आज़म के लिए 20.44 करोड़ की सरकारी संपत्ति 1000 रुपए की बनी!
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने यह दावा किया है कि मुस्लिम समुदाय को अपनी आबादी के हिसाब से सरकारी योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है और उनके द्वारा मुस्लिम समुदाय के उत्थान के लिए अल्पसंख्यक विभाग के मौलाना जौहर अली शोध संस्थान रामपुर एक निजी संस्था मौलाना जौहर अली ट्रस्ट लीज पर दी गयी है।
सरकार का यह कथन सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आज़म खान द्वारा बिना किसी नियम, शर्त और प्रक्रिया के अपने ही ट्रस्ट को सरकार की बेशकीमती भूमि और भवन देने के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच में दायर पीआईएल में अल्पसंख्यक कल्याण सचिव एस पी सिंह के हलफनामे में आया है।
करोड़ों की संपत्ति आजम को मिली 100 रुपए किराए में
बकौल नूतन, सरकार ने कोर्ट को बताया है कि मुख्यमंत्री की घोषणा पर 1.4 लाख वर्ग फीट और 20.44 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी संपत्ति को 1000 रूपये के सांकेतिक मूल्य का मान कर 100 रूपये के वार्षिक किराये पर 33 साल के लीज पर दे दिया गया है जो 02 बार 33-33 साल के लिए बढाया जा सकता है।
सरकार ने ऐसा करने का कारण यह बताया है कि चूँकि सरकार का शोध संस्थान काम नहीं कर पा रहा था और आज़म खान के ट्रस्ट के भी वही उद्देह्य थे, अतः यह संस्थान आज़म खान के ट्रस्ट को चलाने को दे दिया गया।
नूतन ने पीआईएल में आरोप लगाया है कि यह लीज सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सौरभ गांगुली, सुभाष घई और कुशाभाई ठाकरे ट्रस्ट मामलों में प्रतिपादित सिद्धांतों की अवहेलना करते हुए दी गई है।