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बदमाश बोले, शांति से काम करने आए थे
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विकल्प खंड तीन निवासी खाद्य एवं रसद विभाग के सीनियर मार्केटिंग इंस्पेक्टर उदय प्रताप सिंह के मकान में धावा बोलने वाले बदमाश बेखौफ थे। इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि यहां कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के आवास हैं। कुछ अधिकारी तो यहां रहते भी हैं। इसके बावजूद बदमाशों का धावा बोलने का दुस्साहस किया। यही नहीं बदमाश जाते-जाते उदय प्रताप से कहा भी कि अगर आप विरोध न करते तो इतनी भी चोट न आती।
एसीपी विभूति खंड स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया कि उदय प्रताप पहली मंजिल के कमरे में सो रहे थे, जबकि पत्नी मनीषा और बेटा आयुष भूतल पर अलग-अलग कमरों में थे। रात दो से तीन बजे के बीच घर के घुसे बदमाशों ने मनीषा और आयुष के कमरों की कुंडी बाहर से बंद की और दूसरे कमरों की अलमारियां खंगालने लगे। यहां से जेवर-नकदी समेटकर बदमाश पहली मंजिल पर पहुंचे और वहां की अलमारियां खोलकर सामान उलटने लगे। इस दौरान आहट से उदय प्रताप की नींद खुल गई। वह अंधेरे में ही बदमाशों से भिड़ गए। मारपीट में एक बदमाश के चाकू से उनका बायां हाथ बुरी तरह चोटिल हो गया। बदमाश उन्हें धक्का देकर नीचे भागे और बरामदे में खड़ी बाइक से फुर्र हो गए।
चिनहट कोतवाली के इंस्पेक्टर धनंजय पांडेय ने बताया कि उदय प्रताप के छोटे भाई इंदिरानगर की शिवपुरी कॉलोनी निवासी संतोष कुमार सिंह की तरफ से एफआईआर दर्ज कर बदमाशों की तलाश की जा रही है।
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ऐसा लगा जैसे बदमाश जान ले लेंगे
उदय प्रताप ने बताया कि बदमाशों को देखकर वह उन पर टूट पड़े थे। हालांकि, बदमाशों की संख्या ज्यादा थी इसलिए वह ज्यादा देर नहीं टिक सके। बदमाशों ने जब उन पर चाकू चलाया तो वह बुरी तरह सहम गए। उन्हें लगा कि जैसे बदमाश जान ले लेंगे। उदय प्रताप शांत हो गए। उन्होंने बदमाशों से कहा कि ऊपर कुछ भी नहीं है। जो भी रुपये या जेवर हैं, वह नीचे के कमरों में ही रखे हैं। कमरे की अलमारियाें की तलाशी लेने के बाद बदमाशों को वहां कुछ नहीं मिला। जाते-जाते बदमाश उनसे कह गए कि वह शांति से अपना काम करने आए थे। अगर आप विरोध न करते तो इतनी भी चोट न आती।
पुलिस ने पूछा तो कुछ बताने के बजाय रोने लगीं मनीषा
वारदात से उदय प्रताप की पत्नी मनीषा इतनी दहशत में थीं कि वह कुछ बोल नहीं पा रही थीं। उदय प्रताप अपने घाव की मरहम-पट्टी कराने अस्पताल गए थे इसलिए अधिकारियों ने घटना के बारे में जानकारी के लिए मनीषा से संपर्क किया। वह कुछ बताने के बजाए रोने लगीं। उन्होंने कहा कि बदमाशों के शोरगुल से घबराकर खुद को बाथरूम में बंद कर लिया था। बदमाश क्या-क्या सामान ले गए, यह पूछने पर वह कुछ स्पष्ट नहीं बता सकीं। कभी उन्होंने एक लाख रुपये कहा तो कभी दो लाख रुपये और जेवर।
सीसीटीवी कैमरा देख चौकन्ने बदमाश डीवीआर भी ले गए
उदय प्रताप सिंह के घर के मेन गेट पर सीसीटीवी कैमरा लगा है। बदमाशों ने गेट फांदकर भीतर आते वक्त कैमरा देख लिया था और चौकन्ने हो गए थे। उन्होंने जेवर-नकदी के साथ ही सीसीटीवी कैमरे का डीवीआर भी उठा लिया और साथ ले गए। पुलिस जब मौके पर पहुंची तो सीसीटीवी कैमरा देखकर बदमाशों की पहचान की उम्मीद जगी लेकिन डीवीआर न मिलने से निराश हो गई।
आईएएस-आईपीएस अधिकारियों के घर फिर भी कॉलोनी में गश्त नहीं
