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Lucknow News: प्रसूताओं को जबरन लगा दी गई कॉपर-टी
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केस-1: संक्रमण फैला तो हुई जानकारी
खदरा निवासी मोहम्मद इस्माइल ने बताया कि उनकी पत्नी सोनी को 12 सितंबर 2025 को सिजेरियन प्रसव के लिए भर्ती कराया गया था। आरोप है कि प्रसव पूर्व डॉक्टरों ने कॉपर-टी के सहमति पत्र पर साइन करने का दबाव बनाया। इन्कार करने पर क्वीन मेरी अस्पताल रेफर करने की धमकी दी गई। दबाव में आकर साइन करने पड़े, लेकिन डॉक्टर ने आश्वासन दिया कि कॉपर-टी नहीं लगाई जाएगी। डिलीवरी के एक महीने बाद तक रक्तस्राव नहीं रुका और पस आने लगा। निजी अस्पताल में जांच कराने पर पता चला कि बिना बताए कॉपर-टी लगा दी गई थी, जिससे गंभीर संक्रमण फैल गया।
केस-2: ऑपरेशन कराना है तो लगवानी होगी कॉपर-टी
नजीराबाद की शाहिस्ता की भी डिलीवरी डफरिन अस्पताल में हुई थी। उनके पति अरमान ने बताया कि प्रसव से पहले डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि यदि सरकारी अस्पताल में डिलीवरी करानी है, तो कॉपर-टी लगवाना अनिवार्य है। डॉक्टरों ने यहां तक कहा कि अभी लगवा लो, बाद में 100-150 रुपये देकर निजी क्लीनिक से निकलवा लेना। मजबूरी में परिवार को इस शर्त को मानना पड़ा।
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लखनऊ। शहर के प्रमुख महिला अस्पताल डफरिन में प्रसव के लिए आने वाली दो महिलाओं पर कॉपर-टी के लिए दबाव बनाने का मामला सामने आया है। परिवार नियोजन का टारगेट पूरा करने के नाम पर मानवता को ताक पर रखा जा रहा है। अस्पताल में प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को उनकी मर्जी के खिलाफ कॉपर-टी लगाने के गंभीर मामले सामने आए हैं। आरोप है कि विरोध करने वाली प्रसूताओं के परिजनों को इलाज न देने या दूसरे अस्पताल रेफर करने की धमकी देकर जबरन सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं।
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इस बारे में अस्पताल की प्रमुख अधीक्षिका डॉ. ज्योति मेहरोत्रा ने बताया कि उनके कार्यभार संभालने से पहले ऐसे कुछ मामले संज्ञान में आए थे, जिन पर कार्रवाई की गई है। नियमानुसार कॉपर-टी लगाने से पहले महिला को परिवार नियोजन के लाभ समझाए जाते हैं और उनकी लिखित सहमति के बाद ही प्रक्रिया पूरी की जाती है।
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खदरा निवासी मोहम्मद इस्माइल ने बताया कि उनकी पत्नी सोनी को 12 सितंबर 2025 को सिजेरियन प्रसव के लिए भर्ती कराया गया था। आरोप है कि प्रसव पूर्व डॉक्टरों ने कॉपर-टी के सहमति पत्र पर साइन करने का दबाव बनाया। इन्कार करने पर क्वीन मेरी अस्पताल रेफर करने की धमकी दी गई। दबाव में आकर साइन करने पड़े, लेकिन डॉक्टर ने आश्वासन दिया कि कॉपर-टी नहीं लगाई जाएगी। डिलीवरी के एक महीने बाद तक रक्तस्राव नहीं रुका और पस आने लगा। निजी अस्पताल में जांच कराने पर पता चला कि बिना बताए कॉपर-टी लगा दी गई थी, जिससे गंभीर संक्रमण फैल गया।
केस-2: ऑपरेशन कराना है तो लगवानी होगी कॉपर-टी
नजीराबाद की शाहिस्ता की भी डिलीवरी डफरिन अस्पताल में हुई थी। उनके पति अरमान ने बताया कि प्रसव से पहले डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि यदि सरकारी अस्पताल में डिलीवरी करानी है, तो कॉपर-टी लगवाना अनिवार्य है। डॉक्टरों ने यहां तक कहा कि अभी लगवा लो, बाद में 100-150 रुपये देकर निजी क्लीनिक से निकलवा लेना। मजबूरी में परिवार को इस शर्त को मानना पड़ा।
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लखनऊ। शहर के प्रमुख महिला अस्पताल डफरिन में प्रसव के लिए आने वाली दो महिलाओं पर कॉपर-टी के लिए दबाव बनाने का मामला सामने आया है। परिवार नियोजन का टारगेट पूरा करने के नाम पर मानवता को ताक पर रखा जा रहा है। अस्पताल में प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को उनकी मर्जी के खिलाफ कॉपर-टी लगाने के गंभीर मामले सामने आए हैं। आरोप है कि विरोध करने वाली प्रसूताओं के परिजनों को इलाज न देने या दूसरे अस्पताल रेफर करने की धमकी देकर जबरन सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं।
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इस बारे में अस्पताल की प्रमुख अधीक्षिका डॉ. ज्योति मेहरोत्रा ने बताया कि उनके कार्यभार संभालने से पहले ऐसे कुछ मामले संज्ञान में आए थे, जिन पर कार्रवाई की गई है। नियमानुसार कॉपर-टी लगाने से पहले महिला को परिवार नियोजन के लाभ समझाए जाते हैं और उनकी लिखित सहमति के बाद ही प्रक्रिया पूरी की जाती है।