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निराश्रित, बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना को मुख्यमंत्री ने दी मंजूरी, खर्च होंगे 109 करोड़

Tue, 06 Aug 2019 10:14 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Tue, 06 Aug 2019 10:14 PM IST
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cooperative scheme for stray cattle permitted by cm yogi
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala
प्रदेश कैबिनेट ने निराश्रित, बेसहारा गोवंश का पालन करने वाले किसानों को 30 रुपये प्रतिदिन प्रति पशु देने के लिए मुख्यमंत्री निराश्रित, बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना को मंजूरी दे दी है। इस तरह प्रति निराश्रित पशु पालने पर किसानों को 900 रुपये महीने मिल सकेंगे। यदि वह 10 पशु ले जाएंगे तो 9000 रुपये मिल सकेंगे।
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ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया कि निराश्रित गोवंश का संरक्षण योगी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। 2012 की पशुगणना के मुताबिक प्रदेश में 205.66 लाख गोवंश हैं। इनमें 10-12 लाख निराश्रित गोवंश हैं। प्रदेश सरकार निराश्रित गोवंश के संरक्षण व भरण पोषण के लिए स्थायी-अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल, गो संरक्षण केंद्र, गोवंश वन्य विहार, पशु आश्रय गृह संचालित कर रही है। 
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इसके अलावा 523 पंजीकृत गोशालाओं को कुल संरक्षित गोवंश की संख्या के 365 दिनों के लिए 30 रुपये प्रति गोवंश अनुदान दिया जा रहा है। स्थायी व अस्थायी गो आश्रय स्थलों में संरक्षित निराश्रित गोवंश अधिक संख्या में होने से उनके रख-रखाव में असुविधा हो रही है।
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उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत स्थायी, अस्थायी गोवंश आश्रय स्थलों से निराश्रित, बेसहारा, गोवंश को तय प्रक्रिया के अनुसार इच्छुक पशुपालकों, किसानों या अन्य व्यक्तियों को सुपुर्द किया जा सकेगा। पहले चरण में एक लाख पशुओं को हस्तांतरित किया जाएगा। इस पर करीब 109 करोड़ 50 लाख रुपये खर्च आने का अनुमान है।  इस योजना से सामाजिक सहभागिता बढ़ेगी व निराश्रित व बेसहारा गोवंश की संख्या में कमी आएगी। यह योजना किसानों व पशुपालकों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी भी बना सकेगी।

गोवंश की होगी ईयर टैगिंग, डीएम रखेंगे ब्योरा

डीएम इच्छुक किसानों व पशुपालकों को चिह्नित करेंगे। उनके खाते में डीबीटी के जरिए 30 रुपये प्रति गोवंश प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जाएगा। ऐसे पशुओं की ईयर टैगिंग की जाएगी। पशुओं व पशुपालकों का ब्योरा डीएम रखेंगे। 

इसके लिए तहसील, ब्लॉक व जिला स्तर पर समिति होगी। स्थानीय समिति प्रगति से बीडीओ व एसडीएम को अवगत कराएगी। चिह्नित किसान, पशुपालक सुपुर्द किए गए गोवंश को बेच नहीं सकेगा और न ही छुट्टा छोड़ेगा।  
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