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एलडीए के अफसरों का भ्रष्टाचारः फ्लैट बनाए, घपला था तो बेचना ‘भूल गए’, अब हो गई ये हालत

Wed, 25 Sep 2019 04:45 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Wed, 25 Sep 2019 04:45 PM IST
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corruption of LDA officers
विराजखंड में बनाए गए फ्लैटों का कभी आवंटन नहीं खुला और ये हालात हो गए - फोटो : amar ujala

साल 2011...। स्थान- गोमतीनगर का विराजखंड। 32 फ्लैट बनकर तैयार होते हैं। पर, ये बेचे ही नहीं जाते। कभी इन्हें आवंटन की प्रक्रिया में लाया ही नहीं गया। साल बीतते रहे। फ्लैट भी जर्जर होते रहे। अफसर बदलते रहे। पर, किसी को इसकी सुध नहीं आई। आप हैरान होंगे। पूछेंगे-ऐसा क्यों...? इस जवाब आपको इस उदाहरण से मिल जाएगा।

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आठ महीने पहले वीसी प्रभु एन. सिंह ने इन्हें बेचने का आदेश दिया। पर, उस आदेश की फाइल ही अभियंत्रण और नियोजन विभाग के बीच कहीं गुम हो गई। साफ शब्दों में कहें तो दबा दी गईं। एलडीए ने 2011 में विराजखंड में स्प्रिंग डेल स्कूल के पास मुख्य सड़क पर आवासीय व व्यावसायिक कैंपस बनाया।
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अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के तहत यहां चार मंजिला अपार्टमेंट बनाया गया। इसमें 400 वर्ग फीट के 32 फ्लैट बनाए गए। इनके निर्माण पर एलडीए बजट से 1.5 करोड़ रुपये खर्च किए गए। एमआई बिल्डर ने अपार्टमेंट को बनाया। उम्मीद थी कि 32 जरूरतमंद परिवारों को आशियाना मिलेगा। फिर विराजखंड जैसी लोकेशन पर थे तो इनकी मांग तो होती ही। पर, निर्माण के बाद इनको कभी आवंटन के लिए प्रक्रिया में नहीं लगाया गया।

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1.5 करोड़ खर्च, अब हो रहा कूड़ा डंप

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फ्लैटों का कभी आवंटन नहीं खुला और ये हालात हो गए - फोटो : amar ujala

एलडीए ने 2011 में विराजखंड में स्प्रिंग डेल स्कूल के पास मुख्य सड़क पर आवासीय व व्यावसायिक कैंपस बनाया। अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के तहत यहां चार मंजिला अपार्टमेंट बनाया गया। इसमें 400 वर्ग फीट के 32 फ्लैट बनाए गए। इनके निर्माण पर एलडीए बजट से 1.5 करोड़ रुपये खर्च किए गए। एमआई बिल्डर ने अपार्टमेंट को बनाया। उम्मीद थी कि 32 जरूरतमंद परिवारों को आशियाना मिलेगा। फिर विराजखंड जैसी लोकेशन पर थे तो इनकी मांग तो होती ही। पर, निर्माण के बाद इनको कभी आवंटन के लिए प्रक्रिया में नहीं लगाया गया।


एलडीए ने 2011 में विराजखंड में स्प्रिंग डेल स्कूल के पास मुख्य सड़क पर आवासीय व व्यावसायिक कैंपस बनाया। अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के तहत यहां चार मंजिला अपार्टमेंट बनाया गया। इसमें 400 वर्ग फीट के 32 फ्लैट बनाए गए। इनके निर्माण पर एलडीए बजट से 1.5 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

एमआई बिल्डर ने अपार्टमेंट को बनाया। उम्मीद थी कि 32 जरूरतमंद परिवारों को आशियाना मिलेगा। फिर विराजखंड जैसी लोकेशन पर थे तो इनकी मांग तो होती ही। पर, निर्माण के बाद इनको कभी आवंटन के लिए प्रक्रिया में नहीं लगाया गया।

ऐसा घटिया निर्माण, बिकते भी तो कैसे?

