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एलडीए के 'नटरवाल' बाबू के आगे वीसी की तरकीब भी हुई फेल
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 22 Jul 2017 12:51 AM IST
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एलडीए के नटवर लाल बाबू मुक्तेश्वर नाथ ओझा
- फोटो : amar ujala
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नटवरलाल बाबू मुक्तेश्वर नाथ ओझा के मामले में एलडीए वीसी पीएन सिंह ने साफ किया कि उनका मकसद बाबू को जेल भेजवाना नहीं था। बाबू को जेल भेजने का डर दिखार उससे आवंटियों की करीब 150 फाइलें वापस लेना था। जब उसने फाइलें वापस नहीं की तो बुधवार को देर रात एफआईआर कराई गई। अब पुलिस अपनी कानूनी कार्यवाही कर रही है।
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वीसी ने यह भी कहा कि एलडीए से जुड़े लोग जानते हैं कि ओझा किस तरह का लिपिक है? 150 से अधिक फाइलें गुम करने केआरोपी को पहले जेल भेजने का विचार नहीं था। हम ऐसा कर भी नहीं सकते हैं। हम इसके लिए अधिकृत भी नहीं हैं।
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वीसी ने बताया कि पुलिस के जांच अधिकारी शुक्रवार को एलडीए आए। उनको साक्ष्य के रूप में रिकॉर्ड ओएसडी राजेश शुक्ला ने उपलब्ध करा दिए हैं। अब यह पुलिस के हाथ में है कि वह कानून के मुताबिक आरोपी के खिलाफ उचित कार्रवाई करे। विभागीय कार्यवाही ओझा बाब केखिलाफ चल रही है। इस जांच को जल्दी ही तार्किक परिणाम के साथ पूरा कर लिया जाएगा।
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वीसी ने बताया कि मुझे पता चला है कि बाबू के खिलाफ विजिलेंस में भी एक जांच चल रही है। इस जांच तेज करने के लिए मैंने खुद एसपी विजिलेंस से बात की है। यह जांच प्रियदर्शिनी योजना में 31 भूखंडों के अनियमित समायोजन और आवंटन के मामले में चल रही है।
एलडीए के जानकारों का कहना है कि जिस तरह विजिलेंस की जांच और पुलिस की जांच में प्राधिकरण ने बाबू की घेराबंदी की है। ऐसे में जांच पूरी होने पर उसका जेल जाना तय है। इसके साथ ही आरोप तय होने पर एलडीए ओझा बाबू की सेवाएं ही खत्म करने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।