनभर जायरीनों की ओर से चादरपोशी का सिलसिला चलेगा। सुबह 10 बजे से दसवां अंतरराष्ट्रीय सेमिनार होगा। चौथे दिन रविवार को दरगाह पर सुबह कुल और रंग की महफिल होगी। उन्होंने बताया कि आखिरी दिन सोमवार शाम को दरगाह का गुस्ल होगा और संदल पेश किया जाएगा।
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भाईचारे और मोहब्बत का पैगाम देते थे दादा मियां
दादा मियां दरगाह के व्यवस्थापक फरहत हसन शाह ने बताया कि दादा मियां का जन्म इस्लामिक माह रबीउल अव्वल की 25 तारीख 1284 हिजरी (27 जुलाई 1867) को रामपुर के भैसोड़ी में हुआ था। दादा मियां अपने गुरु पीर मुर्शिद हजरत अब्दुल हई शाह जिनकी मजार बांग्लादेश में है, के आदेश पर 1895 के आसपास लखनऊ आए। वे यहां कैंट में जमींदार चुन्ने नसीर खां के घर ठहरे।
उन्होंने बताया कि मॉल एवेन्यू स्थित जिस जगह पर दादा मियां की दरगाह है, वे हर शाम यहां आकर बैठा करते थे। दादा मियां के मुरीदों की संख्या बढ़ने लगी। वे भाईचारे और मोहब्बत का पैगाम देते थे। उन्होंने बताया कि दादा मियां के मुरीद विदेशों तक में हैं, उनके मुरीदों की पहचान ये है कि वे सिर पर एक खास तरह की सफेद गोल टोपी लगाते हैं। उन्होंने बताया कि दादा मियां का इंतकाल 1909 में रबीउल अव्वल की 24 तारीख को हुआ था। इसी तारीख को दादा मियां का उर्स 117 साल से लगातार आयोजित किया जा रहा है। उनकी पैदाइश और देहांत का महीना एक ही होने की वजह से उर्स में दो कुल की महफिल सजाई जाती है।
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दरगाह के सज्जादानशीन ख्वाजा मोहम्मद सबाहत हसन शाह ने पत्रकारों से बताया कि उर्स के पहले दिन बृहस्पतिवार को सुबह कुरानख्वानी और रात में मीलाद की महफिल सजेगी। इसके बाद तरही मुशायरा होगा। उर्स के दूसरे दिन शुक्रवार को शाम पांच बजे जिलाधिकारी की ओर से परंपरागत सरकारी चादर पेश की जाएगी। रात में हल्क-ए-जिक्र और महफिले समा का आयोजन होगा।
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तीसरे दिन शनिवार को दिनभर जायरीनों की ओर से चादरपोशी का सिलसिला चलेगा। सुबह 10 बजे से दसवां अंतरराष्ट्रीय सेमिनार होगा। चौथे दिन रविवार को दरगाह पर सुबह कुल और रंग की महफिल होगी। उन्होंने बताया कि आखिरी दिन सोमवार शाम को दरगाह का गुस्ल होगा और संदल पेश किया जाएगा।
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भाईचारे और मोहब्बत का पैगाम देते थे दादा मियां
दादा मियां दरगाह के व्यवस्थापक फरहत हसन शाह ने बताया कि दादा मियां का जन्म इस्लामिक माह रबीउल अव्वल की 25 तारीख 1284 हिजरी (27 जुलाई 1867) को रामपुर के भैसोड़ी में हुआ था। दादा मियां अपने गुरु पीर मुर्शिद हजरत अब्दुल हई शाह जिनकी मजार बांग्लादेश में है, के आदेश पर 1895 के आसपास लखनऊ आए। वे यहां कैंट में जमींदार चुन्ने नसीर खां के घर ठहरे।
उन्होंने बताया कि मॉल एवेन्यू स्थित जिस जगह पर दादा मियां की दरगाह है, वे हर शाम यहां आकर बैठा करते थे। दादा मियां के मुरीदों की संख्या बढ़ने लगी। वे भाईचारे और मोहब्बत का पैगाम देते थे। उन्होंने बताया कि दादा मियां के मुरीद विदेशों तक में हैं, उनके मुरीदों की पहचान ये है कि वे सिर पर एक खास तरह की सफेद गोल टोपी लगाते हैं। उन्होंने बताया कि दादा मियां का इंतकाल 1909 में रबीउल अव्वल की 24 तारीख को हुआ था। इसी तारीख को दादा मियां का उर्स 117 साल से लगातार आयोजित किया जा रहा है। उनकी पैदाइश और देहांत का महीना एक ही होने की वजह से उर्स में दो कुल की महफिल सजाई जाती है।