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डेटिंग साइट का इस्तेमाल करने वाले सावधान: इन साइटों पर साइबर अपराधी बना रहे ठिकाना

Mon, 25 Apr 2022 05:41 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 25 Apr 2022 05:41 PM IST
सार

मैट्रीमोनियल और डेटिंग साइट पर एक छोटी सी नादानी आपको शर्मनाक स्थिति में डाल सकती है। ये साइटें साइबर अपराधियों का पसंदीदा ठिकाना बनी हुई हैं। पढ़ें एक रिपोर्ट:

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cyber criminals on dating and matrimonial sites.
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock

विस्तार

मैट्रीमोनियल और डेटिंग साइट का इस्तेमाल कर रहे हैं तो सावधान रहें। एक छोटी सी नादानी या तो आपका बैंक अकाउंट खाली कर देगी या आपको किसी शर्मनाक स्थिति में डाल देगी। ये दोनों साइटें आजकल साइबर अपराधियों का पसंदीदा ठिकाना बनी हुई हैं।

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यूपी पुलिस के साइबर एडवाइजर के मुताबिक हर माह कम से कम दो लड़कियां व दो लड़के ऐसी शिकायत लेकर उनके पास आ रहे हैं। दरअसल, साइबर अपराधियों ने कुछ समय पहले तक व्हाट्सएप वीडियो कॉल करके लोगों को ब्लैकमेल करना और उनसे फिरौती वसूलने का तरीका अपनाया था। उसमें जागरूकता बढ़ी तो साइबर अपराधियों ने तरीके भी बदल दिए।
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आपबीती-1: 1.5 करोड़ की अंगूठी का मिला झांसा
मेरे माता-पिता ने मेरा रजिस्ट्रेशन मेट्रीमोनियल साइट पर कराया था। एक लड़के का प्रपोजल आया और बातचीत शुरू हुई। एनआरआई का प्रस्ताव था, माता-पिता को पसंद आया। धीरे-धीरे बातचीत का सिलसिला बढ़ता गया। उसकी ओर से कहा गया कि वह मुझे 1.5 करोड़ की एक अंगूठी गिफ्ट भेज रहा है। मुझे महज बातचीत के आधार पर इतना बड़ा गिफ्ट लेने में संकोच हुआ। परिवार के लोगों से चर्चा की, साइबर एक्सपर्ट की सलाह ली। दरअसल, अंगूठी रिसीव करने से पहले कुछ कस्टम ड्यूटी के तौर पर पे करना था। हम लोगों ने बाद में पड़ताल की तो पता चला कि वो आईडी फर्जी है और एक तरह का साइबर फ्रॉड है। (गोमती नगर निवासी एक युवती की आपबीती)
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आपबीती-2: डेट के चक्कर में शर्मनाक हालात से घिरा
मैं एक स्टूडेंट हूं, ज्यादातर समय मोबाइल फोन पर बीतता है। गेम खेलते-खेलते एक दिन मैं डेटिंग साइट पर चला गया। जैसे-जैसे दिन बीता, मुझे उसमें मजा आने लगा। रोमांस के फितूर से होते हुए मैं डेट के फितूर में फंसा। अचानक मुझे मेरी कुछ फोटो मिलती है, जिससे मुझे पता चलता है कि मैं एक शर्मनाक हालात से घिर गया हूं। मैं रिर्पोट नहीं कराना चाहता था। मैं साइबर एक्सपर्ट से मिला और उनकी मदद से मैं इस चंगुल से बाहर आ पाया। (आलमबाग निवासी एक युवक की आपबीती)

बढ़ रहे मामले, कई केस तो रिपोर्ट ही नहीं होते

यूपी पुलिस के साइबर एडवाइजर राहुल मिश्रा कहते हैं कि मेट्रीमोनियल या डेटिंग साइट हो या फिर वीडियो काल के जरिये ब्लैकमेलिंग। अक्सर लोग अपनी नादानी के कारण ऐसी स्थिति में फंस जाते हैं कि वे किसी से सच बताने में भी शर्म महसूस करते हैं। छह महीने में रिपोर्ट हुए मामलों में 12 मामले ऐसे हैं, जिसमें लड़कियां मेट्रीमोनियल साइट के जरिये ठगी गई हैं। आठ ऐसे मामले हैं, जिसमें युवक डेटिंग एप पर सक्रियता के चलते अपराधियों के चंगुल में फंसे हैं। किसी ने 70 तो किसी ने 80 हजार रुपये खर्च भी कर दिए।

वीडियो कॉल से ब्लैकमेलिंग घटी
राहुल मिश्रा कहते हैं कि साइबर अपराध से बचने में जागरूकता एक बड़ा हथियार है। व्हाट्सएप वीडियो कॉल से ब्लैकमेलिंग के घटते मामले इसी का नतीजा है। पहले हर रोज तीन मामले रिपोर्ट हो रहे थे, अब 10 दिन में एक  मामला आता है।

करें क्या, कैसे बचें
मेट्रीमोनियल व डेटिंग साइट के जरिये जिस किसी के संपर्क में भी आ रहे हैं, पहले भौतिक सत्यापन करें। सोशल मीडिया पर दी गई प्रोफाइल देख कर विश्वास न करें, क्योंकि वहां सबकुछ सच नहीं होता। झांसा देने के लिए बहुत कुछ गढ़ा जाता है। इसके अलावा गिफ्ट रिसीव करने के लिए कुछ देना पड़े तो कतई कदम आगे न बढ़ाएं। यदि कोई आपको गिफ्ट दे रहा होगा, तो बदले में कुछ नहीं लेगा।

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