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यूपी : अब पिछड़े जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलेंगे कॉर्पोरेट अस्पताल

Fri, 22 Oct 2021 06:01 AM IST
दुष्यंत शर्मा चंद्रभान यादव, लखनऊ
चंद्रभान यादव, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 22 Oct 2021 06:01 AM IST
सार

अगले सप्ताह अस्पताल प्रतिनिधियों व शासन के बीच होगी चर्चा। पीपीपी मोड में कॉलेज के लिए 10 जिलों में जमीन चिह्नित।

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Corporate hospitals will open medical colleges in backward districts of up
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

प्रदेश सरकार की हर जिले में एक अस्पताल खोलने की योजना है। अब तक 59 जिलों को मेडिकल कॉलेज से कवर कर लिया गया है। इसमें 41 पूरी तरह से तैयार हो गए हैं, जबकि 18 का निर्माण कार्य चल रहा है। 

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वहीं, 16 पिछड़े जिलों में पीपीपी मोड में मेडिकल कॉलेज खोलने की कवायद चल रही है। करीब 10 जिलों में जमीन चिह्नित करने के साथ ही नक्शा नजरी भी तैयार कर लिया गया है। शेष जिलों में जमीन की तलाश अंतिम चरण में है। इन जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए देश के विभिन्न हिस्से में चल रहे कॉरपोरेट अस्पताल, निजी मेडिकल कॉलेज और विश्वविद्यालय आगे आए हैं। वे इन जिलों में महानगरों में खुले कॉर्पोरेट अस्पताल जैसी सुविधाएं देना चाहते हैं। 
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चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से अगले सप्ताह एक समिट का आयोजन किया जाएगा। इसमें प्रदेश सरकार और पिछड़े जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने को इच्छुक संस्थाओं के प्रतिनिधियों के बीच पीपीपी मोड के दोनों मॉडलों पर विस्तार से चर्चा होगी। जिन जिलों के लिए दो या इससे अधिक कॉर्पोरेट अस्पताल रुचि दिखाएंगे, वहां के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी। सरकार की कोशिश है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इन अस्पतालों की नींव पड़ जाए। 
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इन पिछड़े जिलों में खुलेंगे मेडिकल कॉलेज
पीपीपी मोड में 16 पिछड़े जिलों में मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे। इन जिलों में बागपत, बलिया, भदोही, चित्रकूट, हमीरपुर, हाथरस, कासगंज, महराजगंज, महोबा, मैनपुरी, मऊ, रामपुर, संभल, संतकबीरनगर, शामली और श्रावस्ती शामिल है।

जब तक सरकार देगी पैसे, जांचें होंगी निशुल्क
जिला अस्पताल अधिग्रहित करने की स्थिति में वहां की ओपीडी सुविधाएं निशुल्क रहेंगी। भर्ती करने पर मौजूदा बेड पर निशुल्क, विकसित किए गए बेड पर 20 फीसदी निशुल्क और बीमित रोगियों के लिए कंपनी के अनुसार भुगतान होगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कार्यक्रम पहले की तरह चलेंगे। जब तक केंद्र व राज्य सरकार वित्त पोषित करेगी, तब तक जांच सुविधाएं निशुल्क रहेंगी। बाद में केजीएमूय से कम दर पर जांच सुविधाएं दी जाएंगी।

पीपीपी मोड में तैयार किए गए दो तरह के मॉडल
पीपीपी मोड में मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए दो तरह के मॉडल तैयार किए गए हैं। पहले मॉडल में मोड ए के तहत निजी अस्पताल व निजी भूमि, मोड बी में निजी क्षेत्र का अस्पताल रहेगा व वहां सरकार मेडिकल कॉलेज के लिए जगह देगी। मोड सी में जिला अस्पताल को निजी क्षेत्र को पट्टे पर जमीन दी जाएगी। वह निजी क्षेत्र वहां मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन उपलब्ध कराएगा। वहीं, मॉडल बी में भारत सरकार की वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) योजना के तहत सुविधाएं दी जाएंगी। इसमें स्कीम एक  के तहत केंद्र व राज्य सरकार 30-30 फीसदी और स्कीम दो में 40-40 फीसदी कैपिटल ग्रांट देगी। मेडिकल कॉलेज चलाने के लिए नेशनल मेडिकल काउंसिल के तहत सभी सुविधाएं देनी होंगी। एमबीबीएस पाठ्यक्रम में तीन लाख रुपये प्रति सीट शुल्क लिया जाएगा।


नौ मेडिकल कॉलेजों को एनएमसी की मंजूरी मिलने के बाद अब पूरा ध्यान पीपीपी मोज के मेडिकल कॉलेजों पर है। कई कॉर्पोरेट समूहों से बात चल रही है। जल्द ही इन कॉलेजों की स्थापना का कार्य शुरू हो जाएगा।
-आलोक कुमार, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा

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