कॉलोनी के लोगों ने बताया कि एक न्यायाधिकारी के अलावा आईएएस उमेश सिंह, आईपीएस व संयुक्त पुलिस आयुक्त नीलाब्जा चौधरी, डिप्टी एसपी संतोष सिंह, एलडीए के संयुक्त सचिव जेएस शुक्ला समेत अन्य अधिकारी यहां रहते हैं। कॉलोनी में कई प्लॉट खाली पड़े हैं जहां झाड़ियां और पेड़ उग आए हैं। इन झाड़ियों और पेड़ों की आड़ में बदमाश वारदात के लिए खुद को छिपा सकते हैं। लोगों का कहना था कि पुलिस कॉलोनी में गश्त भी नहीं करती है जिससे किसी भी दिन बड़ी अनहोनी सामने आ सकती है।
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एसीपी विभूति खंड स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया कि उदय प्रताप पहली मंजिल के कमरे में सो रहे थे, जबकि पत्नी मनीषा और बेटा आयुष भूतल पर अलग-अलग कमरों में थे। रात दो से तीन बजे के बीच घर के घुसे बदमाशों ने मनीषा और आयुष के कमरों की कुंडी बाहर से बंद की और दूसरे कमरों की अलमारियां खंगालने लगे। यहां से जेवर-नकदी समेटकर बदमाश पहली मंजिल पर पहुंचे और वहां की अलमारियां खोलकर सामान उलटने लगे। इस दौरान आहट से उदय प्रताप की नींद खुल गई। वह अंधेरे में ही बदमाशों से भिड़ गए। मारपीट में एक बदमाश के चाकू से उनका बायां हाथ बुरी तरह चोटिल हो गया। बदमाश उन्हें धक्का देकर नीचे भागे और बरामदे में खड़ी बाइक से फुर्र हो गए।
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चिनहट कोतवाली के इंस्पेक्टर धनंजय पांडेय ने बताया कि उदय प्रताप के छोटे भाई इंदिरानगर की शिवपुरी कॉलोनी निवासी संतोष कुमार सिंह की तरफ से एफआईआर दर्ज कर बदमाशों की तलाश की जा रही है।
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ऐसा लगा जैसे बदमाश जान ले लेंगे
उदय प्रताप ने बताया कि बदमाशों को देखकर वह उन पर टूट पड़े थे। हालांकि, बदमाशों की संख्या ज्यादा थी इसलिए वह ज्यादा देर नहीं टिक सके। बदमाशों ने जब उन पर चाकू चलाया तो वह बुरी तरह सहम गए। उन्हें लगा कि जैसे बदमाश जान ले लेंगे। उदय प्रताप शांत हो गए। उन्होंने बदमाशों से कहा कि ऊपर कुछ भी नहीं है। जो भी रुपये या जेवर हैं, वह नीचे के कमरों में ही रखे हैं। कमरे की अलमारियाें की तलाशी लेने के बाद बदमाशों को वहां कुछ नहीं मिला। जाते-जाते बदमाश उनसे कह गए कि वह शांति से अपना काम करने आए थे। अगर आप विरोध न करते तो इतनी भी चोट न आती।
पुलिस ने पूछा तो कुछ बताने के बजाय रोने लगीं मनीषा
वारदात से उदय प्रताप की पत्नी मनीषा इतनी दहशत में थीं कि वह कुछ बोल नहीं पा रही थीं। उदय प्रताप अपने घाव की मरहम-पट्टी कराने अस्पताल गए थे इसलिए अधिकारियों ने घटना के बारे में जानकारी के लिए मनीषा से संपर्क किया। वह कुछ बताने के बजाए रोने लगीं। उन्होंने कहा कि बदमाशों के शोरगुल से घबराकर खुद को बाथरूम में बंद कर लिया था। बदमाश क्या-क्या सामान ले गए, यह पूछने पर वह कुछ स्पष्ट नहीं बता सकीं। कभी उन्होंने एक लाख रुपये कहा तो कभी दो लाख रुपये और जेवर।
सीसीटीवी कैमरा देख चौकन्ने बदमाश डीवीआर भी ले गए
उदय प्रताप सिंह के घर के मेन गेट पर सीसीटीवी कैमरा लगा है। बदमाशों ने गेट फांदकर भीतर आते वक्त कैमरा देख लिया था और चौकन्ने हो गए थे। उन्होंने जेवर-नकदी के साथ ही सीसीटीवी कैमरे का डीवीआर भी उठा लिया और साथ ले गए। पुलिस जब मौके पर पहुंची तो सीसीटीवी कैमरा देखकर बदमाशों की पहचान की उम्मीद जगी लेकिन डीवीआर न मिलने से निराश हो गई।
आईएएस-आईपीएस अधिकारियों के घर फिर भी कॉलोनी में गश्त नहीं
कॉलोनी के लोगों ने बताया कि एक न्यायाधिकारी के अलावा आईएएस उमेश सिंह, आईपीएस व संयुक्त पुलिस आयुक्त नीलाब्जा चौधरी, डिप्टी एसपी संतोष सिंह, एलडीए के संयुक्त सचिव जेएस शुक्ला समेत अन्य अधिकारी यहां रहते हैं। कॉलोनी में कई प्लॉट खाली पड़े हैं जहां झाड़ियां और पेड़ उग आए हैं। इन झाड़ियों और पेड़ों की आड़ में बदमाश वारदात के लिए खुद को छिपा सकते हैं। लोगों का कहना था कि पुलिस कॉलोनी में गश्त भी नहीं करती है जिससे किसी भी दिन बड़ी अनहोनी सामने आ सकती है।