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बच्चे की पीठ से जुड़े अविकसित बच्चे को किया अलग
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केजीएमयू में एक ढाई महीने के बच्चे को जीवनभर की विकृति से निजात दिलाई गई। इस बच्चे की पीठ पर पूरी तरह विकसित हाथ-पैर थे, जो सक्रिय भी थे। इसकी पीठ भी विकसित हो चुकी थी। इसकी वजह से बच्चा सिर्फ पेट के बल ही लेट सकता था। जरूरी जांच के बाद बच्चे की सर्जरी कर अविकसित जुड़वां बच्चे का शरीर अलग कर दिया गया। बच्चा अब पूरी तरह से सामान्य है तथा मंगलवार को उसे अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई।
सीतापुर के चिरासी गांव निवासी सुशील यादव की पत्नी प्रीति ने 25 अगस्त को एक बच्चे को जन्म दिया था। उनके अनुसार बच्चे की पीठ पर हाथ-पैर और दूसरी पीठ भी विकसित हो चुकी थी। एक प्रकार से ये जुड़वा बच्चे थे, लेकिन दूसरे बच्चे का सिर नहीं बना था। कमलापुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से उनको केजीएमयू भेजा गया। केजीएमयू के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. जेडी रावत की निगरानी में बच्चे को भर्ती किया गया। प्रो. रावत ने उसकी जांच करने के बाद तीन नवंबर को ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के बाद उसे निगरानी में रखा गया। हालत सामान्य होने पर मंगलवार को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इस ऑपरेशन में प्रो. जेडी रावत के साथ ही एनेस्थीसिया के डॉ. संतोष कुमार तथा सिस्टर वंदना और अंजू ने सहयोग किया।
दो घंटे चला ऑपरेशन
प्रो. जेडी रावत ने बताया कि ऑपरेशन करने से पहले एमआरआई के माध्यम से देखा गया कि दोनों बच्चे किस तरह से आपस में जुड़े हैं। जांच रिपोर्ट में पता चला कि बच्चा निचली रीढ़ तथा नसों के साथ जुड़ा हुआ था, इसलिए वहीं से उसे सावधानीपूर्वक अलग किया गया। उसकी पीठ के निचले हिस्से पर टांके लगाए गए हैं जो जल्द ही भर जाएंगे।
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सीतापुर के चिरासी गांव निवासी सुशील यादव की पत्नी प्रीति ने 25 अगस्त को एक बच्चे को जन्म दिया था। उनके अनुसार बच्चे की पीठ पर हाथ-पैर और दूसरी पीठ भी विकसित हो चुकी थी। एक प्रकार से ये जुड़वा बच्चे थे, लेकिन दूसरे बच्चे का सिर नहीं बना था। कमलापुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से उनको केजीएमयू भेजा गया। केजीएमयू के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. जेडी रावत की निगरानी में बच्चे को भर्ती किया गया। प्रो. रावत ने उसकी जांच करने के बाद तीन नवंबर को ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के बाद उसे निगरानी में रखा गया। हालत सामान्य होने पर मंगलवार को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इस ऑपरेशन में प्रो. जेडी रावत के साथ ही एनेस्थीसिया के डॉ. संतोष कुमार तथा सिस्टर वंदना और अंजू ने सहयोग किया।
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दो घंटे चला ऑपरेशन
प्रो. जेडी रावत ने बताया कि ऑपरेशन करने से पहले एमआरआई के माध्यम से देखा गया कि दोनों बच्चे किस तरह से आपस में जुड़े हैं। जांच रिपोर्ट में पता चला कि बच्चा निचली रीढ़ तथा नसों के साथ जुड़ा हुआ था, इसलिए वहीं से उसे सावधानीपूर्वक अलग किया गया। उसकी पीठ के निचले हिस्से पर टांके लगाए गए हैं जो जल्द ही भर जाएंगे।
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