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फर्जी नियुक्ति पत्र दिए: सचिवालय, यूपी पुलिस और रेलवे में नौकरी के नाम पर 1.18 करोड़ रुपये ठगे, एसटीएफ के हत्थे चढ़ा
Mon, 09 May 2022 12:04 AM IST
ishwar ashish
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 09 May 2022 12:04 AM IST
सार
एसटीएफ ने सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले को गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ पीड़ित ने विभूतिखंड थाने में मामला दर्ज करवाया था।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : istock
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विस्तार
एसटीएफ की टीम ने शनिवार रात को सचिवालय, यूपी पुलिस और रेलवे में नौकरी के नाम पर ठगने वाले जौनपुर निवासी दिलीप राय बलवानी को गिरफ्तार किया है। ठग ने 10 लोगों से 1.18 करोड़ रुपये ऐंठे हैं। कुछ पीड़ितों को जाली नियुक्ति पत्र भी दिए थे। आरोपित के पास से सचिवालय के 11 फर्जी नियुक्ति पत्र, मोहर, पांच मोबाइल फोन और एक एसयूवी बरामद हुआ। एक पीड़ित ने विभूतिखंड थाने में शिकायत की थी। आरोपित का भाई भी ठग है, उसकी तलाश की जा रही है।
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एसटीएफ के प्रभारी एसएसपी विशाल विक्रम सिंह के मुताबिक, हजरतगंज के नरही निवासी सुरेंद्र कुमार यादव ने जालसाजी की शिकायत की थी। सुरेंद्र के मुताबिक, मार्च 2021 में एक कार्यक्रम के दौरान उनकी मुलाकात दिलीप राय बलवानी से हुई थी। दिलीप ने बताया था कि उसका दफ्तर विभूतिखंड में है। उसने ऊंची पहुंच का हवाला देते हुए कहा था कि सचिवालय, रेलवे और यूपी पुलिस में नौकरी दिलवा सकता है। इसके बाद सुरेंद्र ने दस रिश्तेदारों को अलग-अलग सरकारी विभाग में नौकरी दिलाने की बात कही।
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सुरेंद्र के अनुसार, सचिवालय में नौकरी के नाम पर 10 लाख, रेलवे में पांच लाख रुपये और यूपी पुलिस में दरोगा की नौकरी के नाम पर पांच लाख की डिमांड की। सुरेंद्र ने बताया कि कुल 1.18 करोड़ रुपये जालसाज दिलीप को दे दिए। इसके बाद आरोपित ने कुछ युवकों को फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिया। इसकी जानकारी होने पर सुरेंद्र ने रकम वापस मांगी।
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आरोपित के टालमटोल करने पर सुरेंद्र ने शनिवार को विभूतिखंड थाने में मुकदमा दर्ज कराया। तत्काल कार्रवाई करते हुए रात में यूपी एसटीएफ ने दिलीप को विभूतिखंड इलाके से गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आरोपित ने कुबूला कि वह अपने भाई मंजीत संग मिलकर सैकड़ों बेरोजगारों से करोड़ों रुपये ठग चुका है। मंजीत फर्जी नियुक्ति पत्र बनाता था। दिलीप पहले भी धोखाधड़ी के मामले में जेल जा चुका है। उसके खिलाफ लखनऊ और उरई जनपद में इस तरह के 10 मामले दर्ज हैं।