यूपी: मुख्तार के बाद अब क्या अतीक की बारी, जानिए 10वीं फेल कैसे बना इतना बड़ा अपराधी
- संसदीय कार्य राज्यमंत्री आनंद स्वरूप शुक्ल ने मुख्तार के बाद अब दिए अतीक की वापसी के संकेत
- अतीक अहमद ने मात्र 17 साल की उम्र में अपराध की दुनिया में रखा था कदम
- अपराध जगत में सने तीन दशक तक इलाहाबाद, फूलपुर और चित्रकूट में गिरोह चलाया
विस्तार
माफिया मुख्तार अंसारी को 806 दिनों बाद तमाम रुकावटों के बाद पंजाब की रोपड़ जेल से लाकर बांदा की जेल में शिफ्ट कर दिया गया है। जहां उस पर लखनऊ से निगरानी की जा रही है। मुख्तार को बांदा जेल में रखने के लिए बुधवार सुबह उसके पहुंचने से पहले ही प्रशासन ने अभेद्य सुरक्षा प्रबंध कर लिए थे। वह लगातार अत्याधुनिक कैमरों की निगरानी में है।
इसी बीच उत्तर प्रदेश के संसदीय कार्य राज्यमंत्री आनंद स्वरूप शुक्ल का एक बयान सामने आया है जिसमें वह कह रहे हैं कि मुख्तार अंसारी को पंजाब से लाने के बाद अब गुजरात की जेल में बंद अतीक अहमद को लाया जाएगा। उनके इस बयान के बाद कहा जा रहा है कि यूपी सरकार का अगला निशाना अब अतीक अहमद होगा। अतीक को लेकर मंत्री का कहना है कि उसने जनता को परेशान किया है। लोग उसे सजा दिलाना चाहते हैं।
अतीक अहमद ने मात्र 17 साल की उम्र में अपराध की दुनिया में कदम रखा था। उसके पिता फिरोज इलाहाबाद स्टेशन पर तांगा चलाते थे। उन्होंने किसी तरह अतीक को पढ़ाया लेकिन हाईस्कूल में फेल होने के बाद अतीक ने पढ़ाई छोड़ दी और जल्दी अमीर बनने के लिए अपराध की दुनिया में कदम रखा।
अपराध जगत में उसकी शुरुआत 1979 में इलाहाबाद में एक हत्या से हुई थी जिसके बाद उसने तीन दशक तक इलाहाबाद, फूलपुर और चित्रकूट में गिरोह चलाया। इस दौरान ही उसकी इंट्री राजनीति में हो गई। उसने वर्ष 2004 तक छह बार चुनाव जीता। वह पांच बार इलाहाबाद पश्चिम सीट से विधायक और एक बार फूलपुर लोकसभा सीट से सांसद रहा। निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राजनीति शुरू करने वाला अतीक बाद में सपा में शामिल हो गया और फिर अपना दल में चला गया था।
अतीक अहमद ने 2004 में सपा के टिकट पर जीत दर्ज की। हालांकि, 2014 में उसे असफलता हाथ लगी। इसके बाद 2018 के लोकसभा उपचुनाव में भी उसे हार का सामना करना पड़ा था।
यूपी की जेल में रखने के लिए तैयार नहीं थे अफसर
अतीक अहमद को बरेली जेल में रखा गया था। उसका खौफ ऐसा था कि जेल की सुरक्षा करने वाले अफसरों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा था। जेल अधीक्षक ने उसे किसी अन्य जेल में शिफ्ट करने की सिफारिश की। हाल ये था कि यूपी की कोई भी जेल उसे रखने के लिए तैयार नहीं थी। अप्रैल 2019 में अतीक को पहले देवरिया फिर नैनी जेल भेजा गया। आखिरकार 3 जून 2019 को सुप्रीम कोर्ट कोर्ट के आदेश पर उसे गुजरात की साबरमती जेल भेज दिया गया तब से वह वहीं पर है।
मुख्तार को यूपी लाए जाने के बाद अब कहा जा रहा है कि अतीक अहमद को भी यूपी की जेल में वापस लाया जाएगा। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर अभी कोई कार्रवाई शुरू नहीं हुई है।