एकेटीयू दीक्षांत समारोह: आईटी सर्विस के लिए भारत की तरफ हैं सारी दुनिया की नजरें
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देश में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (आईटी) में हुई क्रांति इस बात का उदाहरण है कि भारतीय इंजीनियर क्या-क्या कर सकते हैं। आज पूरी दुनिया आईटी सर्विस के लिए भारत की तरफ देख रही है। आने वाले समय में शिक्षा, घरेलू व्यवस्था, मशीनों का संचालन, कृषि क्षेत्र, पंप चलाने, ऑटोमोबाइल्स और एसी को चलाने और बंद करने में मोबाइल डिवाइस महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली है।
कॉलेजों में स्टूडेंट्स मोबाइल एप डेवलप कर रहे हैं और स्टार्टअप चला रहे हैं। आने वाले समय में यह देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव लाएगा। हमें भी बदलना होगा। यह कहना है आल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजूकेशन (एआईसीटीई) के चेयरमैन अनिल डी. सहत्रबुद्धे का।
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि सहत्रबुद्धे ने कहा कि हमारे युवा बिजनेस आइडिया और स्टार्टअप के लिए बेहतर काम कर रहे हैं।
हमने मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सहयोग से मूक्स कोर्स के लिए ऑनलाइन प्लेटफार्म स्वयं शुरू किया है। युवा यहां नए विषय ऑनलाइन पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ाएं। इसका फायदा उन्हें पूरे जीवन में मिलेगा। उन्होंने कहा कि पहले हमें बेहतर तकनीकी के लिए दुनिया की तरफ देखना पड़ता था, आज दुनिया हमारी तरफ देख रही है।
59295 विद्यार्थियों को दी गई मानद उपाधि
दीक्षांत समारोह में राज्यपाल राम नाईक, प्राविधिक व चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन की उपस्थिति में लखीमपुर खीरी के सौरभ वर्मा को चांसलर मेडल समेत 64 मेधावियों को मेडल, 86 को पीएचडी समेत कुल 59295 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की गई। इस अवसर पर एआईसीटीई चेयरमैन अनिल डी. सहत्रबुद्धे को डीएससी मानद उपाधि भी दी गई।
समारोह में सचिव प्राविधिक शिक्षा भुवनेश कुमार, प्रतिकुलपति प्रो. कैलाश नारायण, कुलसचिव ओमप्रकाश राय, लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एसपी सिंह समेत विभिन्न संस्थाओं के निदेशक, प्राचार्य, छात्र-छात्राएं व उनके परिजन उपस्थित थे।
नई चुनौती वाले कोर्सों की दें शिक्षा
शिक्षण संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि वे अपने विद्यार्थियों को उस तकनीक की शिक्षा दें तो आज की चुनौतियों से निपटने में उनके काम आए। सहत्रबुद्धे ने कहा कि इंजीनियरिंग-बायोलॉजी, फिजिक्स व फिलॉस्फी, इंटरप्रेन्योरशिप व साइकोलॉजी, एक-दूसरे से जुड़े हैं। ऐसे में शिक्षा की कोई बाउंड्री नहीं है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया वे नए क्षेत्रों की तरफ बढ़ें और नई स्किल विकसित करें।
एक ही गलती न दोहराएं
सहत्रबुद्धे ने थॉमस एल्वा एडिसन का उल्लेख करते हुए कहा कि हार से निराश न हों, सीख लेकर आगे बढ़ें लेकिन एक ही गलती बार-बार न करें। क्योंकि एडिशन ने एक बार में ही बल्ब का विकास नहीं कर लिया होगा, अगर वे निराश हो गए होते तो आज इलेक्ट्रिक बल्ब का विकास न होता। उन्होंने कहा कि एकेटीयू के प्रयास इस विवि को देश का महत्वपूर्ण विवि बनाएंगे।
डिग्री ली अब मुकाम हासिल करें
विशिष्ट अतिथि प्राविधिक व चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने युवाओं से कहा कि आज का दिन नई ऊंचाइयां छूने का है। आप निपुण हो गए हैं, डिग्री हासिल कर ली है, अब नया मुकाम हासिल करें। हम तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और रोजगार की व्यवस्था कर रहे हैं। जल्द ही युवाओं को गाइड करने की व्यवस्था होगी।
सेवाएं कीं ऑनलाइन, मिला अपना भवन
कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने विवि की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि ईआरपी के माध्यम से अधिकतर सेवाएं ऑनलाइन हो चुकी हैं। विवि को अपना भवन मिला है। साइबर सिक्योरिटी की पढ़ाई होने लगी। इनोवेशन सेंटर शुरू हुआ। डिजिटल मूल्यांकन और ऑनलाइन पेपर भेजने की व्यवस्था हो गई है।