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विराजखंड में बने फ्लैट के हो गए ये हालात - फोटो : amar ujala

फ्लैट में किचन की स्लैब एक फीट चौड़ाई की बनाई गई। आपको भले ही सवाल करें कि इतनी कम चौड़ाई वाले प्लेटफॉर्म पर कैसे खाना बनाया जा सकता है, पर निर्माण के वक्त एलडीए के इंजीनियरों को इस पर कोई हैरानी या परेशानी नहीं हुई। दरवाजे तो पड़े-पड़े ही सड़ गए। साफ है कि घटिया थे। बाथरूम और बिजली की फिटिंग पूरी तरह बेकार हो चुकी है। बहरहाल, एलडीए के इंजीनियर अब कहते हैं कि लगातार खाली पड़े रहने से ऐसा हाल हो गया।

ये हैं जिम्मेदार
24 से ज्यादा इंजीनियरों, सुपरवाइजरों ने नहीं किया अपना काम
एलडीए के जोन-1 के अभियंत्रण में 2011 से लेकर 2018 तक तैनात रहे 24 से अधिक अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता, अवर अभियंताओं और सुपरवाइजरों ने अपना काम ठीक से नहीं किया। इनकी जानकारी में होने के बाद भी प्राइम लोकेशन की संपत्ति को बेचने का प्रयास नहीं किया गया। संपत्ति के लावारिस पड़े होने की सूचना भी शीर्ष स्तर पर नहीं दी गई। नियोजन विभाग भी ले-आउट और नंबर प्लान तैयार कर देने में फेल रहा है।

एलडीए बेचता भी है तो खरीदार को तीन लाख तक खर्च करने पड़ेंगे

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विराजखंड में बने फ्लैट - फोटो : amar ujala
 सहायक अभियंता ने कहा-फाइल नियोजन विभाग भेज दी, नियोजन का दावा-ऐसी कोई सूचना नहीं
सहायक अभियंता दिवाकर त्रिपाठी बताते हैं कि यहां फ्लैटों में अवैध कब्जे भी लोगों ने कर लिए थे। किसी तरह उन्हें बाहर कर नंबर प्लान के लिए फाइल नियोजन विभाग में भेज दी गई थी। वहां से जब नंबर प्लान मिले तो ही संपत्ति विभाग को फाइल आवंटन के लिए भेजी जा सकती है।

उधर, नियोजन विभाग के पास प्रोजेक्ट से जुड़ी हुई कोई सूचना ही नहीं है। फाइल में इन फ्लैटों की कॉस्टिंग भी हो चुकी है। यह 11 लाख रुपये निकली। फ्लैटों में टूट-फूट से निर्माण की कीमत का आकलन कर करीब 7.50 लाख रुपये में यहां फ्लैट की बिक्री प्रस्तावित की गई थी। पंजीकरण खुलने से पहले कॉस्टिंग अब वित्त विभाग को करनी है।

एलडीए बेचता भी है तो खरीदार को तीन लाख तक खर्च करने पड़ेंगे
 लखनऊ विकास प्राधिकरण एक तरफ न बिकने वाले फ्लैटों को सरकारी संपत्ति का नुकसान बताकर उनकी कीमतें घटाकर बेचने की कोशिश में है तो विराजखंड के इन फ्लैटों को आवंटन की प्रक्रिया में न लाना सैकड़ों सवाल खड़े करता है। अगर एलडीए ‘जैसा है, वैसा है’ के आधार पर बेचता है तो खरीदारों को अपने पास से दो से तीन लाख रुपये खर्च करने पड़ेंगे।

1.20 करोड़ रुपये खर्च कर 40 दुकानें बनाईं, एक भी नहीं बेची

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इनके निर्माण पर करीब किए करोड़ों रुपये खर्च - फोटो : amar ujala
आवासीय अपार्टमेंट के ठीक सामने एलडीए ने 40 दुकानों का बाजार बनाया है। वहीं सड़क के दूसरी तरफ पार्किंग के लिए जगह भी छोड़ी। इन दुकानों को कभी बेचा नहीं गया तो कुछ में लोगों ने कब्जा कर लिया। इनके निर्माण पर करीब 1.20 करोड़ रुपये एलडीए ने खर्च किए हैं।

सरकारी संपत्ति का नुकसान है ये...जवाबदेही तो तय हो
 इन सबकी जिम्मेदारी तय कर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और राजस्व हानि की वसूली की जानी चाहिए।

जल्द पूरी होगी आवंटन प्रक्रिया
वर्ष 2011 में निर्माण हो जाने के बाद भी फ्लैटों की बिक्री गोमतीनगर जैसी योजना में नहीं करना चौंकाने वाला है। इसके लिए जिम्मेदारों को चिह्नित करते हुए जल्द आवंटन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। - प्रभु एन सिंह, वीसी, एलडीए
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