कांस्टेबलों ने दरोगा को धुना, एएसपी आफिस में घुस बचाई जान!
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हजरतगंज कोतवाली में तैनात कांस्टेबल राकेश बहादुर सिंह और जितेंद्र सिंह ने रविवार रात दरोगा ऐनुद्दीन से गाली-गलौज व मारपीट की। पुलिस सूत्रों का कहना है कि दोनों कांस्टेबल अपहरण का नाटक रचने वाले सीतापुर के मो. उवैश को बरामद करके एक लाख रुपया वसूली करने का आरोप लगाकर अपना हिस्सा मांग रहे थे।
चर्चा यह भी है कि लगातार गुडवर्क करने से कोतवाली में तैनात पुलिसकर्मियों का एक गुट ऐनुद्दीन से नाराज चल रहा है। इसी गुट के इशारे पर दोनों कांस्टेबल ने ऐनुद्दीन से मारपीट की।
ऐनुद्दीन ने बताया कि रात करीब दस बजे वह अन्य पुलिसकर्मियों के साथ कोतवाली के गेट पर खड़े थे तभी कांस्टेबल राकेश बहादुर वहां आ गया। ऐनुद्दीन का आरोप है कि राकेश शराब के नशे में धुत था और उसने गाली-गलौज शुरू कर दी। विरोध करने पर जितेंद्र को बुला लिया और दोनों ने मिलकर मारपीट शुरू कर दी।
मौके पर मौजूद दरोगा राहुल सिंह राठौर ने बीच-बचाव किया तो राकेश और जितेंद्र ने उनसे भी अभद्रता की। इसके बाद दोनों ने ऐनुद्दीन को पकड़कर पीटना शुरू कर दिया।
किसी तरह दोनों कांस्टेबल के शिकंजे से छूटकर ऐनुद्दीन भागे और जान बचाने के लिए एएसपी पूर्वी रोहित मिश्रा के ऑफिस में घुस गए। उस वक्त एएसपी पूर्वी ऑफिस में बैठे थे। उन्होंने इंस्पेक्टर विजयमल यादव को कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद दोनों कांस्टेबल को सस्पेंड करने की संस्तुति की गई।
गला दबाकर हत्या के प्रयास की तहरीर दी
दरोगा ऐनुद्दीन ने दोनों कांस्टेबल के खिलाफ गला दबाकर हत्या का प्रयास करने की तहरीर दी है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि तहरीर में ऐनुद्दीन ने लिखा है कि राकेश और जितेंद्र ने गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देते हुए उनका गला दबा दिया।
उन्होंने चीखने की कोशिश की लेकिन मुंह से आवाज नहीं निकली। इंस्पेक्टर विजयमल यादव का कहना है कि दोनों कांस्टेबल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है। अभी एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।
फाइटर के नाम से चर्चित है जितेंद्र सिंह
जितेंद्र सिंह पहले भी झगड़ा-मारपीट करता आया है। अपनी इसी आदत के चलते हजरतगंज कोतवाली में वह फाइटर के नाम से चर्चित है। कुछ महीने पहले उसने एक कांस्टेबल को बेरहमी से मारा था। उसका चार दिन तक अस्पताल में उपचार चला था।
एक अन्य दरोगा को कर रहे हैं जलील
इसके अलावा कोतवाली में तैनात एक दरोगा को बीते तीन दिन से दोनों कांस्टेबल जातिसूचक शब्द कहकर जलील कर रहे थे। पुलिस सूत्रों का कहना है कि कांस्टेबल जितेंद्र फाइटर के खिलाफ आज तक गैर हाजिर की रपट तक नहीं लिखी गई।
जुगाड़ से कोतवाली में जमे हैं कांस्टेबल
जितेंद्र और राकेश बहादुर का तबादला कई दिन पूर्व हो चुका है, लेकिन दोनों जुगाड़ से हजरतगंज कोतवाली में जमे हुए हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि डीआईजी ने दोनों की डेट तक फिक्स कर दी लेकिन हजरतगंज कोतवाली से उन्हें रिलीव नहीं किया जा रहा है।