यादव सिंह मामले में घिरे अखिलेश, कोर्ट ने मांगा जवाब
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यादव सिंह के काले कारनामों का चिट्ठा हाईकोर्ट तक पहुंच गया। इस मामले पर अखिलेश सरकार की खामोशी का ही नतीजा है कि हाईकोर्ट को जवाब मांगना पड़ा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मंगलवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यादव सिंह से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में अखिलेश सरकार से जवाब तलब किया।
कोर्ट ने राज्य के प्रमुख सचिव, गृह से पूछा कि यादव सिंह का करोड़ों का घोटाला उजागर हो जाने के बाद सरकार ने क्या कदम उठाए।
कोर्ट ने सरकारी दामाद के नाम से पहचाने जाने वाले नोएडा अथॉरिटी के चीफ इंजीनियर यादव सिंह को पक्षकार बनाए जाने की भी मंजूरी दे दी। मुख्य न्यायाधीश धनंजय यशवंत, चंद्रचूड़ और जस्टिस मनोज मिश्र की खंडपीठ ने ये आदेश दिया।
मामले के लिए सीबीआई जांच की मांग उठी
मामले में याचिकाकर्ता के वकील अशोक पांडेय ने कोर्ट से सीबीआई जांच कराने का भी आग्रह किया। जनहित याचिका में कहा गया कि यादव सिंह से जुड़े घोटाले में सरकार की निष्क्रियता साफ नजर आ रही है।
याचिका में यह भी कहा गया कि यादव सिंह को मुलायम, मायावती और अखिलेश के शासनकाल में राजनेताओं और बड़े अधिकारियों का पूरी तरह संरक्षण दिया गया इसलिए सीबीआई जांच बेहद जरूरी है।
याचिका में मांग की गई कि एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में न्यायिक समिति बनाई जाए जो इस मामले की तफ्तीश करे। सुनवाई के बाद कोर्ट ने सभी संबध पक्षों को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी तय की है।